योगी कैबिनेट का बड़ा तोहफा- बेसिक व माध्यमिक शिक्षा के 1.70 लाख शिक्षणेत्तर कर्मियों को कैशलेस इलाज की सुविधा
योगी कैबिनेट ने माध्यमिक और बेसिक शिक्षा के 1.70 लाख से अधिक शिक्षणेत्तर कर्मचारियों व उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा जगत से जुड़े कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत शिक्षणेत्तर (नॉन-टीचिंग) कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारजनों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को संपन्न हुई कैबिनेट बैठक में इस जनकल्याणकारी निर्णय पर मुहर लगाई गई। इस फैसले से प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड), वित्तविहीन, संस्कृत विद्यालयों और समग्र शिक्षा परियोजना के अंतर्गत सेवाएं दे रहे 1.70 लाख से अधिक कर्मचारियों व उनके परिवारों को सीधा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मिलेगा।
कैबिनेट निर्णयों की आधिकारिक जानकारी देते हुए प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों, वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों, सहायता प्राप्त संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों, संस्कृत महाविद्यालयों और वित्तविहीन संस्कृत विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रितों को इस योजना से आच्छादित किया जाएगा। इस संवर्ग के लगभग 48,062 कर्मचारियों को योजना का लाभ मिलेगा, जिसके लिए राज्य सरकार 3,000 रुपये प्रति कर्मचारी वार्षिक प्रीमियम की दर से लगभग 14.4186 करोड़ रुपये का वार्षिक वित्तीय व्यय वहन करेगी।
इसी प्रकार बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन बेसिक शिक्षा परिषद, सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों, वित्तविहीन प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों तथा समग्र शिक्षा परियोजना के अंतर्गत कार्यरत शिक्षणेत्तर कार्मिकों और उनके आश्रितों को भी कैशलेस चिकित्सा का लाभ मिलेगा। इस योजना से करीब 1,22,304 शिक्षणेत्तर कार्मिक लाभान्वित होंगे। इनके लिए 3,000 रुपये प्रति कार्मिक वार्षिक प्रीमियम की दर से राजकोष पर 36.6912 करोड़ रुपये का वार्षिक वित्तीय भार आएगा।
सरकारी और पैनलबद्ध निजी अस्पतालों में मिलेगा निशुल्क उपचार योजना के तहत पात्र शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके परिवार के आश्रित सदस्यों को राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ योजना से संबद्ध निजी अस्पतालों में भी अंतःरोगी विभाग (आईपीडी) के अंतर्गत पूर्णतः कैशलेस उपचार की सुविधा प्राप्त होगी। बेसिक शिक्षा विभाग की इस योजना का संचालन 'स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज' (साचीज / SACHIS) के माध्यम से किया जाएगा। उपचार और चिकित्सा प्रक्रियाओं की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप तय की जाएंगी।
स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस के अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा से जोड़ने की घोषणा की थी। अब उसी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए शासन ने विद्यालयों के सुचारु संचालन में रीढ़ की भूमिका निभाने वाले शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इस दायरे में शामिल कर लिया है। गंभीर बीमारी अथवा आपातकालीन चिकित्सा परिस्थितियों में अब कर्मचारियों को इलाज के भारी-भरकम खर्च से मुक्ति मिलेगी और उनके परिवारों को आर्थिक संबल प्राप्त होगा।
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