यूपी में खाद्य प्रसंस्करण को नई रफ्तार, 19 बड़े निवेश प्रस्तावों को मिली हरी झंडी, सौर ऊर्जा और आधुनिक तकनीक पर जोर
उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 19 निवेश प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी मिली। बेकरी, फल-सब्जी प्रसंस्करण और सौर ऊर्जा से खुलेंगे रोजगार के द्वार।
उत्तर प्रदेश को कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनाने की दिशा में शासन ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन, किसानों की आर्थिक उन्नति और युवाओं के लिए नए रोजगार सृजित करने के उद्देश्य से खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 19 नए निवेश प्रस्तावों को सैद्धांतिक सहमति दे दी गई है। नई परियोजनाओं में आधुनिक तकनीकों के उपयोग के साथ-साथ हरित ऊर्जा यानी सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे उद्योगों की लागत घटे और वे लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी बने रहें।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के अनुसार, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और विकसित भारत के संकल्प को धरातल पर उतारने का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति के अंतर्गत दिए जाने वाले अनुदान, वित्तीय छूट और अन्य सुविधाओं की जानकारी अधिक से अधिक उद्यमियों तक पहुंचाई जाए, जिससे निवेशक राज्य की ओर आकर्षित हों और किसानों की उपज को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर बाजार मूल्य मिल सके।
इसी सिलसिले में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीणा की अध्यक्षता में निदेशालय स्तर पर मूल्यांकन समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। समिति के समक्ष प्रस्तुत कुल 22 नवीन प्रस्तावों में से गहन परीक्षण के बाद 19 परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की संस्तुति दी गई, जबकि 3 प्रस्तावों को तकनीकी और प्रक्रियात्मक कारणों से लंबित रखा गया है। स्वीकृत प्रस्तावों में बेकरी उत्पाद, मत्स्य आहार, कुक्कुट आहार, निर्जलित फल एवं सब्जी प्रसंस्करण, काजू प्रसंस्करण, सोया उत्पाद, पास्ता निर्माण तथा शीत गृह और तापमान नियंत्रित वाहनों की व्यवस्था से जुड़ी इकाइयां शामिल हैं।
इस पहल में वैश्विक तकनीकी अनुभव वाले युवा उद्यमियों की सहभागिता विशेष चर्चा का विषय रही। अमेरिका के प्रतिष्ठित जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर साइंस में स्नातकोत्तर अक्षत करवा (अग्रूना इंडस्ट्रीज) और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में करीब ढाई दशक का वैश्विक अनुभव रखने वाले आईआईएम कलकत्ता के पूर्व छात्र विनोद प्रताप सिंह (फार्मी फूड) के प्रस्तावों को विशेष रूप से सराहा गया। ये विशेषज्ञ आधुनिक सॉफ्टवेयर और प्रबंधन तकनीकों को कृषि प्रसंस्करण से जोड़कर उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी चयनित इकाइयों को अपनी क्षमता विस्तार और सौर संयंत्र लगाने के निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। इसके अलावा निवेशकों को मिलने वाले सरकारी अनुदान के सुगम अंतरण के लिए बैंकों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वित्तीय सहायता बिना किसी रुकावट के लाभार्थियों तक पहुंच सके और परियोजनाएं समय पर धरातल पर उतर सकें।
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