यूपी में धान क्रय केंद्रों पर किसानों को न हो परेशानी, कोटेदारों का दीवाली से पूर्व हो भुगतान: मनोज कुमार पाण्डेय
खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने राइस मिलर्स और अधिकारियों के साथ की बैठक। धान खरीद में सरलता, प्रोत्साहन राशि और दीवाली से पूर्व कोटेदारों के भुगतान के निर्देश।
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत प्रदेश में धान खरीद व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, सुगम और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने बापू भवन स्थित कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ प्रदेश भर के मान्यता प्राप्त राइस मिलर्स संघों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। खाद्य मंत्री ने दो-टूक निर्देश दिए कि धान क्रय केंद्रों पर आने वाले किसानों को किसी भी प्रक्रियागत या तकनीकी जटिलता का सामना न करना पड़े और उनका शत-प्रतिशत धान सुगमता से खरीदा जाए। इसके साथ ही उन्होंने त्योहार के दृष्टिगत दीपावली से पूर्व राशन कोटेदारों का समस्त देय भुगतान अनिवार्य रूप से संपन्न कराने के कड़े आदेश दिए।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा, उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित कराने और धान खरीद तंत्र को बिचौलियों से मुक्त रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को सचेत किया कि धान तौल, उठान, गुणवत्ता परीक्षण अथवा भुगतान में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, लापरवाही या किसान उत्पीड़न की शिकायत मिली, तो दोषियों के विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई तय की जाएगी।

समीक्षा बैठक में राइस मिलर्स प्रतिनिधियों ने धान खरीद नीति, कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) संप्रदान, चावल रिकवरी दर, प्रोत्साहन राशि, मिलों के ऑनलाइन सम्बद्धीकरण, भंडारण संकट और लंबित भुगतानों को लेकर अपनी व्यावहारिक कठिनाइयां रखीं। प्रमुख बिंदुओं पर विमर्श करते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:
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प्रोत्साहन राशि में संशोधन: खरीफ वर्ष 2026-27 में समाप्त की गई प्रोत्साहन राशि को पुनः लागू करने और इसे ₹35 से बढ़ाकर ₹50 अथवा ₹100 प्रति कुंतल करने की मिलर्स की मांग पर वित्तीय एवं नीतिगत परीक्षण के निर्देश दिए गए।
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चावल रिकवरी मानक: हाइब्रिड धान की मिलिंग में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए 1.5 प्रतिशत की वर्तमान छूट को 2 प्रतिशत करने की मांग का विभागीय मानकों के अनुरूप परीक्षण कराने का निर्णय लिया गया।
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सम्बद्धीकरण प्रणाली: मिलों के स्वचालित (ऑटोमैटिक) सम्बद्धीकरण के साथ-साथ स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मैनुअल सम्बद्धीकरण का विकल्प देने की व्यवहार्यता पर सहमति बनी, ताकि खरीद प्रभावित न हो।
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सीएमआर संप्रदान और होल्डिंग चार्ज: पूर्व सत्र में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के डिपो में स्थान की कमी, फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) और बोरियों के अभाव से हुए विलंब की निष्पक्ष जांच होगी। जहां मिलर्स की गलती नहीं पाई जाएगी, वहां लंबित प्रोत्साहन राशि और होल्डिंग चार्ज की कटौतियों में राहत दी जाएगी।
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एग्री स्टैक व पंजीकरण विसंगतियां: किसान पंजीकरण पोर्टल और एग्री स्टैक डाटा में गाटा विवरण की विसंगतियों को तत्काल सुधारने के निर्देश दिए गए, ताकि तकनीकी कारणों से कोई भी पात्र किसान धान बेचने से वंचित न रहे।
खाद्य एवं रसद मंत्री ने कहा कि अन्नदाता की खुशहाली और प्रदेश का चावल उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं। बैठक में प्रमुख सचिव एवं आयुक्त खाद्य एवं रसद अनिल कुमार, विशेष सचिव अनीता वर्मा सिंह, अपर आयुक्त कामता प्रसाद, अपर आयुक्त सत्यदेव और आरएफसी मुख्यालय अशोक कुमार पाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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