Labour Codes UP: नई श्रम संहिताएं ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में निभाएंगी अहम भूमिका, ट्रेड शो में बोले श्रम मंत्री अनिल राजभर
ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के विशेष सत्र में श्रम मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि चार श्रम संहिताएं उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाने और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा में गेमचेंजर साबित होंगी।
उत्तर प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा विधायी सुधारों के तहत तैयार की गई चार नई श्रम संहिताएं (लेबर कोड्स) देश और प्रदेश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (कारोबारी सुगमता) को प्रोत्साहित करने में मील का पत्थर साबित होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों के संचालन के लिए एक सुगम और अनुकूल वातावरण तैयार करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उद्योग और श्रमिक एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं, इसलिए कोई भी नीतिगत निर्णय दोनों के संतुलित विकास को ध्यान में रखकर ही लिया जा रहा है।
अनिल राजभर सोमवार को ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में चल रहे 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026' (UPITS) के चौथे दिन आयोजित ‘विशेष श्रम संहिताएं’ विषयक उच्च स्तरीय तकनीकी सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश निरंतर औद्योगिक सुधारों को लागू कर रहा है, जिसका प्रत्यक्ष परिणाम है कि राज्य लगातार दूसरे वर्ष देश भर में नए कारखानों के औपचारिक पंजीकरण के मामले में प्रथम पायदान पर बना हुआ है।
नए कारखानों के पंजीकरण में देश में नंबर-1 बना उत्तर प्रदेश
श्रम मंत्री ने औद्योगिक प्रगति का तुलनात्मक ब्योरा देते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को लेकर उपेक्षा का वातावरण था। जटिल श्रम कानूनों, लालफीताशाही और आए दिन होने वाले विवादों के कारण उद्यमी यहां पूंजी लगाने से हिचकते थे।
उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य ने कानून-व्यवस्था को पूरी तरह सुदृढ़ किया, 24 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की और विश्वस्तरीय एक्सप्रेसवे नेटवर्क खड़ा किया। इन बुनियादी सुधारों के साथ जब श्रम प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाया गया, तो निवेशकों का भरोसा बढ़ा। आज उत्तर प्रदेश नए विनिर्माण संयंत्रों और कारखानों की स्थापना में पूरे देश का नेतृत्व कर रहा है।"
समन्वय ही मूलमंत्र: 'बिना श्रमिक के उद्योग नहीं, बिना उद्योग के श्रमिक नहीं'
सत्र में उपस्थित उद्योगपतियों, निर्यातकों और ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार के समक्ष सदैव यह संवेदनशील चुनौती रही है कि कामगारों के हितों और सामाजिक सुरक्षा पर आंच आए बिना औद्योगिक घरानों का मनोबल ऊंचा रखा जाए। इसी उद्देश्य से सरकार उद्यमियों और कामगारों के बीच सतत त्रिपक्षीय संवाद को बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने दोहराया कि श्रम संहिताओं के निर्माण के दौरान केंद्र और राज्य सरकार ने सभी औद्योगिक संघों, श्रमिक संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों से विस्तृत विचार-विमर्श किया है। सरकार ने उद्योग जगत के लिए अपने दरवाजे सदैव खुले रखे हैं। यदि किसी उद्योगपति या निर्यातक को अनुपालन अथवा श्रम विवादों से जुड़ी कोई व्यावहारिक कठिनाई सामने आती है, तो श्रम विभाग के अधिकारी सीधे संवाद कर उसका त्वरित विधिक समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सिंगल विंडो सिस्टम और एकाधिक पंजीकरणों से मुक्ति
सत्र के दौरान प्रशासनिक रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अपर मुख्य सचिव (श्रम एवं सेवायोजन) आशीष कुमार गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ के सिद्धांत पर काम करते हुए दशकों पुराने लगभग 29 जटिल श्रम कानूनों को चार सुव्यवस्थित संहिताओं में समेटा गया है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इन संहिताओं से संबंधित अधिकांश राज्य नियमावलियों (रूल्स) का प्रारूप पहले ही तैयार और अधिसूचित कर लिया है। उद्योगों की सुविधा के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था को और व्यापक रूप दिया जा रहा है। इसके तहत अब उद्यमियों को विभिन्न श्रम कानूनों के लिए अलग-अलग कार्यालयों और पोर्टलों पर चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, बल्कि एक एकीकृत डिजिटल पोर्टल के माध्यम से सिंगल रजिस्ट्रेशन, सिंगल लाइसेंस और वार्षिक समेकित रिटर्न (Unified Annual Return) दाखिल करने की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे उद्योगों का समय और अनुपालन व्यय दोनों घटेगा।
गीग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पहली बार सामाजिक सुरक्षा
सत्र को संबोधित करते हुए राज्य की श्रमायुक्त सौम्या अग्रवाल ने संहिताओं के मानवीय और सुरक्षात्मक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नई संहिताओं को चार प्रमुख स्तंभों में विभाजित किया गया है:
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वेतन संहिता (Code on Wages): सभी क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए समय पर न्यूनतम मजदूरी और लिंग आधारित वेतन भेदभाव की समाप्ति।
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औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code): विवादों के शांतिपूर्ण और त्वरित निपटारे के लिए द्विपक्षीय वार्ता तंत्र का सुदृढ़ीकरण।
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सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security): पहली बार डिलीवरी बॉय, ऐप-आधारित कैब ड्राइवर और फ्रीलांसर जैसे 'गीग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स' को स्वास्थ्य बीमा और भविष्य निधि जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाना।
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व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता (OSH Code): कार्यस्थल पर दुर्घटना मुक्त वातावरण, महिलाओं को उनकी सहमति से सभी पालियों (नाइट शिफ्ट सहित) में सुरक्षित परिवहन के साथ काम करने का समान अवसर।
श्रमायुक्त ने स्पष्ट किया कि श्रम संहिताओं के जमीनी क्रियान्वयन के लिए औद्योगिक क्लस्टरों में जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी ताकि प्रबंधकों और श्रमिकों दोनों को अपने विधिक अधिकारों और कर्तव्यों की पूरी जानकारी मिल सके।
इस महत्वपूर्ण सत्र में श्रम विभाग के विशेष सचिव जुनैद, अपर श्रमायुक्त बसंत गंगवार, राकेश द्विवेदी, बृजेश कुमार सहित गाजियाबाद, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर और पूरे एनसीआर क्षेत्र के वरिष्ठ श्रम अधिकारी, फिक्की, एसोचैम, आईआईए के प्रतिनिधि तथा प्रमुख सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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