UP Divyang Vivah Yojana: दिव्यांग दंपत्तियों को संबल दे रही योगी सरकार, 15 हजार से 35 हजार रुपये तक मिलती है सहायता
यूपी की शादी-विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत 40% या अधिक दिव्यांगता वाले जोड़ों को ₹15,000 से ₹35,000 की सहायता मिलती है। 9 वर्षों में 6,698 दंपत्ति लाभान्वित हुए हैं।
लखनऊ। समाज के वंचित, असहाय और विशेष आवश्यकता वाले नागरिकों को मुख्यधारा से जोड़ने तथा उन्हें आर्थिक व सामाजिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी पहलें लगातार प्रभावी सिद्ध हो रही हैं। इसी कड़ी में प्रदेश के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा संचालित 'शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना' राज्य के दिव्यांग नवदंपत्तियों के लिए बड़ा आर्थिक संबल साबित हो रही है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक इस योजना के तहत 18 दिव्यांग दंपत्तियों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता मुहैया कराई जा चुकी है। राज्य सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के दौरान योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए 2.64 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है, जिसके सापेक्ष अब तक 4.55 लाख रुपये की धनराशि पात्र लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है।
इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के वैवाहिक जीवन में आने वाली वित्तीय कठिनाइयों को दूर करना और समाज में उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है। डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस की व्यवस्था के तहत अब पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है और वास्तविक पात्र व्यक्तियों तक सरकारी सहायता सीधे पहुंच रही है।
दिव्यांगता की श्रेणी के अनुसार 15 हजार से 35 हजार रुपये तक का अनुदान
शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए दंपत्ति में से किसी एक अथवा दोनों का न्यूनतम 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग होना अनिवार्य है। सरकार द्वारा सहायता राशि का निर्धारण दंपत्ति की स्थिति के आधार पर तीन श्रेणियों में किया गया है:
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यदि केवल युवक (पति) दिव्यांग है: ऐसी स्थिति में राज्य सरकार द्वारा नवदंपत्ति को 15,000 रुपये की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
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यदि केवल युवती (पत्नी) दिव्यांग है: महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए इस श्रेणी में सरकार द्वारा 20,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है।
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यदि पति और पत्नी दोनों दिव्यांग हैं: जब वैवाहिक जोड़े में दोनों ही साथी 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता की श्रेणी में आते हैं, तो उन्हें गृहस्थी की सुचारू शुरुआत के लिए अधिकतम 35,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की जाती है।
यह प्रोत्साहन राशि किसी ऋण के रूप में नहीं, बल्कि एकमुश्त सरकारी पुरस्कार के रूप में दी जाती है, जिसे दंपत्ति को कभी वापस नहीं करना होता।
9 वर्षों में 6,698 दिव्यांग दंपत्तियों को मिला सम्मानजनक जीवन
योगी सरकार द्वारा दिव्यांग कल्याण की योजनाओं पर विशेष बल दिए जाने के कारण पिछले साढ़े नौ वर्षों में इस योजना के लाभार्थियों की संख्या में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2017-18 से लेकर वित्तीय वर्ष 2025-26 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 6,698 दिव्यांग दंपत्तियों को इस योजना से आच्छादित किया गया है।
अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान समूचे प्रदेश में 805 दिव्यांग जोड़ों को प्रोत्साहन राशि जारी की गई थी। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में रहने वाले दिव्यांगजन, जो आर्थिक अभाव के कारण विवाह के उपरांत पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर चिंतित रहते थे, उनके लिए यह सहायता राशि नई शुरुआत में बेहद मददगार सिद्ध हुई है।
ऑनलाइन पोर्टल और पीएफएमएस के जरिए सीधा बैंक खातों में अंतरण
प्रशासनिक स्तर पर योजना को पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए विभाग ने संपूर्ण आवेदन प्रक्रिया को डिजिटल पोर्टल पर स्थानांतरित कर दिया है।
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पारदर्शी प्रक्रिया: पात्र दंपत्ति शादी के निर्धारित समयसीमा के भीतर विभागीय आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
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सत्यापन प्रणाली: जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी के स्तर से दस्तावेजों, दिव्यांगता प्रमाण पत्र और विवाह पंजीयन का सत्यापन किया जाता है।
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डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT): सत्यापन के उपरांत पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) के माध्यम से ई-पेमेंट के जरिए राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। इससे किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब या अवैध कमीशनखोरी की संभावना समाप्त हो गई है।
विभागीय अधिकारी का संदेश: सामाजिक सुरक्षा और स्वावलंबन का संकल्प
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के उप निदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने इस संबंध में बताया कि विवाह प्रोत्साहन योजना केवल एक वित्तीय आवंटन नहीं है, बल्कि यह दिव्यांगजनों के प्रति शासन की गहरी संवेदनशीलता का परिचायक है।
डॉ. राय के अनुसार, दिव्यांगजनों को समाज में बराबरी का हक, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जब दो दिव्यांग व्यक्ति या सामान्य व्यक्ति के साथ दिव्यांग साथी जीवन की नई पारी शुरू करते हैं, तो यह सरकारी संबल उनके आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देता है। विभाग का प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक पात्र दिव्यांग दंपत्ति तक इस योजना की जानकारी पहुंचे ताकि कोई भी पात्र जोड़ा इस लाभ से वंचित न रहे।
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