बिजली कनेक्शन के बदले 50 हजार की रिश्वत मांगने का आरोप: ऊर्जा मंत्री एके शर्मा सख्त, दोषी अफसर को सस्पेंड करने के आदेश
लखनऊ में बिजली कनेक्शन के लिए 50 हजार रुपये घूस मांगने के आरोप पर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने सख्त रुख अपनाया है। जांच में दोषी मिलने पर निलंबन के निर्देश दिए।
उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने जनता की समस्याओं के समाधान और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। राजधानी लखनऊ स्थित अपने आवास पर आयोजित नियमित जनसुनवाई के दौरान उन्होंने प्रदेश भर से आए नागरिकों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान पेयजल, अवैध अतिक्रमण, नए सबस्टेशन की स्थापना, बिजली बिलों में विसंगतियों और विद्युत संयोजन से जुड़े कई मामले सामने आए। ऊर्जा मंत्री ने उपस्थित अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए कि जनसामान्य की शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए। जनता का किसी भी स्तर पर उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जनसुनवाई में लखनऊ निवासी विद्युत उपभोक्ता अभिनव त्रिपाठी ने बिजली विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उपभोक्ता ने बताया कि उन्होंने तीन किलोवाट के घरेलू विद्युत कनेक्शन के लिए आवेदन किया था और विभाग द्वारा निर्धारित 11,622 रुपये का प्राक्कलन (एस्टीमेट) भी विधिवत जमा कर दिया था। इसके बावजूद संयोजन नहीं जोड़ा गया। आरोप के अनुसार संबंधित सहायक अभियंता शुभम सिंह ने कनेक्शन देने के बदले 50 हजार रुपये की अनुचित मांग रखी। रकम देने से इनकार करने पर पूर्व के प्राक्कलन को निरस्त कर अचानक लगभग 2.24 लाख रुपये का नया भारी-भरकम बिल थमा दिया गया।

इस गंभीर शिकायत का संज्ञान लेते हुए ऊर्जा मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निष्पक्ष जांच कराने का आदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि मामले की तह तक पड़ताल की जाए और यदि संबंधित सहायक अभियंता पर लगे आरोपों की पुष्टि होती है, तो उन्हें अविलंब निलंबित किया जाए। मंत्री ने कहा कि आम नागरिकों को बेवजह परेशान करना, उन पर अनावश्यक वित्तीय दबाव बनाना या सेवाओं के एवज में अनुचित लाभ की अपेक्षा रखना गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है, जिसे कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ऊर्जा मंत्री ने समस्त विद्युत अधिकारियों को सचेत किया कि नए संयोजनों और बिलिंग से जुड़े मामलों में तय नियमों व पारदर्शी प्रक्रियाओं का अक्षरशः पालन होना चाहिए। बिना ठोस कारण के कार्य को लंबित रखना अथवा उपभोक्ताओं को कार्यालयों के चक्कर लगवाना घोर लापरवाही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रकरण में जवाबदेही तय की जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को पारदर्शी, संवेदनशील और जवाबदेह व्यवस्था का सीधा लाभ मिल सके।
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