पीलीभीत: गोमती उद्गम से बंगो गोमती बाइक यात्रा शुरू, स्वच्छता और अविरल धारा का संदेश लेकर नैमिषारण्य में होगी संपन्न

पीलीभीत के माधोटांडा स्थित गोमती उद्गम से चार दिवसीय बंगो गोमती बाइक यात्रा शुरू हुई। 12 जिलों में प्रवाहित गोमती को निर्मल बनाने के संकल्प के साथ यात्रा नैमिषारण्य पहुंचेगी।

By INA News Desk
Oct 28, 2026 - 21:09
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पीलीभीत: गोमती उद्गम से बंगो गोमती बाइक यात्रा शुरू, स्वच्छता और अविरल धारा का संदेश लेकर नैमिषारण्य में होगी संपन्न
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Report : कुँवर निर्भय सिंह, पीलीभीत

प्रदेश की जीवनदायिनी नदियों में शामिल गोमती को स्वच्छ, अविरल और समृद्ध बनाने के उद्देश्य से माधोटांडा स्थित गोमती उद्गम तीर्थ से चार दिवसीय बंगो गोमती बाइक यात्रा की शुरुआत हुई। सामाजिक संगठन लोक भारती के प्रकल्प बंगो लोक भारती के तत्वावधान में आयोजित इस यात्रा का शुभारंभ बरखेड़ा विधायक स्वामी प्रवक्तानंद ने मां गोमती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती करने के बाद भगवा ध्वज दिखाकर किया। यात्रा का समापन तीर्थ स्थल नैमिषारण्य में जाकर होगा।

प्रदेश के लगभग 12 जनपदों से होकर गुजरने वाली गोमती नदी के संरक्षण, आस्था और स्वच्छता के प्रति जन-जागरण के संकल्प के साथ यह यात्रा निकाली जा रही है। उद्गम स्थल से प्रस्थान करने के बाद पहले पड़ाव के तहत बाइक सवार दल पूरनपुर क्षेत्र के ढक्का और चंदिया हजारा पहुंचा। इसके उपरांत कलीनगर क्षेत्र के पुराना तालुका महाराजपुर, सेल्हा, आठ परिवार, मटइया लालपुर, रमनगरा, नगरिया खुर्द कला और ढकिया तालुका महाराजपुर होते हुए यात्रा गभिया सहराई पहुंची, जहां रात्रि प्रवास की व्यवस्था की गई।

यात्रा के दौरान पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और सीतापुर जनपदों के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों, विशेष रूप से बंगाली बाहुल्य बस्तियों में जनसंवाद और प्रवास के कार्यक्रम रखे गए हैं। स्थानीय लोगों को नदी के किनारों पर स्वच्छता बनाए रखने, जल स्रोतों को दूषित न करने और पर्यावरण संतुलन के लिए पौधारोपण करने का संदेश दिया जा रहा है।

इस अवसर पर लोक भारती के राष्ट्रीय सह सचिव कुंवर नीरज सिंह, बंगो लोक भारती के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. देवज्योति, उत्तराखंड प्रांत संयोजक संजय, स्थानीय सेवा दल के सदस्य योगेश्वर सिंह, कुंवर निर्भय सिंह, शक्ति सिंह, नरेश सिंह, लविश सिंह और शिब्बू सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। आयोजकों ने बताया कि यह प्रयास नदी तटवर्ती समुदायों को नदी की स्वच्छता और उसके संवर्धन के कार्य से सीधे तौर पर जोड़ने के लिए किया जा रहा है।

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