Lucknow : आजीविका मिशन बना गेम चेंजर, एक करोड़ महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

उत्तर प्रदेश में महिलाएं अब किसी पर आश्रित नहीं, बल्कि आर्थिक स्वावलंबन  से सफलता की नई कहानी गढ़ रही हैं। पिछले नौ साल में महिला सशक्तीकरण के लिए योगी

By INA News Desk
Feb 23, 2026 - 00:15
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Lucknow : आजीविका मिशन बना गेम चेंजर, एक करोड़ महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर
Lucknow : आजीविका मिशन बना गेम चेंजर, एक करोड़ महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

  • महिला सशक्तीकरण योगी सरकार की प्राथमिकता, उद्यमिता की राह पर ग्रामीण महिलाएं
  • अपने हुनर से हर जिले में महिलाएं लिख रहीं सफलता की नई कहानी
  • ग्राम स्तर तक पहुंच रही योजनाओं के चलते महिलाओं की बढ़ रही आय

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण को लेकर योगी सरकार की पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल रही है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन इस मामले में गेम चेंजर साबित हो रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश भर में स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। अभी तक प्रदेश में करीब एक करोड़ पांच लाख महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अपना व्यवसाय संभाल रहीं हैं।
ग्राम स्तर तक पहुंची योजनाओं के चलते महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है और बड़ी संख्या में वे उद्यमिता की राह पर आगे बढ़ रहीं हैं। मिशन के तहत लखपति दीदी अभियान को भी तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है।

गांव-गांव लखपति दीदी
उत्तर प्रदेश में महिलाएं अब किसी पर आश्रित नहीं, बल्कि आर्थिक स्वावलंबन  से सफलता की नई कहानी गढ़ रही हैं। पिछले नौ साल में महिला सशक्तीकरण के लिए योगी सरकार ने जिस तत्परता से सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन किया है, वह अपने आप में मिसाल है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत करीब साढ़े 18 लाख लखपति दीदी का पंजीकरण किया जा चुका है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को स्थायी आय के स्रोत से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जाए। इसके लिए महिलाओं को कौशल आधारित जिम्मेदारियां देकर उन्हें आय के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अब गांव-गांव लखपति दीदी सफलता के साथ अपना काम संभाल रही हैं।

ग्रामीण बैंकिंग सेवाओं को घर-घर पहुंचाने का मॉडल
एक ग्राम पंचायत-एक बीसी सखी योजना के तहत प्रदेश की 57,000 ग्राम पंचायतों में बीसी सखियों की तैनाती का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 50,225 बीसी सखियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अंतर्गत 40 हजार महिलाओं ने अब तक करीब 40,000 करोड़ रुपये का लेन-देन किया है। यह मॉडल ग्रामीण बैंकिंग सेवाओं को घर-घर पहुंचाने में अहम साबित हो रहा है।

कृषि, ऊर्जा से लेकर बैंकिंग तक संभाल रही हैं महिलाएं
ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार, डिजिटल बैंकिंग, ऊर्जा, कृषि और स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़कर बहुआयामी अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे न केवल परिवारों की आय बढ़ रही है बल्कि गांवों में आर्थिक गतिविधियां भी तेज हुईं हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आजीविका मिशन के जरिए महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। 

बुजुर्गों के लिए योजना बनी संजीवनी
बीसी सखी ग्रामीण बैंकिंग के लिए बड़ी उपयोगी साबित हो रही हैं। पहले जहां गांव के लोग बैंक जाने से हिचकते थे, अब वे घर के पास ही जमा-निकासी, पेंशन वितरण और डिजिटल भुगतान जैसी सेवाएं पा रहे हैं। इस पहल ने महिलाओं को न केवल रोजगार दिया, बल्कि उन्हें आर्थिक निर्णयों में सहभागी भी बनाया। इसके साथ ही विशेष तौर पर बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह योजना संजीवनी साबित हो रही है। 

छोटे स्तर पर कारोबार शुरू करने में सहायता
लखपति दीदी योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को लघु उद्योग और स्वरोजगार शुरू करने के लिए आसान, ब्याज मुक्त और चरणबद्ध पूंजी उपलब्ध कराया जाता है। इससे महिलाओं को छोटे स्तर पर कारोबार शुरू करने में सहायता मिलती है और वे परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

प्रमुख भूमिका में महिलाएं-

ड्रोन दीदी-कृषि में उपयोग के लिए ड्रोन प्रदान किए जाते हैं।

बीसी सखी- ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना।

सूर्य सखी - सौर ऊर्जा उपकरणों (सोलर पैनल, स्ट्रीट लाइट) की स्थापना।

विद्युत सखी - घर-घर जाकर मीटर रीडिंग लेना और बिजली बिल जमा करना।

कृषि आजीविका सखी - ग्रामीण महिलाओं को कृषि विशेषज्ञ के रूप में प्रशिक्षित करना।

स्वास्थ्य सखी -ग्रामीण महिलाओं को स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना।

सूक्ष्म उद्यम सखी -ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व्यवसाय स्थापित करने में सहयोग करती हैं।

पशु सखी - पशु चिकित्सा, टीकाकरण, कृमिनाशक और पोषण संबंधी प्राथमिक सेवाएं प्रदान करना।

बीमा सखी - गांव-गांव में लोगों को बीमा सेवाएं उपलब्ध कराती हैं।

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