यूपी में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनीं एलआईसी बीमा सखी, महिलाओं ने 6 महीने में कमाया 2 करोड़ का कमीशन
उत्तर प्रदेश में एलआईसी बीमा सखी कार्यक्रम से ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार। 6 महीने में 2 करोड़ से ज्यादा का कमीशन कमाकर बनीं आत्मनिर्भर।
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही योजनाएं रंग ला रही हैं। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की पहल पर शुरू किया गया एलआईसी बीमा सखी कार्यक्रम ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार और बेहतर आमदनी का मजबूत जरिया बन गया है। इस अभियान के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को भारतीय जीवन बीमा निगम से जोड़कर विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस योजना के प्रभाव पर बात करते हुए कहा कि सरकार की मंशा ग्रामीण महिलाओं को केवल योजनाओं के लाभ तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि उन्हें आर्थिक प्रगति का मुख्य भागीदार बनाना है। उन्होंने बताया कि बीमा सखी के रूप में महिलाएं न केवल अपने घर का खर्च चलाने में मदद कर रही हैं, बल्कि गांव-गांव जाकर परिवारों को वित्तीय सुरक्षा और जीवन बीमा के महत्व से भी परिचित करा रही हैं। इससे ग्रामीण अंचल में वित्तीय साक्षरता और सामाजिक जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के आंकड़ों के अनुसार, इस विशेष कार्यक्रम से जुड़ने के लिए अब तक 4,900 से अधिक महिलाओं ने आवेदन किया है। इनमें से 1,000 से अधिक स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सफलता के साथ क्षेत्र में बीमा सखी के रूप में सेवाएं दे रही हैं। इस अभियान में बीसी सखी और बैंक सखी जैसी जमीनी कैडर की महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है, क्योंकि गांव के लोगों में उनकी अच्छी साख और पहचान है।
अपनी लगन और मेहनत के दम पर इन बीमा सखियों ने शुरुआत के केवल छह महीनों के भीतर ही 2 करोड़ रुपये से अधिक का सामूहिक कमीशन हासिल किया है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि सही प्रशिक्षण, अवसर और मंच मिलने पर ग्रामीण महिलाएं प्रदेश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
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