उत्तर प्रदेश में पशुजन्य बीमारियों पर नियंत्रण के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू, तैयार होंगे 150 मास्टर ट्रेनर्स

उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग ने लखनऊ में पशुजन्य (जूनोटिक) बीमारियों की पहचान और रोकथाम के लिए दो दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की है।

Jul 9, 2026 - 22:59
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उत्तर प्रदेश में पशुजन्य बीमारियों पर नियंत्रण के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू, तैयार होंगे 150 मास्टर ट्रेनर्स
पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए लखनऊ में बड़ा मंथन, यूपी के सभी जिलों में तैयार होंगे मास्टर ट्रेनर्स

उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग द्वारा पशुओं से इंसानों में फैलने वाली जूनोटिक (पशुजन्य) और प्राथमिकता वाले गंभीर पशु रोगों की रोकथाम व त्वरित पहचान के लिए एक विशेष पहल शुरू की गई है। लखनऊ के एक प्रतिष्ठित होटल में दो दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। इस तकनीकी कार्यशाला में झपाइगो संस्था द्वारा एक विशेष परियोजना के अंतर्गत सहयोग प्रदान किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए पशुपालन विभाग के विशेष सचिव देवेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि पशुओं में होने वाली गंभीर बीमारियों की समय पर रिपोर्टिंग और उनकी कड़ी निगरानी करना बेहद जरूरी है। इसके जरिए किसी भी संभावित बीमारी को महामारी बनने से पहले ही रोका जा सकता है।

विशेष सचिव ने बताया कि इस दो दिवसीय कार्यशाला में हिस्सा ले रहे सरकारी पशु चिकित्सक अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर मास्टर ट्रेनर्स के रूप में काम करेंगे। वे अपने जिलों के अन्य डॉक्टरों और सहयोगी स्टाफ को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे इस तकनीकी ज्ञान का लाभ पूरे प्रदेश के सुदूर ग्रामीण इलाकों तक आसानी से पहुंच सकेगा। इस व्यवस्था से राज्य में पशु रोगों की समय पर पहचान करने, उनकी रिपोर्टिंग करने और संक्रमण से निपटने की प्रशासनिक क्षमता काफी मजबूत होगी। शुरुआती चरण में प्रदेश के 36 जनपदों के दो-दो डॉक्टरों को शामिल किया गया है, जबकि बचे हुए 39 जिलों के लिए अगले सप्ताह एक और दो दिवसीय प्रशिक्षण सत्र आयोजित होगा। इस तरह उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में कुल 150 विशेषज्ञ मास्टर ट्रेनर्स तैयार कर लिए जाएंगे।

इस विशेष तकनीकी सत्र के दौरान आईवीआरआई बरेली और कुमारगंज अयोध्या के पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के प्रख्यात वैज्ञानिकों व विषय विशेषज्ञों द्वारा डॉक्टरों को महत्वपूर्ण प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से बर्ड फ्लू, लेप्टोस्पायरोसिस, जापानी इंसेफेलाइटिस, टीबी, रेबीज, एंथ्रेक्स, लम्पी स्किन डिजीज और ब्रुसेलोसिस जैसी जानलेवा बीमारियों के लक्षण व उनके फैलने के कारणों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है।

प्रशिक्षण के दौरान डॉक्टरों को यह भी सिखाया जा रहा है कि वे किस तरह संक्रमित पशुओं के नमूनों को सुरक्षित तरीके से एकत्र करें, उनकी सुरक्षित पैकेजिंग कैसे करें और जांच के लिए प्रयोगशालाओं तक कैसे पहुंचाएं ताकि संक्रमण फैलने का कोई खतरा न रहे। इस बड़े आयोजन के अवसर पर विभाग के निदेशक (प्रशासन एवं विकास) डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, निदेशक डॉक्टर संगीता तिवारी, संयुक्त निदेशक डॉक्टर विवेकानंद गंगवार और संस्था के स्टेट लीड डॉक्टर संजय त्रिपाठी सहित कई वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे। यह प्रयास राज्य में 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण के तहत इंसानों और पशुओं दोनों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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