रक्षाबंधन के बाद राखी का क्या करें, जानें कलाई से रक्षा सूत्र उतारने और विसर्जन के सही नियम
रक्षाबंधन के बाद राखी को इधर-उधर फेंकना अशुभ माना जाता है। जानिए कलाई से रक्षा सूत्र कब खोलना चाहिए और खंडित होने पर विसर्जन के सही धार्मिक नियम।
भाई-बहन के अटूट विश्वास और स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व सावन पूर्णिमा पर श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी दीर्घायु और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। वहीं, त्योहार संपन्न होने के बाद अक्सर लोग राखी को कलाई से खोलकर इधर-उधर रख या फेंक देते हैं, जिसे धार्मिक और शास्त्रीय दृष्टि से अनुचित माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रक्षा सूत्र में सकारात्मक ऊर्जा और देवी-देवताओं का आशीर्वाद समाहित रहता है। इसे लापरवाही से फेंकना या पैरों के नीचे आने देना नकारात्मक प्रभाव ला सकता है। शास्त्रों के अनुसार रक्षा सूत्र को कम से कम सावन पूर्णिमा से लेकर भाद्रपद पूर्णिमा तक यानी पूरे एक महीने तक कलाई पर धारण करना चाहिए। इसके अलावा पारंपरिक रूप से विजयादशमी के दिन राखी को खोलना सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
यदि किसी कारणवश लंबे समय तक रक्षा सूत्र पहनना संभव न हो, तो इसे आदरपूर्वक खोलकर घर के पूजा स्थल पर सुरक्षित रख देना चाहिए या फिर किसी पवित्र बहते जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।
यदि राखी कलाई पर बंधे रहने के दौरान खंडित हो जाए या धागा टूट जाए, तो उसे एक रुपये के सिक्के के साथ लाल कपड़े में लपेटकर रख लें और आगामी पूर्णिमा के अवसर पर बहते जल में विसर्जित करें। रक्षा सूत्र का विधिवत सम्मान बनाए रखना ही पर्व के वास्तविक महत्व को सार्थक करता है।
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