यूपी में धान खरीद का नया रिकॉर्ड: चार साल में 37.49 लाख से अधिक किसानों को मिला न्यूनतम समर्थन मूल्य का फायदा, पिछली सरकार से 152 प्रतिशत ज्यादा

उत्तर प्रदेश में धान खरीद को लेकर नया कीर्तिमान बना है। चार सालों में 37.49 लाख किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का सीधा लाभ मिला, जो पिछली सरकार से 152% अधिक है।

By INA News Desk
Oct 28, 2026 - 12:46
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यूपी में धान खरीद का नया रिकॉर्ड: चार साल में 37.49 लाख से अधिक किसानों को मिला न्यूनतम समर्थन मूल्य का फायदा, पिछली सरकार से 152 प्रतिशत ज्यादा
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उत्तर प्रदेश में किसानों से सीधे धान खरीद की व्यवस्था ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। बीते चार वर्षों के दौरान राज्य के 37 लाख 49 हजार 219 किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर उपज बेचने का सीधा लाभ मिला है। यह आंकड़ा पिछली समाजवादी पार्टी सरकार के पांच साल के कार्यकाल के मुकाबले लगभग ढाई गुना ज्यादा है। पिछली सरकार के पूरे कार्यकाल में केवल 14 लाख 87 हजार 519 किसान ही सरकारी खरीद का हिस्सा बन सके थे। इस तरह मौजूदा व्यवस्था के तहत करीब 22.61 लाख अतिरिक्त किसानों तक सरकारी तंत्र की पहुंच सुनिश्चित हुई है, जो पिछली व्यवस्था की तुलना में 152 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्शाती है।

राज्य में कृषि पैदावार को सही दाम दिलाने के लिए खरीद केंद्रों के नेटवर्क और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि कम समय में कहीं ज्यादा अन्नदाताओं को संस्थागत बिक्री मंच से जोड़ा गया। पहले जहां किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने की मजबूरी रहती थी, वहीं सरकारी क्रय केंद्रों के विस्तार ने बिचौलियों की भूमिका को सीमित कर दिया है। खाद्य एवं रसद विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में 10 लाख 95 हजार 197 किसानों से धान खरीदा गया था। इसके बाद वर्ष 2023-24 में 8 लाख 1 हजार 730 और वर्ष 2024-25 में 7 लाख 98 हजार 731 किसानों ने अपनी उपज बेची। वहीं वर्ष 2025-26 के दौरान यह संख्या बढ़कर 10 लाख 53 हजार 561 तक पहुंच गई।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, पूरी खरीद प्रक्रिया में तकनीक के उपयोग से पारदर्शिता बढ़ी है। किसानों का ऑनलाइन पंजीकरण, पारदर्शी सत्यापन और भुगतान का सीधा उनके बैंक खातों में ट्रांसफर होना इस बदलाव की मुख्य वजह बना है। सरकारी तंत्र का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि राज्य के हर हिस्से में छोटे और सीमांत किसानों को भी उनकी फसल का वाजिब दाम समय पर मिले। संस्थागत खरीद व्यवस्था का यह दायरा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को भी संबल प्रदान कर रहा है।

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