UP Power Crisis: भारी बारिश से चरमराई बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने में जुटी सरकार, अस्पतालों और पेयजल फीडरों को प्राथमिकता पर बहाल करने के आदेश
उत्तर प्रदेश में भारी बारिश से प्रभावित बिजली आपूर्ति सामान्य करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य जारी है। अस्पतालों और पेयजल सेवाओं को प्राथमिकता पर बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश और आंधी-तूफान के कारण बड़े पैमाने पर ध्वस्त हुई विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए राज्य सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है। तेज हवाओं और जलभराव के चलते जगह-जगह पेड़ों के गिरने से 33 केवी और 11 केवी के हाईटेंशन और लो-टेंशन फीडरों में व्यापक ब्रेकडाउन हुआ है तथा सैकड़ों बिजली के पोल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इस आपात स्थिति को देखते हुए प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने सभी विद्युत वितरण निगमों (डिस्कॉम) के शीर्ष अधिकारियों और इंजीनियरों को फील्ड में उतरकर युद्धस्तर पर आपूर्ति सामान्य करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
ऊर्जा विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, ट्रॉमा सेंटरों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और पेयजल आपूर्ति से जुड़े सभी फीडरों व नलकूपों की बिजली सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर चालू की जाए। इसके अतिरिक्त विद्युत हेल्पलाइन नंबर 1912 पर दर्ज होने वाली उपभोक्ताओं की प्रत्येक शिकायत की लगातार मॉनिटरिंग करते हुए उसका फीडरवार त्वरित समाधान सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है। उपभोक्ताओं के असंतोष को कम करने के लिए यह व्यवस्था भी की गई है कि शिकायत दर्ज कराने वाले नागरिकों को कॉल या मैसेज के जरिए यह सटीक जानकारी दी जाए कि उनके इलाके की आपूर्ति कब तक बहाल होने की संभावना है।
शहरी इलाकों में आपूर्ति नियंत्रित, ग्रामीण क्षेत्रों में मरम्मत जारी
डिस्कॉम स्तर से प्राप्त ताजा प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के अधिकांश प्रमुख शहरी केंद्रों में विद्युत आपूर्ति को काफी हद तक सामान्य बना लिया गया है। विभिन्न वितरण कंपनियों के अंतर्गत वर्तमान स्थिति इस प्रकार दर्ज की गई है:
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मध्यांचल विद्युत वितरण निगम: लखनऊ, अयोध्या, सीतापुर और उन्नाव के शहरी क्षेत्रों में स्थिति नियंत्रण में है। केवल बरेली मंडल को छोड़कर अन्य शहरी इलाकों में आपूर्ति बहाल हो चुकी है। मंडल में 33 केवी के लगभग छह सबस्टेशन जलभराव अथवा तकनीकी कारणों से बंद पड़े हैं, जिन्हें देर शाम तक चालू करने के लिए टीमें लगातार काम कर रही हैं।
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पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम: वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज और आजमगढ़ जैसे महानगरों में स्थिति सामान्य है, जबकि बस्ती और संतकबीरनगर के कुछ पॉकेट्स को छोड़कर अन्य शहरी क्षेत्रों में विद्युत प्रवाह सुचारू कर दिया गया है।
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पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम: मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा और सहारनपुर क्षेत्रों में मुख्य ग्रिड सुरक्षित हैं। अमरोहा, बिजनौर, संभल और मुरादाबाद के कुछ ग्रामीण व बाढ़ प्रभावित इलाकों को छोड़कर लगभग सभी जगह लाइनें चालू हैं।
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दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम: कानपुर के आसपास के जिलों में इटावा, कन्नौज, औरैया और फर्रुखाबाद के अत्यधिक बारिश से प्रभावित इलाकों को छोड़कर अधिकांश नगरों में बिजली आपूर्ति पुनः स्थापित कर दी गई है।
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कानपुर विद्युत आपूर्ति कंपनी (केस्को): केस्को परिक्षेत्र में स्थिति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है और 33 केवी का कोई बड़ा ब्रेकडाउन लंबित नहीं है।
अधिक प्रभावित 21 जनपदों में विशेष टीमों की तैनाती
विभाग द्वारा चिन्हित अत्यधिक प्रभावित जनपदों में अंबेडकरनगर, भदोही, आजमगढ़, बलिया, बहराइच, बस्ती, बरेली, गोंडा, देवरिया, लखीमपुर खीरी, मऊ, सिद्धार्थनगर, कानपुर देहात, हमीरपुर, शाहजहांपुर, आगरा, फिरोजाबाद, कानपुर नगर, बुलंदशहर, गोरखपुर और वाराणसी ग्रामीण शामिल हैं। इन जिलों में विद्युत संरचना को सर्वाधिक क्षति पहुंची है।
मुख्यालय स्तर से वरिष्ठ अभियंताओं को नोडल अधिकारी बनाकर सीधे जिलों में भेजा गया है ताकि वे ग्राउंड पर रहकर मरम्मत कार्यों का नेतृत्व कर सकें। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार की आरडीएसएस (RDSS) योजना और बिजनेस प्लान के कार्यों में पहले से अनुबंधित कार्यदायी संस्थाओं के तकनीकी स्टाफ, क्रेन और वाहनों को भी तात्कालिक रूप से आपात अनुरक्षण कार्यों में लगा दिया गया है।
शक्तिभवन में 24 घंटे एक्टिव कंट्रोल रूम, पर्याप्त सामग्री का दावा
यूपीपीसीएल अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चारों डिस्कॉम पूर्वांचल, मध्यांचल, पश्चिमांचल, दक्षिणांचल और केस्को के प्रबंध निदेशकों के साथ विस्तृत समीक्षा की। बैठक में यूपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक नितेश कुमार ने भी फील्ड अधिकारियों को संसाधन प्रबंधन के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए।
अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि फील्ड में ट्रांसफॉर्मर, बिजली के खंभे, कंडक्टर तार, इंसुलेटर और लेबर की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। विभागीय डिपो से आवश्यक सामग्री तुरंत उपलब्ध कराई जा रही है। लखनऊ स्थित शक्तिभवन के केंद्रीय कंट्रोल रूम के साथ-साथ सभी डिस्कॉम मुख्यालयों के नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे सक्रिय हैं। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे एक-एक फीडर की अलग से सूची बनाकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी गांव या मोहल्ला लंबे समय तक अंधेरे में न रहे।
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