यूपी में चकबंदी पर बड़ा फैसला: छह जिलों के 13 गांव प्रक्रिया से बाहर, मुजफ्फरनगर में 16 साल बाद काम पूरा
उत्तर प्रदेश में लंबित चकबंदी मामलों के निस्तारण में तेजी आई है। छह जिलों के 13 गांवों को प्रक्रिया से बाहर किया गया, जबकि एक गांव में प्रक्रिया पूर्ण हुई।
लखनऊ। प्रदेश में लंबे समय से अटकी चकबंदी संबंधी कार्यवाहियों के त्वरित निस्तारण और काश्तकारों को उनकी भूमि का स्पष्ट स्वामित्व दिलाने के उद्देश्य से शासन ने प्रक्रिया को गति प्रदान की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप किसानों के भू-अभिलेखों के विवाद रहित निपटारे और उन्हें सरकारी योजनाओं का त्वरित लाभ दिलाने के लिए चकबंदी आयुक्त डॉक्टर हृषिकेश भास्कर यशोद के निर्देश पर छह जनपदों के तेरह गांवों को जोत चकबंदी अधिनियम की धारा 6(1) के तहत प्रक्रिया से मुक्त कर दिया गया है।
प्रक्रिया से बाहर किए गए इन गांवों में कई ऐसे गांव शामिल हैं जहां दशकों से चकबंदी का कार्य अटका हुआ था। मैनपुरी का भांती गांव बीते पैंतीस वर्षों से इस प्रक्रिया में उलझा हुआ था। इसके अलावा बदायूं का सिरतौल गांव चौदह वर्ष, उन्नाव जनपद के दरौली, पीखी, सर्लीद व निहालपुर तथा लखनऊ का शिवपुरी गांव बारह वर्ष से प्रक्रियाधीन थे। वहीं बरेली का कादरगंज गांव दस वर्षों से चकबंदी में फंसा था। इनके साथ ही बिजनौर के हसनअलीपुर व बैबलवाला और बदायूं के बक्सेना व इमलिया गांवों को भी विधिक प्रावधानों के अंतर्गत चकबंदी प्रक्रिया से अलग कर दिया गया है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार इन गांवों में चकबंदी को आगे बढ़ाने में व्यावहारिक और तकनीकी बाधाएं उत्पन्न हो रही थीं। कई गांव वृहद विकास परियोजनाओं के दायरे में आ चुके थे, कुछ क्षेत्र नदियों के कटान से बुरी तरह प्रभावित थे, कई जगह चकबंदी योग्य शुद्ध रकबा चालीस प्रतिशत से भी कम बचा था, जबकि कुछ इलाके औद्योगिक विकास क्षेत्र में अधिग्रहीत हो चुके थे। इन परिस्थितियों में नियमों के तहत इन्हें प्रक्रिया से बाहर करना किसानों के हित में आवश्यक हो गया था। दूसरी तरफ मुजफ्फरनगर के पीपलशाह गांव में पिछले सोलह वर्षों से लंबित चकबंदी प्रक्रिया को निरंतर प्रयासों के बाद जोत चकबंदी अधिनियम की धारा 52(1) के तहत विधिवत पूर्ण कर अंतिम रूप दे दिया गया है, जिससे क्षेत्र के किसानों को जमीन से जुड़े मामलों में बहुत बड़ी राहत मिली है।
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