UP Tech Powerhouse: एआई और सेमीकंडक्टर का नया हब बनेगा उत्तर प्रदेश, मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने ग्रेटर नोएडा में पेश किया खाका
उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के बाद अब एआई, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर का बड़ा केंद्र बन रहा है। आईटी मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने ग्रेटर नोएडा में इसकी रूपरेखा रखी।
इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल विनिर्माण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान हासिल करने के बाद उत्तर प्रदेश अब अगली पीढ़ी की तकनीकों का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। ग्रेटर नोएडा में आयोजित 'यूपीज जर्नी फ्रॉम इलेक्ट्रॉनिक्स लीडर टू एआई एंड सेमीकंडक्टर पावरहाउस' विशेष सत्र को संबोधित करते हुए प्रदेश के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि राज्य अब केवल हार्डवेयर असेंबलिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर विनिर्माण और अत्याधुनिक डेटा सेंटर पार्क्स के विकास में निर्णायक छलांग लगा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले दौर में सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने में मिलने वाला है। सरकार का मुख्य ध्येय आधुनिक तकनीकों को प्रयोगशालाओं और आईटी पार्कों से बाहर निकालकर सीधे किसानों के खेतों और कृषि आधारित उद्योगों तक पहुंचाना है, जिससे राज्य के समग्र आर्थिक विकास को नई गति मिल सके।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ेगा एआई
आईटी मंत्री ने राज्य में कार्यरत तकनीकी स्टार्टअप्स के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण आंकड़ा साझा किया। उन्होंने बताया कि हाल ही में 52 प्रमुख स्टार्टअप संस्थापकों के साथ हुई समीक्षा बैठक में यह पाया गया कि अधिकांश स्टार्टअप खाद्य आपूर्ति (फूड सप्लाई) और उपभोक्ता सेवाओं से जुड़े हैं, जबकि विशुद्ध रूप से कृषि क्षेत्र में एआई और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करने वाले स्टार्टअप्स की संख्या अभी सीमित है।
सुनील कुमार शर्मा ने इसे युवा उद्यमियों और निवेशकों के लिए एक बड़े व्यावसायिक अवसर के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल कृषि प्रधान राज्य में एआई आधारित समाधानों जैसे मृदा स्वास्थ्य परीक्षण, फसल रोग पहचान, स्मार्ट सिंचाई और सटीक मौसम पूर्वानुमान के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था का कायाकल्प किया जा सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह प्रदेश में मक्के की खेती को इथेनॉल उत्पादन इकाइयों से सीधे जोड़ने के बाद किसानों को उनकी उपज के बेहतर और लाभकारी दाम मिलने लगे हैं, ठीक उसी तरह एआई-आधारित सप्लाई चेन प्रबंधन से कृषि क्षेत्र में क्रांति लाई जा सकती है।
पारदर्शी नीतियां और ₹600 करोड़ तक का निवेश प्रोत्साहन
राज्य में औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार की कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री के स्तर से उद्योगों की व्यावहारिक आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियों में निरंतर सुधार किए जा रहे हैं। सिंगल विंडो क्लीयरेंस और पारदर्शी सब्सिडी वितरण प्रणाली के तहत विभाग में निवेश से जुड़ी फाइलों को बिना विलंब निपटाने की कड़े मानक तय किए गए हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि पिछले एक वर्ष के दौरान पात्र तकनीकी निवेशकों और उद्योगपतियों को लगभग 500 से 600 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) सीधे वितरित की गई है। इस वित्तीय पारदर्शिता ने वैश्विक और घरेलू टेक दिग्गजों का विश्वास उत्तर प्रदेश में बढ़ाया है।
अवैध हथियारों की पहचान से ब्रह्मोस निर्माण तक का औद्योगिक बदलाव
उत्तर प्रदेश के बदलते औद्योगिक परिदृश्य को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि कानून-व्यवस्था और नीतिगत स्थिरता के दम पर राज्य ने अभूतपूर्व बदलाव देखा है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब कुछ क्षेत्रों की पहचान अवैध हथियारों के निर्माण के लिए होती थी, लेकिन आज उसी उत्तर प्रदेश में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल और अमेठी में आधुनिक एके-203 राइफलों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
इसके साथ ही विश्वस्तरीय एक्सप्रेसवे नेटवर्क, जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित सुदृढ़ होती एयर कनेक्टिविटी और नोएडा-ग्रेटर नोएडा में स्थापित हो रहे विशाल डेटा सेंटर पार्कों ने यूपी को वैश्विक मानचित्र पर तकनीकी निवेश का पसंदीदा गंतव्य बना दिया है।
आर्थिक विस्तार: ₹3.36 लाख करोड़ से ₹9.72 लाख करोड़ तक पहुंचा बजट
राज्य की बढ़ती वित्तीय मजबूती को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश का वार्षिक बजट लगभग 3.36 लाख करोड़ रुपये का था, जो आर्थिक विस्तार, सुधरे हुए कर संग्रह और व्यापक निवेश के चलते अब बढ़कर लगभग 9.72 लाख करोड़ रुपये के विशाल आकार को छू चुका है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता के अमृत काल में प्रवेश कर चुका है। राज्य सरकार इस तकनीकी विकास को केवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) या बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे प्रदेश के सभी 75 जिलों तक विकेंद्रीकृत करने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के आगामी बजट में विशेष प्रावधान कर रही है। उन्होंने वैश्विक निवेशकों, चिप डिजाइनर्स और तकनीकी विशेषज्ञों से उत्तर प्रदेश के तेजी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर और एआई इकोसिस्टम का हिस्सा बनने की अपील की।
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