यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में बागपत के घेवर का जादू: सावन के बाद भी उमड़ी खरीदारों की भीड़, लाइव मेकिंग बनी आकर्षण
ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में बागपत के पारंपरिक घेवर ने धूम मचाई। एक जिला एक व्यंजन स्टॉल पर लोगों ने चखा कुरकुरा और रसीला स्वाद।
ग्रेटर नोएडा। इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों की महक आगंतुकों को अपनी ओर खींच रही है। 'एक जिला एक व्यंजन' पवेलियन में सजे बागपत के घेवर स्टॉल पर सुबह से ही जायके के शौकीनों का तांता लगा हुआ है। दिल्ली, गुरुग्राम और गाजियाबाद समेत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से पहुंचे लोग न केवल इस पारंपरिक मिष्ठान का स्वाद ले रहे हैं, बल्कि इसके बनने की बारीक प्रक्रिया को भी बड़े कौतूहल से देख रहे हैं। आमतौर पर सावन के महीने में मिलने वाली इस मिठाई का गैर-मौसम में ताजा मिलना लोगों के लिए विशेष सुखद अनुभव साबित हो रहा है।
बागपत के अमीनगर सराय के रहने वाले ईश्वर दयाल अग्रवाल का परिवार बीते तीन दशकों से इस मिष्ठान निर्माण की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। स्टॉल का संचालन कर रहे परिवार के सदस्य दीपक गोयल ने बताया कि शुरुआत में कई लोग यह देखकर अचरज में पड़ जाते हैं कि सावन बीत जाने के बाद भी यह ताजा कैसे उपलब्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बागपत और आसपास के इलाकों में घेवर की मांग पूरे साल बनी रहती है और बदलते दौर में डिजिटल माध्यमों से भी इसके प्रति लोगों की रुचि तेजी से बढ़ी है।
स्टॉल पर लोगों की दिलचस्पी बढ़ाने के लिए बागपत से विशेष रूप से पांच कुशल कारीगर बुलाए गए हैं। ये कारीगर आगंतुकों के सामने ही पारंपरिक भट्टी और सांचों में गरमा-गरम ताजा घेवर तैयार कर रहे हैं। शुद्ध दूध से तैयार मावे (खोये) की मोटी परत और नीचे का खस्ता आधार इसे अन्य मिठाइयों से अलग पहचान देता है। स्टॉल पर यह विशेष घेवर छह सौ रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसकी रोजाना भारी मांग निकल रही है।
ट्रेड शो में पहुंचे दिल्ली की सोनाली, गुरुग्राम की रवीना कश्यप और गाजियाबाद के धर्मेंद्र भारद्वाज सहित अनेक आगंतुकों ने इसके स्वाद की सराहना की और लाइव मेकिंग को अपने कैमरों में कैद किया। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों के प्रमुख खान-पान को पहचान दिलाने के लिए पहली बार 'एक जिला एक व्यंजन' मंच दिया गया है, जिसमें बागपत के घेवर को स्थान मिलने से स्थानीय मिष्ठान कला को राज्य स्तर से आगे बढ़कर राष्ट्रीय पहचान मिल रही है।
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