UP Handicraft Exports: ₹2 लाख करोड़ के पार पहुंचा यूपी का निर्यात, हर जिले का सीएफसी बनेगा हाईटेक स्टूडियो; बोले मंत्री भूपेंद्र चौधरी
उत्तर प्रदेश का निर्यात 2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने ग्रेटर नोएडा में घोषणा की कि हर जिले के कॉमन फैसिलिटी सेंटर को हाईटेक स्टूडियो बनाया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा और लघु उद्योगों को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार डिजिटल तकनीक, आधुनिक बुनियादी ढांचे और सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) का व्यापक नेटवर्क तैयार कर रही है। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर में 'एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स' (EPCH) द्वारा आयोजित विशेष सत्र को संबोधित करते हुए प्रदेश के एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात अब 2 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर चुका है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश देश के सबसे मजबूत 'ग्रोथ इंजन' के रूप में स्थापित हो चुका है। सरकार की प्राथमिक नीति यह है कि इस आर्थिक और औद्योगिक उछाल का सीधा वित्तीय लाभ गांवों में बैठे पारंपरिक कारीगरों, बुनकरों, महिला उद्यमियों और छोटे उत्पादकों की जेब तक पहुंचे।
जिलों के कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) बनेंगे हाईटेक स्टूडियो
स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले हस्तशिल्प उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स और डिजिटल रिटेल प्लेटफॉर्म्स के अनुकूल बनाने के लिए सरकार एक बड़ा नीतिगत कदम उठाने जा रही है। एमएसएमई मंत्री ने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जनपद में स्थापित 'कॉमन फैसिलिटी सेंटर' (CFC) को अत्याधुनिक और हाईटेक स्टूडियो के रूप में उन्नत किया जा रहा है।
इन स्टूडियोज में स्थानीय शिल्पकारों को निम्नलिखित उन्नत सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी:
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पेशेवर 3D एवं हाई-डेफिनिशन फोटोग्राफी: वैश्विक ई-कॉमर्स साइटों पर उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रदर्शित करने के लिए आधुनिक विजुअल टूल्स।
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ब्रांडिंग एवं डिजिटल कैटलॉगिंग: कारीगरों के उत्पादों की स्वतंत्र ब्रांड पहचान स्थापित करने में तकनीकी मार्गदर्शन।
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वैज्ञानिक पैकेजिंग सहायता: लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय परिवहन में नाजुक कलाकृतियों को सुरक्षित रखने हेतु एक्सपोर्ट-ग्रेड पैकेजिंग की सुविधा।
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ई-कॉमर्स लिंकेज: ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों को सीधे अमेजन, फ्लिपकार्ट और वैश्विक बी2बी पोर्टल्स से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना।
सहारनपुर की नक्काशी और भदोही के कालीन को डिजिटल सुरक्षा
भूपेंद्र चौधरी ने राज्य के प्रसिद्ध 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) के प्रमुख शिल्पों का उल्लेख करते हुए कहा कि सहारनपुर की काष्ठ नक्काशी (Wood Carving), भदोही और मिर्जापुर के हस्तनिर्मित कालीन तथा मुरादाबाद के पीतल शिल्प को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का भरोसा जीतने के लिए डिजिटल प्रमाणन (Digital Certification), ऑनलाइन परमिट और 'ट्रेसेबिलिटी' (सप्लाई चेन में उत्पाद के स्रोत की पहचान) जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं। इससे विदेशी आयातकों को यह सुनिश्चित करने में आसानी होगी कि वे पर्यावरण-सम्मत और प्रामाणिक कारीगरों द्वारा निर्मित वस्तुएं खरीद रहे हैं। इसके साथ ही वाराणसी और अन्य प्रमुख क्लस्टर्स में लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और कस्टम्स क्लीयरेंस की बुनियादी सुविधाएं लगातार मजबूत की जा रही हैं।
केवल ट्रेडिंग नहीं, गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर दें ध्यान: के. विजयेंद्र पांडियन
सत्र में उद्योग आयुक्त के. विजयेंद्र पांडियन ने हस्तशिल्प उद्यमियों और निर्यातकों को भविष्य के डिजिटल व्यापार के नए तौर-तरीकों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वैश्विक व्यापार पूरी तरह डिजिटल संचालित होने वाला है, इसलिए स्थानीय शिल्पकारों और निर्यातकों को इंस्टाग्राम, फेसबुक, लिंक्डइन और डिजिटल शोकेस जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
पांडियन ने कारोबारियों को सलाह दी कि वे केवल बिचौलियों के माध्यम से माल बेचने (ट्रेडिंग) तक सीमित न रहें, बल्कि वे उत्पाद की गुणवत्ता, निरंतर आपूर्ति (वॉल्यूम), आकर्षक पैकेजिंग और बेहतर लाभ मार्जिन (Profit Margin) की रणनीति पर काम करें। उन्होंने सुझाव दिया कि जनपदों के विशिष्ट उत्पादों को वैश्विक होम-डेकोर मार्केट की मांग के अनुसार 'मॉडल उत्पाद' के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए फिजिकल एक्सपोर्ट मार्ट्स के साथ-साथ वर्चुअल डिजिटल शोरूम्स स्थापित किए जाने चाहिए ताकि विदेशी खरीदार बिना यात्रा किए भी उत्पादों का 360-डिग्री अनुभव ले सकें।
वैश्विक निवेशकों और खरीदारों का बढ़ता भरोसा
सत्र के समापन पर एमएसएमई मंत्री ने देश-विदेश से आए खरीदारों, डिजाइनर्स और तकनीकी विशेषज्ञों से उत्तर प्रदेश के एक्सपोर्ट इकोसिस्टम में भागीदार बनने का आह्वान किया। उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले कुछ वर्षों में सुधरी कानून-व्यवस्था, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और जेवर एयरपोर्ट जैसी विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी ने उत्तर प्रदेश को औद्योगिक निवेश और निर्यात का सबसे मुफीद केंद्र बना दिया है। प्रदेश की यह औद्योगिक और डिजिटल विकास यात्रा अब रुकने वाली नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाकर राज्य की अर्थव्यवस्था को नए शिखरों पर ले जाएगी।
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