यूपीआईटीएस में दिखेगी यूपी की स्मार्ट सिंचाई तकनीक, एआई और स्काडा से सुधरा जल प्रबंधन
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में सिंचाई विभाग का आधुनिक मॉडल दिखेगा। स्काडा, एआई तकनीक, बाढ़ नियंत्रण और 19.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई विस्तार की जानकारी।
ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित हो रहे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) के चौथे संस्करण में प्रदेश सरकार की अत्याधुनिक सिंचाई व्यवस्था और टिकाऊ जल प्रबंधन मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया जाएगा। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की ओर से हॉल नंबर-6 में एक विशेष तकनीकी पवेलियन स्थापित किया गया है। इस पवेलियन में तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरिंग शोधार्थियों, प्राध्यापकों और आम नागरिकों को जल संसाधन क्षेत्र में हुए नवाचारों, नदी प्रबंधन और बीते एक दशक की महत्वपूर्ण उपलब्धियों से परिचित कराया जाएगा।
सिंचाई क्षमता और बुनियादी ढांचे का विस्तार
19.48 लाख हेक्टेयर में विस्तार: पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान 17.29 लाख हेक्टेयर नया सिंचित क्षेत्र तैयार किया गया और 2.19 लाख हेक्टेयर पुराने क्षेत्र को पुनर्स्थापित किया गया।
44.81 लाख किसान परिवारों को लाभ: बाणसागर, अर्जुन सहायक, पहाड़ी बांध, लहचुरा बांध और सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना से बड़े पैमाने पर खेतों तक पानी पहुंचा।
अंतिम छोर तक जलापूर्ति: नहरों की गाद (सिल्ट) सफाई 27,551 किमी से बढ़ाकर 55,320 किमी की गई, जिससे टेल तक पानी की उपलब्धता और कुल सिंचित क्षेत्र 106.82 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा।
प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग ने जानकारी दी कि पवेलियन में आगंतुकों को जीवंत इंजीनियरिंग मॉडल के जरिए प्रदेश की विशाल नहर प्रणालियों, लिफ्ट कैनाल, बांधों और बैराजों की कार्यप्रणाली को ऑडियो-विजुअल माध्यम से समझने का अवसर मिलेगा। महुआगांव-चिल्ली स्प्रिंकलर परियोजना, यूपी वाटर रिस्ट्रक्चरिंग प्रोजेक्ट और जरगो नहर प्रणाली के जीर्णोद्धार जैसे बड़े कार्यों ने बुंदेलखंड से लेकर पूर्वांचल तक जल संकट को समाप्त करने में बड़ी भूमिका निभाई है।
स्मार्ट तकनीक से निगरानी और बाढ़ नियंत्रण
स्काडा और एआई का समावेश: मुख्य अभियंता यांत्रिक उपेंद्र सिंह के अनुसार 15 बड़े बांधों व बैराजों पर स्काडा प्रणाली स्थापित कर कंट्रोल रूम से फाटकों का डिजिटल संचालन और रियल-टाइम डेटा ट्रैकिंग सुनिश्चित की गई है।
बाढ़ नियंत्रण में देश में पहला स्थान: गंगा, यमुना, रामगंगा, मंदाकिनी, केन और बेतवा सहित 11 प्रमुख नदियों पर फ्लड प्लेन जोनिंग का काम पूरा कर उत्तर प्रदेश देश में अव्वल रहा।
नदी प्रवाह प्रबंधन: तटबंधों की मजबूती के लिए कंक्रीट मैट्रेस और टेट्रापॉड तकनीक का उपयोग हुआ, जबकि गंगा, घाघरा और शारदा में 58 स्थानों पर ड्रेजिंग कर जल प्रवाह को सुव्यवस्थित किया गया।
पानी की प्रत्येक बूंद के अधिकतम उपयोग (पर ड्रॉप मोर क्रॉप) को बढ़ावा देने के लिए कम जल उपलब्धता वाले क्षेत्रों में दबाव युक्त और स्प्रिंकलर सिंचाई को प्राथमिकता दी गई है। महोबा के कुलपहाड़, हमीरपुर और ललितपुर के शहजाद बांध के साथ-साथ सिद्धार्थनगर, महराजगंज व गोरखपुर में स्थापित सात दबाव प्रणालियों से हजारों किसानों को सीधी मदद मिल रही है। इसके साथ ही प्रदेश की सौर ऊर्जा नीति के अनुरूप नहरों के ऊपर सोलर पैनल लगाने और नलकूपों व लिफ्ट पंपों को सौर ऊर्जा से संचालित करने की आधुनिक कार्ययोजना को भी इस वैश्विक मंच पर प्रमुखता से पेश किया जा रहा है।
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