Lucknow: जनवरी के मुकाबले फरवरी में कुपोषण संकेतकों में गिरावट, योगी सरकार के पोषण कार्यक्रमों का असर।
उत्तर प्रदेश में बच्चों की पोषण की स्थिति में सुधार के सकारात्मक संकेत मिले हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण ट्रैकर पर उपलब्ध आंकड़ों
- फरवरी में बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार, 1.43 करोड़ बच्चों का हुआ परीक्षण
- नाटेपन में लगभग 1.21 प्रतिशत, अति कुपोषित श्रेणी के बच्चों में लगभग 0.12 प्रतिशत तथा अंडरवेट बच्चों में लगभग 0.61 प्रतिशत का सुधार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बच्चों की पोषण की स्थिति में सुधार के सकारात्मक संकेत मिले हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण ट्रैकर पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 की तुलना में फरवरी 2026 में स्टंटिंग में लगभग 1.21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि अति कुपोषित श्रेणी के बच्चों में लगभग 0.12 प्रतिशत तथा अंडरवेट बच्चों में लगभग 0.61 प्रतिशत का सुधार देखा गया है। ये दिखाता है कि योगी सरकार योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए गंभीर है और बच्चों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं कर रही है।
- बड़े पैमाने पर हुआ बच्चों का परीक्षण
पोषण ट्रैकर के माध्यम से बच्चों की पोषण स्थिति की नियमित निगरानी की जा रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छह वर्ष तक के बच्चों की लंबाई, वजन और आयु का आकलन कर उनकी पोषण स्थिति का निर्धारण किया जाता है। फरवरी में प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर परीक्षण अभियान चलाया गया, जिसके तहत 1 करोड़ 43 लाख से अधिक बच्चों का परीक्षण किया गया।
- डिजिटल निगरानी से मिल रहे सकारात्मक परिणाम
प्रदेश में पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बच्चों की पोषण स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इससे डेटा का संकलन और विश्लेषण अधिक सटीक और पारदर्शी हुआ है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा नियमित रूप से बच्चों का परीक्षण और डेटा अपडेट किए जाने से कुपोषण की समय रहते पहचान और आवश्यक हस्तक्षेप संभव हो पा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इसी तरह की निरंतर निगरानी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से आने वाले समय में पोषण संकेतकों में और सुधार देखने को मिलेगा।
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