Sambhal DPO Chandrabhushan Yadav Scam: सम्भल में बड़ा घोटाला, सीडीओ की जांच में जिला प्रोबेशन अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप साबित
Sambhal DPO Chandrabhushan Yadav Scam: सम्भल के जिला प्रोबेशन अधिकारी चंद्रभूषण यादव पर बेटी बचाओ और मिशन वात्सल्य जैसी योजनाओं में गबन के आरोप साबित हुए हैं।
Report : उवैस दानिश, सम्भल
उत्तर प्रदेश के सम्भल जिले में महिला एवं बाल विकास से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं में बड़े पैमाने पर धांधली का एक गंभीर मामला सामने आया है। सम्भल के जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) चंद्रभूषण यादव पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच पूरी हो चुकी है। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) गोरखनाथ भट्ट ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में जिला प्रोबेशन अधिकारी चंद्रभूषण यादव और उनके साथ संबद्ध लिपिक मोहित कुमार के खिलाफ सरकारी धन के दुरुपयोग और गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों को प्राथमिक तौर पर सही पाया गया है। जांच के बाद दोषी अधिकारी को पद से हटाने और गबन की गई राशि की वसूली करने की कड़ी सिफारिश की गई है।
जांच रिपोर्ट के विस्तृत विवरण के अनुसार, महिला और बच्चों के कल्याण के लिए चलाई जा रही 'मिशन वात्सल्य', 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ', 'चिल्ल्ड हेल्पलाइन', 'मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना' और 'विधवा पेंशन योजना' जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं के बजट में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया है। सरकारी खरीद के लिए बने जीईएम (GeM) पोर्टल पर फर्जी कंपनियों के माध्यम से अनुबंध तैयार किए गए और एक ही मोबाइल नंबर व ईमेल आईडी का इस्तेमाल करके कई नकली फर्में संचालित दिखाई गईं। इसके जरिए अवैध रूप से सरकारी खजाने से भुगतान कराया गया। रिपोर्ट में पाया गया कि 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' योजना के तहत बांटी जाने वाली बेबी किट को तय बाजार भाव से बहुत अधिक कीमतों पर खरीदा गया, जबकि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना में अनाथ बच्चों को दिए जाने वाले लैपटॉप भी निर्धारित सरकारी दरों से कहीं अधिक महंगी कीमतों पर खरीदे गए।
कुल मिलाकर, चाइल्ड हेल्पलाइन और मिशन वात्सल्य सहित विभिन्न योजनाओं में करीब 60 लाख रुपये के सरकारी बजट के गबन का मामला प्राथमिक जांच में सिद्ध हुआ है। इसके अलावा, जांच रिपोर्ट में इस बात को भी बेहद गंभीरता से लिया गया है कि जब डिप्टी कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय जांच समिति ने मामले की पड़ताल शुरू की थी, तो आरोपी अधिकारी ने आवश्यक सरकारी दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए। जांच टीम को सहयोग न देना और रिकॉर्ड छुपाना गंभीर प्रशासनिक अनुशासनहीनता के दायरे में माना गया है। इससे पहले भी डिप्टी कलेक्टर की समिति अपनी रिपोर्ट में इन गड़बड़ियों की पुष्टि कर चुकी थी।
इस बड़े वित्तीय घोटाले के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। मुख्य विकास अधिकारी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में गबन की गई पूरी धनराशि की रिकवरी करने, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के कड़े नियमों के तहत दोषियों पर 250 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना लगाने, विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने और चंद्रभूषण यादव को तत्काल प्रभाव से जिला प्रोबेशन अधिकारी के पद से हटाने की संस्तुति की है। सम्भल जिले में सरकारी योजनाओं के बजट में सेंधमारी का यह मामला इस समय पूरे प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में सबसे चर्चित और गंभीर प्रकरणों में शामिल हो गया है।
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