UP Defence Corridor: यूपी डिफेंस कॉरिडोर में ₹40,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, उद्योग लगने तक निवेशकों की होगी हैंडहोल्डिंग: मंत्री नंदी
ग्रेटर नोएडा ट्रेड शो में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल नंदी ने कहा कि यूपी डिफेंस कॉरिडोर के 6 नोड्स में ₹40,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। उद्योग लगने तक सरकार निवेशकों का पूरा सहयोग करेगी।
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने कहा है कि राज्य ने देशी और विदेशी निवेशकों के बीच अपनी साख और विश्वसनीयता निरंतर संवाद, नीतिगत पारदर्शिता और चौतरफा प्रशासनिक सहयोग के बल पर स्थापित की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में ऐसा निवेश-अनुकूल परिवेश तैयार किया गया है, जहां सरकार की जिम्मेदारी केवल एमओयू हस्ताक्षर कराने या निवेशकों को आमंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पहली ईंट रखने से लेकर उत्पादन शुरू होने तक निवेशकों की संपूर्ण हैंडहोल्डिंग (सतत मार्गदर्शन और सहयोग) सुनिश्चित की जा रही है।
ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में चल रहे 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026' (UPITS) के चौथे दिन उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा आयोजित ‘फ्रॉम योर फैक्ट्री टू द फ्रंट लाइन’ विशेष रक्षा परिचर्चा सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए औद्योगिक विकास मंत्री ने यह महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने बताया कि दुनिया के विभिन्न देशों और प्रमुख औद्योगिक महानगरों में आयोजित रोड शो और निवेशकों से सीधे संवाद का ही सकारात्मक परिणाम है कि आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश के प्रति वैश्विक पूंजीपतियों का भरोसा अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है।
6 नोड्स में ₹40,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव और 1,142 हेक्टेयर भूमि आवंटित
उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की अद्यतन प्रगति का आधिकारिक ब्योरा साझा करते हुए मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' ने बताया कि कॉरिडोर के अंतर्गत चिन्हित सभी छह नोड्स लखनऊ, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़ और आगरा में रक्षा विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए निवेशकों का भारी रुझान देखा गया है।
उन्होंने बताया कि अब तक इन छह नोड्स में लगभग 40,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। औद्योगिक इकाइयों के धरातलीय क्रियान्वयन के लिए यूपीडा द्वारा करीब 1,142 हेक्टेयर विकसित औद्योगिक भूमि विभिन्न कंपनियों और रक्षा विनिर्माताओं को विधिवत आवंटित की जा चुकी है। झांसी और कानपुर में बड़े रक्षा प्रोजेक्ट्स की आधारशिला रखी जा चुकी है, जबकि लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण और अलीगढ़ में लॉक व हार्डवेयर से जुड़े रक्षा कलपुर्जों के कारखाने तेजी से आकार ले रहे हैं।
'फाइल लेकर विभागों के चक्कर काटने का दौर समाप्त'
औद्योगिक विकास मंत्री ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली में आए बदलाव को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी व्यवस्था को स्थायी बनाना है, जिसमें किसी भी उद्योगपति या निवेशक को अपनी फाइल लेकर एक विभाग से दूसरे विभाग के चक्कर न लगाने पड़ें।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा, "निवेशक के राज्य में कदम रखते ही उसकी तकनीकी, वित्तीय और अवसंरचनात्मक आवश्यकताओं को समझना और सिंगल विंडो क्लीयरेंस के जरिए समयबद्ध अनुमतियां उपलब्ध कराना शासन की प्रतिबद्धता है। केवल जमीन का आवंटन कर देना पर्याप्त नहीं होता; निवेशक को कनेक्टिविटी, बिजली, टेस्टिंग रेंज, आरएंडडी सुविधाएं और औद्योगिक सुरक्षा का संपूर्ण पैकेज मिलना चाहिए। निवेशक सुविधा को कार्यालय के दैनिक व्यवहार और कार्यसंस्कृति का अभिन्न अंग बनाया गया है।"
रक्षा सप्लाई चेन: केवल टैंक-तोप नहीं, एमएसएमई के लिए असीम अवसर
सत्र के दौरान रक्षा क्षेत्र के समग्र विनिर्माण परिदृश्य पर चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि रक्षा उद्योग का मतलब केवल लड़ाकू विमान, टैंक या मिसाइल बनाना भर नहीं है। इसके पीछे एक विशाल और जटिल आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) काम करती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक रक्षा प्रणालियों में प्रयुक्त होने वाले प्रिसीजन कंपोनेंट (सटीक यांत्रिक कलपुर्जे), इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, सेंसर तकनीक, उन्नत बैटरियां, विशेष सैन्य केबल, एम्बेडेड सॉफ्टवेयर, तकनीकी टेक्सटाइल, नैनो और एडवांस मटेरियल, सुरक्षित पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में असीम संभावनाएं मौजूद हैं। लखनऊ से लेकर झांसी तक विकसित हो रहे इकोसिस्टम का सबसे बड़ा लाभ उत्तर प्रदेश के पारंपरिक एमएसएमई, स्टार्टअप्स और इंजीनियरिंग कंपनियों को मिल रहा है। स्थानीय इकाइयां बड़े रक्षा उत्पादकों की टियर-1 और टियर-2 सप्लायर बनकर अपने कारोबार का विस्तार कर सकती हैं।
कनेक्टिविटी, कानून-व्यवस्था और भरोसा: औद्योगिक प्रगति के तीन स्तंभ
मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ने जोर देकर कहा कि किसी भी राज्य में दीर्घकालिक पूंजी निवेश की स्थापना तीन बुनियादी शर्तों पर निर्भर करती है सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी और सरकारी नीतियों पर अटूट भरोसा।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश का 'एक्सप्रेसवे प्रदेश' बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का संजाल, फ्रेट कॉरिडोर और निर्बाध विद्युत आपूर्ति ने प्रदेश में माल ढुलाई और व्यापार की लागत को काफी कम कर दिया है। उन्होंने देश-विदेश के उद्यमियों से आह्वान किया कि वे यूपीडा और उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर से जुड़कर भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
रक्षा क्षेत्र की मांग सुनिश्चित, बाजार अनुमान पर आधारित नहीं: कर्नल संजय सिंह
सत्र में तकनीकी दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) रिटायर्ड कर्नल संजय सिंह ने उद्योगों को रक्षा विनिर्माण में प्रवेश के व्यावहारिक सूत्र समझाए। उन्होंने कहा कि सामान्य उपभोक्ता बाजार की तरह रक्षा क्षेत्र की मांग किसी अनुमान या अस्थिरता पर निर्भर नहीं होती, बल्कि यह सशस्त्र बलों और सुरक्षा एजेंसियों की पूर्व-निर्धारित संप्रभु आवश्यकताओं पर आधारित होती है। इसलिए स्वदेशी विनिर्माण के लिए यहां एक सुरक्षित, सुनिश्चित और दीर्घकालिक घरेलू बाजार पहले से उपलब्ध है।
कर्नल संजय सिंह ने उद्यमियों से आग्रह किया कि वे अपनी मौजूदा मशीनरी और तकनीकी क्षमताओं का पुनर्मूल्यांकन करें और यह पहचानें कि वे रक्षा क्षेत्र के किस विशिष्ट कंपोनेंट का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यूपीडा कॉरिडोर के भीतर कॉमन टेस्टिंग फैसिलिटी, परीक्षण प्रयोगशालाएं, स्किल सेंटर और रक्षा नवाचार हब स्थापित कर रहा है, जिससे छोटे स्टार्टअप्स और मध्यम उद्योगों को महंगे परीक्षण ढांचों के लिए दूसरे राज्यों या विदेश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
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