यूपी में बाढ़ प्रबंधन को लेकर बड़ी बैठक: प्रमुख सचिव अपर्णा यू का निर्देश- राहत कार्यों में बरतें संवेदनशीलता और पारदर्शिता
लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में प्रमुख सचिव राजस्व अपर्णा यू और राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने बाढ़ प्रबंधन को लेकर कड़े निर्देश जारी किए।
उत्तर प्रदेश में मानसून के दौरान संभावित बाढ़ के खतरों से निपटने के लिए लखनऊ के बख्शी का तालाब स्थित दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्रामीण विकास संस्थान में एक महत्वपूर्ण दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता राजस्व विभाग की प्रमुख सचिव अपर्णा यू ने की, जबकि राजस्व सचिव और राहत आयुक्त डॉक्टर हृषिकेश भास्कर यशोद ने सभी अधिकारियों का स्वागत करते हुए तैयारियों की समीक्षा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय आम जनता की सुरक्षा तय करना और नुकसान को कम से कम करना है। प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि राहत कार्यों के दौरान संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही बहुत जरूरी है, और इसे केवल एक सरकारी ड्यूटी न मानकर जनसेवा का काम समझा जाना चाहिए।
समीक्षा बैठक के दौरान प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि राहत और बचाव कार्यों के समय प्रभावित लोगों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों की जरूरतों को सबसे ऊपर रखा जाए। राज्य के सभी राहत शिविरों में सम्मानजनक और सुरक्षित माहौल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल बजट या संसाधनों को बांट देना ही काफी नहीं है, बल्कि जमीन पर उनकी वास्तविक उपलब्धता और उपयोग की लगातार निगरानी होनी चाहिए। सभी सरकारी विभागों को आपस में बेहतर तालमेल बनाकर काम करना होगा। आपदा की स्थिति से निपटने के लिए पीएम गतिशक्ति पोर्टल जैसी आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लिया जाएगा ताकि योजनाएं सही तरीके से काम कर सकें।
राहत आयुक्त डॉक्टर हृषिकेश भास्कर यशोद ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बाढ़ की तैयारियों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की नियमित बैठकें करने के निर्देश दिए। प्रभावित होने वाले क्षेत्रों के लिए तहसील और ग्राम स्तर पर विशेष माइक्रो प्लान बनाए जा रहे हैं, जिसमें हर संवेदनशील इलाके की जरूरत और वहां मौजूद संसाधनों की पूरी जानकारी होगी। मौसम विभाग और अर्ली वार्निंग सिस्टम से मिलने वाली सूचनाओं को तुरंत गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए मजबूत संचार तंत्र बनाया जा रहा है ताकि समय रहते लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाया जा सके।
इसके साथ ही सभी बाढ़ प्रभावित जिलों में मॉडल फ्लड शेल्टर तैयार करने को कहा गया है, जहां पीने का साफ पानी, शौचालय, बिजली, दवाइयां और महिलाओं व पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं होंगी। आपात स्थिति में सबसे पहले मदद पहुंचाने वाली टीमों को आधुनिक उपकरणों के साथ विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। गांवों में जागरूकता फैलाने के लिए ग्राम पंचायतों, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद ली जाएगी। बिजली आपूर्ति ठप होने की स्थिति से निपटने के लिए सौर ऊर्जा जैसे वैकल्पिक इंतजाम भी किए जा रहे हैं। इस कार्यशाला में प्रोफेसर नवनीत कुमार, डॉक्टर दीप नारायण पाण्डेय, रोहित कुमार समेत विभिन्न जिलों के अपर जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी और सिंचाई व राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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