Saharanpur : प्रस्तावित गन्ना नियंत्रण आदेश से मिल मालिकों को लाभ और किसानों की अनदेखी का आरोप- भगत सिंह वर्मा
भगत सिंह वर्मा ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर मांग की है कि किसानों को गन्ने का नकद भुगतान मिले और देरी होने पर मिलों से 18 प्रतिशत ब्याज वसूला जाए। उन्होंने घटतौली करने वाले मिल प्रबंधन को जेल भेजने और गन्ने पर प्रति कुंतल एक किलो की कटौती बंद करने की
सहारनपुर में पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा और भाकियू वर्मा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने कार्यकर्ताओं की बैठक में केंद्र सरकार पर गन्ना किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार गन्ना नियंत्रण आदेश में बदलाव कर बड़े चीनी मिल मालिकों को फायदा पहुंचाना चाहती है, जिसे किसान स्वीकार नहीं करेंगे। वर्तमान नियम के अनुसार, 14 दिन में भुगतान न होने पर मिलों को 15 प्रतिशत सालाना ब्याज देना पड़ता है, लेकिन नए प्रस्तावों से गांवों के छोटे कुटीर उद्योगों, कोल्हू, चरखी और क्रेशर पर इंस्पेक्टर राज थोपकर उन्हें बंद करने की तैयारी है। इसके अलावा, नई मिलों की दूरी 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 25 किलोमीटर करने का प्रस्ताव भी बड़े मिल मालिकों के हक में है, जिससे छोटे उद्योगों को नुकसान होगा।
भगत सिंह वर्मा ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर मांग की है कि किसानों को गन्ने का नकद भुगतान मिले और देरी होने पर मिलों से 18 प्रतिशत ब्याज वसूला जाए। उन्होंने घटतौली करने वाले मिल प्रबंधन को जेल भेजने और गन्ने पर प्रति कुंतल एक किलो की कटौती बंद करने की बात कही। उन्होंने एफआरपी और एसएपी व्यवस्था खत्म कर ₹700 प्रति कुंतल नगद मूल्य देने तथा चीनी का दाम ₹45 से ₹60 प्रति किलोग्राम तय करने की मांग की। वर्मा ने कहा कि गन्ने से सरकार को हर साल भारी राजस्व मिलता है, फिर भी किसानों को सही मूल्य नहीं मिल रहा है। उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सभी वर्गों से अलग पश्चिम प्रदेश के गठन के आंदोलन में शामिल होने की अपील की। बैठक में अशोक मलिक, रामकुमार, मुर्तजा सलमानी, आसिम मलिक, दुष्यंत सिंह और सुरेंद्र सिंह सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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