UP Finance Minister Suresh Khanna: 'योगी के आते ही लागू हुआ रूल ऑफ लॉ, यूपी का परिदृश्य 360 डिग्री बदला', ट्रेड शो में बोले सुरेश खन्ना
ग्रेटर नोएडा में आयोजित इंटरनेशनल ट्रेड शो के वित्तीय सत्र में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि कानून का राज स्थापित होने से यूपी का परिदृश्य 360 डिग्री बदल गया है। साइबर फ्रॉड से बचाव के उपाय भी साझा किए।
उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा है कि वर्ष 2017 के बाद राज्य के समग्र विकास और शासन व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव दर्ज किया गया है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनने के साथ ही प्रदेश में वास्तविक अर्थों में 'रूल ऑफ लॉ' (विधि का शासन) लागू हुआ। सुदृढ़ कानून-व्यवस्था और नीतिगत निरंतरता के चलते प्रदेश का पूरा सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक परिदृश्य 360 डिग्री बदल चुका है। सरकार ने 'रिफॉर्म, परफॉर्म एंड ट्रांसफॉर्म' के त्रिस्तरीय मूलमंत्र को धरातल पर उतारते हुए कृषि, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और वित्तीय प्रबंधन को नई दिशा दी है।
ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में चल रहे 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो' (UPITS-2026) के अंतर्गत आयोजित विशेष सम्मेलन ‘फ्रॉम फाइनेंशियल डिसिप्लिन टू ट्रांसपेरेंट सर्विस डिलीवरी’ (वित्तीय अनुशासन से पारदर्शी सेवा वितरण तक) को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने यह विचार रखे। उन्होंने कहा कि जिस उत्तर प्रदेश को कभी विकास के पैमानों पर देश के सर्वाधिक पिछड़े और उपेक्षित राज्यों की कतार में गिना जाता था, वही राज्य आज अपने कठोर वित्तीय अनुशासन और पारदर्शी व्यवस्था के दम पर देश की शीर्ष तीन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती से शुमार हो चुका है।
50 वर्षों से लंबित परियोजनाओं को गति, बुंदेलखंड का कायाकल्प
राज्य के बुनियादी ढांचे में आए बदलावों को रेखांकित करते हुए सुरेश खन्ना ने कहा कि सरकार ने उन सिंचाई और अवसंरचनात्मक परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया, जो पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में 40 से 50 वर्षों तक फाइलों में दबी पड़ी थीं। सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना और बाणसागर जैसी वृहद सिंचाई योजनाओं के पूर्ण होने का सबसे क्रांतिकारी प्रभाव बुंदेलखंड और पूर्वांचल के अंचलों में देखने को मिला है।
उन्होंने विशेष रूप से बुंदेलखंड का उदाहरण देते हुए कहा, "जिस बुंदेलखंड में कभी भीषण जल संकट के कारण लोग पलायन को विवश थे और गर्मी के दिनों में पेयजल तक उपलब्ध नहीं हो पाता था, आज वहां आधुनिक बांधों, नहरों और चेकडैमों के नेटवर्क के चलते किसान साल में तीन-तीन फसलें उगा रहे हैं। सिंचाई और पेयजल का यह व्यापक विस्तार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दृढ़ प्रशासनिक इच्छाशक्ति का ही परिणाम है।"
किसानों की जेब तक पहुंचा पैसा, 6% पर 6 लाख तक का ऋण
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण पर बोलते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि बिचौलियों की व्यवस्था को समाप्त कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से किसानों की उपज का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचाया गया। इससे किसानों की क्रय शक्ति बढ़ी, जिसका सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण बाजारों में मांग और व्यापार के विस्तार के रूप में सामने आया है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का वितरण व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर किया गया है। छोटे और सीमांत किसानों तथा पशुपालकों को वित्तीय संबल देने के लिए सरकार के विशेष सहयोग से पात्र लाभार्थियों को छह लाख रुपये तक का संस्थागत ऋण महज छह प्रतिशत रियायती ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान' (सीएम-युवा) के तहत नए सूक्ष्म उद्यमों और स्ट्रीट वेंडर्स (रेहड़ी-पटरी दुकानदारों) को भी बैंकों से आसान पूंजी सहायता सुनिश्चित कराई गई है।
वित्तीय अनुशासन और रोजगार सृजन की नई मिसाल
सुरेश खन्ना ने कहा कि प्रदेश सरकार ने फिजूलखर्ची पर कड़ा अंकुश लगाकर वित्तीय अनुशासन स्थापित किया है। राजस्व संग्रह में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है और बजट का बड़ा हिस्सा पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) यानी सड़कों, एक्सप्रेसवे, मेडिकल कॉलेजों, हवाई अड्डों और औद्योगिक गलियारों के निर्माण में लगाया जा रहा है।
रोजगार के अवसरों का ब्योरा देते हुए उन्होंने कहा, "पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान प्रदेश में पूर्ण शुचिता, निष्पक्षता और आरक्षण नियमों का पालन करते हुए 9.5 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियों में नियुक्तियां दी गई हैं। भर्ती प्रक्रिया में केवल मेरिट और योग्यता को आधार बनाया गया है। अब मुख्यमंत्री ने आगामी चरण में एक लाख और रिक्त सरकारी पदों पर पारदर्शी भर्ती का लक्ष्य निर्धारित किया है।"
डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा अनिवार्य: 'पहला घंटा सबसे अहम'
सम्मेलन के दूसरे महत्वपूर्ण चरण में तेजी से बढ़ते डिजिटल लेन-देन के दौर में साइबर अपराधों की रोकथाम पर गहन विमर्श हुआ। वित्त मंत्री ने कहा कि डिजिटल बैंकिंग और यूपीआई लेन-देन ने आम आदमी का जीवन बहुत सुगम बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही नागरिकों को साइबर ठगी से बचाव के तौर-तरीकों की पूरी जानकारी होना अनिवार्य है।
सत्र को संबोधित करते हुए साइबर क्राइम के पुलिस अधीक्षक (SP) राजेश यादव ने कहा कि साइबर अपराधी फिशिंग लिंक, फर्जी कॉल, क्लोन वेबसाइट और फर्जी लोन ऐप के माध्यम से लोगों की गाढ़ी कमाई उड़ा रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में घटना के बाद का 'पहला घंटा' (गोल्डन ऑवर) सबसे निर्णायक होता है। यदि पीड़ित व्यक्ति घटना के तुरंत बाद सतर्क होकर शिकायत दर्ज कराता है, तो बैंक और गेटवे नोडल अधिकारियों के समन्वय से चुराई गई रकम को फ्रीज (होल्ड) कराने की संभावना 80 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
एसपी राजेश यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के सभी 75 जनपदों के प्रत्येक थाने में 'साइबर हेल्प डेस्क' स्थापित की गई है। इसके साथ ही राजधानी लखनऊ में 24x7 हेल्पलाइन नंबर 1930 कॉल सेंटर और अत्याधुनिक 'साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर' संचालित है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों, ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों और युवा संगठनों से साइबर सुरक्षा के प्रति व्यापक जन-जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
इस महत्वपूर्ण सत्र में वित्त सचिव संदीप कौर, विशेष सचिव वित्त मनोज कुमार तिवारी, एसबीआई नई दिल्ली के उप महाप्रबंधक राजीव कुमार मिश्रा, नाबार्ड मुंबई के मुख्य महाप्रबंधक संजीव डी. रोहिल्ला तथा केनरा बैंक नई दिल्ली के उप महाप्रबंधक संदीप सक्सेना सहित बैंकिंग व प्रशासनिक क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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