उत्तर प्रदेश में मनाया जाएगा भूजल सप्ताह, मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने जल संरक्षण कार्ययोजना की समीक्षा की
उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने भूजल स्थिति की समीक्षा की। प्रदेश में भूजल सप्ताह का आयोजन होगा, जिसमें सभी ग्राम पंचायतें और शहरी निकाय शामिल होंगे।
सरकार ने राज्य में पानी की सुरक्षा को मजबूत करने और गिरते जल स्तर को सुधारने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। लखनऊ में प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने वर्तमान भूजल स्थिति, जल संरक्षण और जल संवर्धन की भावी कार्ययोजना की एक उच्च स्तरीय बैठक में विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लंबे समय तक चलने वाले भूजल प्रबंधन उपायों, वर्षा जल संचयन और जनभागीदारी पर विशेष बल दिया। मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को मिलकर एक ऐसी असरदार और परिणाम देने वाली योजना बनाने के निर्देश दिए जिससे पानी के संकट को हमेशा के लिए दूर किया जा सके।
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि खेती और सिंचाई के क्षेत्र में जमीन के पानी पर लगातार बढ़ रहे दबाव को कम करना बेहद जरूरी है। इसके लिए पारंपरिक सिंचाई के तरीकों में बदलाव लाया जाए और ऐसी फसलों को बढ़ावा दिया जाए जिनमें पानी की खपत कम होती है। उन्होंने सूक्ष्म सिंचाई, पॉलीहाउस, शेडनेट, भूमिगत पाइप प्रणाली और एकीकृत सिंचाई को बढ़ावा देने के साथ-साथ सतह पर मिलने वाले पानी की सिंचाई प्रणालियों को फैलाने की बात कही। शहरों के संबंध में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी जल स्रोतों और तालाबों को अवैध कब्जों से मुक्त कराकर उनका संरक्षण किया जाए। पार्कों में सीमेंट के पक्के निर्माण को कम से कम रखा जाए ताकि बारिश का पानी जमीन के भीतर जा सके। इसके अलावा रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग नियमों का कड़ाई से पालन कराने और बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पूरे प्रदेश में एक विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत सात दिनों तक 'भूजल सप्ताह' का आयोजन होगा। इस वर्ष के अभियान के लिए “जल संरक्षण का करें संकल्प, इसका नहीं है कोई विकल्प” का नारा तय किया गया है। मुख्य सचिव ने कहा कि इस अभियान को प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक बड़े जनआंदोलन का रूप दिया जाए। इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जब राज्य की सभी ग्राम पंचायतों, विकास खंडों, नगर पंचायतों, नगर पालिकाओं, नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों को इस जागरूक अभियान से एक साथ जोड़ा जा रहा है। व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए हर स्तर पर नोडल अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। स्कूलों और कॉलेजों के बच्चों व युवाओं को जागरूक करने के लिए रैलियां निकाली जाएंगी, दीवारों पर नारे लिखे जाएंगे और निबंध प्रतियोगिताएं होंगी।
समीक्षा बैठक में प्रस्तुत किए गए आधिकारिक आंकड़ों से यह सुखद बात सामने आई है कि उत्तर प्रदेश में जल संरक्षण के प्रयासों के अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। पिछले 10 सालों के औसत आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 361 विकास खंडों में जमीन के पानी के स्तर में अच्छा सुधार देखा गया है। वहीं 343 विकास खंडों में यह स्थिति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है। इसके साथ ही विभिन्न योजनाओं के असर से राज्य में अत्यधिक दोहन वाले गंभीर विकास खंडों की संख्या में भारी कमी आई है। पहले जहां ऐसे संकटग्रस्त ब्लॉकों की संख्या 113 हुआ करती थी, वह अब घटकर केवल 44 रह गई है। वर्ष 2017 के मुकाबले प्रदेश के कुल सालाना भूजल रिचार्ज में करीब 5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। इस महत्वपूर्ण बैठक में नमामि गंगे विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और अभियंता उपस्थित रहे।
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