भारतीय सीमा से ₹103 का पेट्रोल नेपाल पहुंचते ही हो रहा ₹135 का, चंद रुपयों के मुनाफे के लिए नेपाली युवा लगा रहे नियमों को चूना
इस गंभीर स्थिति को भांपते हुए महाराजगंज जिला प्रशासन और सीमा सुरक्षा बल यानी एसएसबी ने बॉर्डर पर अपनी चौकसी को कई गुना बढ़ा दिया है। जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक के संयुक्त निर्देशों पर सीमा से लगे सभी पेट्रोल पंपों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए ग
- भारत-नेपाल सीमा पर धड़ल्ले से जारी है ईंधन की तस्करी, महाराजगंज बॉर्डर पर 'तेल के खेल' से बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
- बॉर्डर पर खुली अंतरराष्ट्रीय तस्करी की पोल, जिला प्रशासन की मुस्तैदी से 120 लीटर अवैध डीजल जब्त, सुरक्षा व्यवस्था और सख्त
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले से सटी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा इन दिनों एक बेहद अनोखे और गंभीर आर्थिक संकट का केंद्र बन चुकी है। दोनों देशों के बीच खुली सीमा और रोटी-बेटी के पारंपरिक संबंधों का फायदा उठाकर सीमावर्ती इलाकों में तेल की तस्करी का एक बड़ा खेल खेला जा रहा है। भारतीय क्षेत्र के पेट्रोल पंपों से कम कीमत पर ईंधन खरीदकर उसे अवैध रूप से नेपाल की धरती पर ले जाकर ऊंचे दामों में बेचने का यह अवैध कारोबार तेजी से पैर पसार रहा है। इस पूरी तस्करी व्यवस्था में सबसे बड़ा खामियाजा महाराजगंज और आस-पास के इलाकों की आम भारतीय जनता को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि पेट्रोल पंपों पर स्थानीय उपभोक्ताओं के लिए अक्सर ईंधन की कृत्रिम कमी हो जाती है। वहीं दूसरी तरफ, सरहद पार के बेरोजगार युवा और तस्कर गिरोह इस आर्थिक विसंगति का अनुचित लाभ उठाकर रोजाना लाखों रुपये का वारा-न्यारा कर रहे हैं।
इस पूरे अवैध कारोबार की तकनीकी और आर्थिक संरचना को देखें तो इसके पीछे दोनों देशों के बीच ईंधन की कीमतों में मौजूद एक बड़ा अंतर काम कर रहा है। वर्तमान समय में भारतीय क्षेत्र में पेट्रोल की कीमत लगभग 103 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है, जबकि नेपाल में प्रवेश करते ही इसी एक लीटर पेट्रोल की कीमत बढ़कर लगभग 135 रुपये तक पहुंच जाती है। कीमतों में प्रति लीटर 30 से 32 रुपये का यह भारी-भरकम अंतर तस्करों के लिए एक बड़े मुनाफे का लालच बन गया है। इस खेल को अंजाम देने के लिए नेपाली युवा और स्थानीय छोटे तस्कर सुबह से ही सक्रिय हो जाते हैं। वे अपनी मोटरसाइकिलों, स्कूटरों और यहां तक कि साइकिलों के जरिए भारतीय सीमा में आते हैं और महाराजगंज के सीमावर्ती पेट्रोल पंपों से अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराते हैं, जिसे बाद में सीमा पार ले जाकर बोतलों और गैलनों में खाली कर दिया जाता है।
तस्करी के इस बढ़ते जाल के कारण महाराजगंज जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित पेट्रोल पंप संचालकों के सामने भी एक अजीब सा संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय भारतीय नागरिकों को अपनी गाड़ियों के लिए ईंधन लेने के लिए लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है, क्योंकि तस्करों के झुंड बार-बार आकर पंपों का स्टॉक खाली कर देते हैं। इस अवैध गतिविधि के कारण भारतीय राजस्व को भी भारी नुकसान हो रहा है, क्योंकि भारत सरकार द्वारा सब्सिडी और टैक्स के समायोजन के बाद जनता को मिलने वाला ईंधन अवैध रूप से दूसरे देश की अर्थव्यवस्था में खप रहा है। स्थानीय लोगों के बीच इस बात को लेकर गहरा असंतोष है कि उनकी जरूरत का तेल उनके अपने ही इलाके में आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जबकि तस्कर बेखौफ होकर इस खेल को मुनाफे की मशीन बना चुके हैं। भारत और नेपाल के बीच 1,750 किलोमीटर से अधिक लंबी खुली सीमा है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले से होकर गुजरता है। इस सीमा पर कई ऐसे पगडंडी वाले और ग्रामीण रास्ते हैं जहां सुरक्षा बलों की चौकियों के बीच की दूरी का फायदा उठाकर छोटे स्तर पर तस्करी को अंजाम देना बेहद आसान हो जाता है, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक निरंतर चुनौती बनी हुई है।
इस गंभीर स्थिति को भांपते हुए महाराजगंज जिला प्रशासन और सीमा सुरक्षा बल यानी एसएसबी ने बॉर्डर पर अपनी चौकसी को कई गुना बढ़ा दिया है। जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक के संयुक्त निर्देशों पर सीमा से लगे सभी पेट्रोल पंपों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अब किसी भी वाहन को एक निश्चित मात्रा से अधिक ईंधन देने और गैलन या प्लास्टिक के डिब्बों में खुले तौर पर पेट्रोल-डीजल बेचने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन की इसी कड़ी निगरानी और मुस्तैदी का एक बड़ा नतीजा हाल ही में देखने को मिला है, जब बॉर्डर पर चेकिंग के दौरान सुरक्षा बलों ने एक संदिग्ध वाहन से 120 लीटर अवैध डीजल बरामद करने में सफलता हासिल की। इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि तस्कर अब केवल दोपहिया वाहनों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर भी इस खेल को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं।
बॉर्डर पर पकड़े गए 120 लीटर डीजल के इस मामले के बाद सुरक्षा बलों ने जांच के दायरे को और अधिक विस्तृत कर दिया है। पकड़े गए तस्करों से पूछताछ में यह बात सामने आई है कि नेपाल के सीमावर्ती बाजारों जैसे भैरहवा और बुटवल में भारतीय डीजल और पेट्रोल की मांग बहुत ज्यादा है, क्योंकि वहां की घरेलू तेल कंपनियां मांग के अनुरूप आपूर्ति करने में विफल साबित हो रही हैं। इस आपूर्ति की कमी को पूरा करने के लिए ही तस्करों ने भारतीय पंपों को अपना निशाना बनाया है। महाराजगंज पुलिस ने अब सीमा से सटे जंगलों और नदी के रास्तों पर भी गश्त बढ़ा दी है, ताकि मुख्य रास्तों से बचकर निकलने वाले तस्करों पर पूरी तरह से नकेल कसी जा सके। इसके साथ ही पेट्रोल पंपों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को भी नियमित रूप से खंगालने की व्यवस्था की गई है।
इस अंतरराष्ट्रीय तेल के खेल का एक और स्याह पहलू यह है कि इसमें दोनों तरफ के स्थानीय अपराधियों का एक मजबूत नेटवर्क काम कर रहा है। भारतीय क्षेत्र के कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंप कर्मी भी कथित तौर पर थोड़े से अतिरिक्त कमीशन के लालच में इन तस्करों को पहचान छुपाकर ईंधन देने में मदद करते हैं। जिला प्रशासन अब ऐसे संदिग्ध पेट्रोल पंपों को चिन्हित कर रहा है जिनके बिक्री आंकड़ों में अचानक बहुत बड़ा उछाल देखा गया है। यदि किसी पंप की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। यह कड़ा रुख इसलिए जरूरी हो गया है क्योंकि यह केवल एक आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि देश की सीमा सुरक्षा से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा भी बन चुका है।
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