यूपी में स्कूल शिक्षा को परिणामोन्मुख बनाने की पहल: तीन माह के केपीआई से तय होंगे लक्ष्य और जवाबदेही
उत्तर प्रदेश में स्कूली शिक्षा को परिणामोन्मुख बनाने के लिए तीन महीने का केपीआई तय किया गया है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने मासिक समीक्षा और पोर्टल रिपोर्टिंग के निर्देश दिए।
उत्तर प्रदेश में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को अधिक परिणामोन्मुख, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में व्यापक कदम उठाए गए हैं। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार नवंबर, दिसंबर और जनवरी के लिए प्रमुख कार्य प्रदर्शन संकेतकों (केपीआई) के आधार पर समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इस व्यवस्था के अंतर्गत जिला एवं विकासखंड स्तर पर होने वाली शैक्षिक व प्रशासनिक गतिविधियों की निरंतर निगरानी की जाएगी और प्रगति का विवरण अनिवार्य रूप से विभागीय पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा।
शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से समीक्षा बैठकों और डाटा आधारित रिपोर्टिंग की त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत जिला स्तर पर गठित कार्यबल की नियमित समीक्षा, बेसिक शिक्षा अधिकारियों द्वारा खंड शिक्षा अधिकारियों के साथ साप्ताहिक बैठकें और अकादमिक संदर्भ समूहों के साथ विचार-विमर्श सुनिश्चित किया जाएगा। इन सभी बैठकों के कार्यवृत्त पोर्टल पर अपलोड होंगे, जिससे समग्र शिक्षा अभियान और पीएम पोषण योजना के क्रियान्वयन तथा वित्तीय व्यय में पूरी पारदर्शिता बनी रहे।
कक्षा-कक्ष में शिक्षण प्रक्रिया को रोचक बनाने के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण और डिजिटल शिक्षण सामग्री के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। विकासखंड स्तर पर शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण विधियों, प्रोजेक्ट व गतिविधि आधारित शिक्षण के प्रभावी उपयोग के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। दीक्षा मंच पर उपलब्ध सामग्री और पाठ्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों की दक्षता बढ़ाने के साथ ही कक्षा एक और दो के विद्यार्थियों के निपुण आकलन की व्यवस्था की गई है, जिसे निर्धारित तिथियों के भीतर पूर्ण कर प्रगति पत्रकों को अद्यतन किया जाएगा।
अवसंरचना के क्षेत्र में प्रदेश के सभी जनपदों में निर्माणाधीन मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालयों की प्रगति और निर्माण की गुणवत्ता पर कड़ी नजर रखी जाएगी। इसके साथ ही कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के निर्माण कार्यों को गति देने, छात्राओं की नियमित उपस्थिति और नामांकन वृद्धि पर ध्यान केंद्रित रहेगा। निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत प्रवेशित बच्चों का शत-प्रतिशत सत्यापन, आंगनबाड़ी केंद्रों के समन्वय से बाल वाटिका में नामांकन तथा विद्यालय से बाहर रहे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम भी संचालित की जाएगी।
समेकित शिक्षा के तहत दिव्यांग बच्चों की पहचान, उन्हें आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने और विशिष्ट पहचान पत्र (अपार आईडी) सहित आईसीटी व डिजिटल लाइब्रेरी से जुड़े आंकड़ों को पोर्टल पर नियमित रूप से अद्यतन किया जाएगा। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के अनुसार, निर्धारित किए गए प्रदर्शन संकेतकों से योजनाओं की समयबद्ध पूर्ति सुनिश्चित होगी और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में गुणात्मक सुधार आएगा।
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