Financial Inclusion: कमजोर और ग्रामीण वर्ग तक बीमा सुरक्षा पहुंचाना सबसे जरूरी, ट्रेड शो में बोले वित्त मंत्री सुरेश खन्ना
ग्रेटर नोएडा के यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि ग्रामीण और कमजोर वर्ग को बीमारी व दुर्घटना के आर्थिक संकट से बचाने के लिए बीमा सुरक्षा की पहुंच बढ़ाना अनिवार्य है।
उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा है कि किसी भी विकासशील समाज में वास्तविक वित्तीय समावेशन तब तक अधूरा है, जब तक कि सुरक्षा की अंतिम कड़ी यानी 'बीमा' की पहुंच समाज के सबसे निचले और ग्रामीण तबके तक सुनिश्चित न हो जाए। उन्होंने रेखांकित किया कि राज्य सरकार के सुनियोजित प्रयासों से शहरी और मध्यम वर्ग में बीमा पॉलिसियों को लेकर समझ और स्वीकार्यता जरूर बढ़ी है, लेकिन ग्रामीण अंचलों, खेतिहर मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक सुरक्षा का यह दायरा पहुंचाना आज की सबसे बड़ी प्रशासनिक व सामाजिक आवश्यकता है।
वित्त मंत्री ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026' (UPITS) के अंतर्गत आयोजित विशेष सम्मेलन ‘वित्तीय समावेशन-बीमा जरूरी है’ को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बीमारी, सड़क दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा जैसी अप्रत्याशित विपत्तियां सबसे गहरा आर्थिक आघात निर्धन परिवारों पर करती हैं। ऐसे कठिन समय में बीमा किसी भी परिवार को कर्ज के दुष्चक्र में फंसने से बचाने और उसकी संचित पूंजी को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी संबल साबित होता है।
जितना व्यापक प्रचार-प्रसार, उतना ही व्यापक जन-लाभ
संबोधन के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा की कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके बावजूद धरातल पर जानकारी के अभाव में कई पात्र परिवार इन सुविधाओं का समय पर उपयोग नहीं कर पाते।
उन्होंने कहा, "सक्षम और शिक्षित वर्ग को अपने अधिकारों, प्रीमियम दरों और क्लेम की तकनीकी जानकारी आसानी से मिल जाती है। इसके विपरीत, गांवों में रहने वाले गरीब परिवारों को यह स्पष्ट नहीं होता कि संकट आने पर बीमा कंपनी से सहायता कैसे ली जाए। योजनाओं का जितना अधिक और सरल भाषा में प्रचार-प्रसार होगा, समाज के अंतिम व्यक्ति को उतना ही वास्तविक लाभ मिलेगा। इस अभियान में ग्राम प्रधानों, पंचायत प्रतिनिधियों और जमीनी स्तर पर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं को जागरूक कर उन्हें संवाहक बनाया जाना चाहिए।"
बीमा एजेंटों को दो टूक सीख: 'सिर्फ पॉलिसी न बेचें, शर्तें भी समझाएं'
सुरेश खन्ना ने बीमा कंपनियों और उनके अधिकृत एजेंटों की कार्यशैली पर सीधा संदेश देते हुए कहा कि एजेंटों की भूमिका केवल अपना व्यापारिक लक्ष्य (टारगेट) पूरा करने और पॉलिसी बेचने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने कंपनियों से अपील की कि वे पॉलिसीधारक को प्रीमियम भुगतान की समय-सीमा, पॉलिसी नवीनीकरण (रिन्यूअल) की तिथियों, क्लेम की औपचारिकताओं और सबसे महत्वपूर्ण—पॉलिसी में क्या शामिल नहीं है (Exclusions)—की स्पष्ट जानकारी दें। जब ग्राहक को नियम और शर्तों का पहले से पूरा ज्ञान होगा, तो विपत्ति के समय उसे अस्पतालों या दफ्तरों में क्लेम अस्वीकृत होने की पीड़ा नहीं झेलनी पड़ेगी।
थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस की अनदेखी पर जताई चिंता
सड़क सुरक्षा और कानूनी प्रावधानों का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने मोटर वाहनों के 'थर्ड पार्टी इंश्योरेंस' (तृतीय पक्ष बीमा) की अनदेखी को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में लोग अक्सर नया वाहन खरीदने के बाद रिन्यूअल के समय थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराने में लापरवाही बरतते हैं।
उन्होंने आगाह किया कि सड़क दुर्घटना में किसी तीसरे व्यक्ति को शारीरिक या संपत्ति का नुकसान पहुंचने पर कानूनन भारी भरकम मुआवजे का दायित्व सीधे वाहन मालिक पर आ जाता है। यदि वाहन का वैध थर्ड पार्टी बीमा नहीं है, तो गरीब या सामान्य परिवार के लिए अदालती मुआवजे का भुगतान करना नामुमकिन हो जाता है और पूरी संपत्ति दांव पर लग जाती है। इसलिए दोपहिया और ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसे वाहनों का अनिवार्य बीमा कराने के लिए ग्रामीण स्तर पर विशेष जागरूकता शिविर लगाए जाने चाहिए।
हेल्थ इंश्योरेंस: नेटवर्क अस्पताल के बाहर भी क्लेम की व्यवस्था
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) और विभिन्न बीमा कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी भ्रांतियों का निवारण किया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यदि कोई मरीज आपात स्थिति में बीमा कंपनी के कैशलेस नेटवर्क या इम्पैनल्ड अस्पताल से बाहर भी इलाज कराता है, तो वैध मेडिकल बिल, डिस्चार्ज सारांश और औपचारिकताएं पूरी करने पर 'रीइम्बर्समेंट' (प्रतिपूर्ति) के तहत क्लेम प्राप्त किया जा सकता है।
वित्त मंत्री ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसी उपयोगी तकनीकी जानकारियां आम जनमानस तक पहुंचना आवश्यक हैं ताकि अस्पतालों में भर्ती होने के दौरान परिवारों को अनावश्यक वित्तीय मानसिक तनाव न झेलना पड़े।
आयुष्मान योजना बनी वरदान: 5 लाख तक मुफ्त उपचार
कार्यक्रम में 'प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' (आयुष्मान भारत) के प्रभाव की चर्चा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि पहले गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, किडनी फेलियर, लिवर सिरोसिस या हृदय रोग का इलाज कराने में निर्धन परिवारों की जीवनभर की जमा-पूंजी समाप्त हो जाती थी। लोगों को अपने घर-खेत तक बेचने या गिरवी रखने पड़ते थे।
उन्होंने कहा कि आयुष्मान योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र परिवार को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवर प्रदान किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में इस योजना के वित्तीय पोषण में केंद्र सरकार की 60 प्रतिशत और राज्य सरकार की 40 प्रतिशत की मजबूत सहभागिता है। योजना की राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी के कारण उत्तर प्रदेश का कोई भी लाभार्थी देश के किसी भी राज्य में सूचीबद्ध बड़े अस्पतालों में जाकर बिना एक भी पैसा खर्च किए उच्च स्तरीय सर्जरी और उपचार प्राप्त कर सकता है।
सम्मेलन के समापन पर उन्होंने बीमा क्षेत्र के नीति-निर्माताओं से आग्रह किया कि वे माइक्रो-इंश्योरेंस (लघु बीमा) उत्पादों को और अधिक किफायती व सरल बनाएं ताकि समाज के वंचित तबके का प्रत्येक नागरिक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ सके।
इस महत्वपूर्ण सत्र में उत्तर प्रदेश शासन की वित्त सचिव संदीप कौर, आईआरडीएआई के महाप्रबंधक पंकज तिवारी, एक्सिस मैक्स लाइफ के उपाध्यक्ष सुमित सत्यन, बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस के उपाध्यक्ष एजाज खान, केयर हेल्थ (रूरल) के मुख्य वितरण अधिकारी अतुल सबरवाल सहित बैंकिंग और बीमा क्षेत्र के अनेक विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
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