जयपुर के रिहायशी इलाके के भीतर अवैध पटाखा फैक्ट्री में भयंकर विस्फोट, भीषण आग की चपेट में आने से 8 लोगों की दर्दनाक मौत
विस्फोट की शुरुआत होते ही फैक्ट्री के भीतर काम कर रहे लोगों के बीच जान बचाने के लिए अफरा-तफरी मच गई। कुछ मजदूर जो मुख्य दरवाजे और संकरे रास्तों के करीब थे, वे झुलसी हुई हालत में किसी तरह बाहर निकलने में कामयाब रहे, लेकिन अधिकांश लोग अंदर ही फंस कर रह गए क्योंकि
- बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के घनी आबादी के बीच चल रहा था बारूद का धंधा, दमकल की गाड़ियों को पहुंचने में लगा लंबा समय
- मासूम जिंदगियों की मौत के बाद जागे प्रशासनिक अधिकारी, मकान मालिक और अवैध संचालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू
राजस्थान की राजधानी जयपुर के खो-नागोरियन थाना इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां घनी आबादी के बीच चल रही एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट हो गया। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है क्योंकि एक छोटे से रिहायशी मकान के भीतर अवैध रूप से संचालित हो रहे मौत के इस खेल ने कुल 8 लोगों की जिंदगी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में कोहराम मचा हुआ है और स्थानीय लोगों में प्रशासनिक लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। घनी बस्ती के बीचों-बीच स्थित महज 60 से 100 गज के एक साधारण से दिखने वाले मकान में इतना बड़ा बारूद का जखीरा जमा करके रखा गया था, जिसकी भनक स्थानीय पुलिस और संबंधित विभागों को समय रहते नहीं लग पाई।
यह पूरी घटना सामान्य दिनों की तरह शुरू हुई थी, लेकिन देखते ही देखते चीख-पुकार और तबाही में बदल गई। सुबह के समय जब फैक्ट्री के भीतर मजदूर और कुछ अन्य लोग काम में व्यस्त थे, तभी अचानक वहां रखे बारूद के ढेर में एक छोटी सी चिंगारी उठी। इस चिंगारी ने कुछ ही पलों में विकराल रूप धारण कर लिया और वहां भारी मात्रा में जमा करके रखे गए पटाखों और कच्चे बारूद ने आग पकड़ ली। इसके बाद जो मंजर सामने आया, वह बेहद खौफनाक था; एक के बाद एक लगातार कई जोरदार सीरियल धमाके हुए, जिससे न केवल वह पूरा मकान दहल उठा, बल्कि उसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। धमाके इतने शक्तिशाली थे कि आसपास के मकानों की खिड़कियों के कांच टूट गए और लोगों को लगा कि जैसे कोई बड़ा भूकंप आ गया हो।
बारूद के ढेर पर बसी आबादी
जयपुर का खो-नागोरियन इलाका एक बेहद संकरा और घनी आबादी वाला क्षेत्र माना जाता है। ऐसे संवेदनशील रिहायशी इलाके में बिना किसी फायर एनओसी, सुरक्षा मानकों और वैध लाइसेंस के धड़ल्ले से पटाखा बनाने और भारी मात्रा में बारूद का भंडारण करने का काम किया जा रहा था। इस लापरवाही ने पूरे मोहल्ले को सीधे तौर पर मौत के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया था।
विस्फोट की शुरुआत होते ही फैक्ट्री के भीतर काम कर रहे लोगों के बीच जान बचाने के लिए अफरा-तफरी मच गई। कुछ मजदूर जो मुख्य दरवाजे और संकरे रास्तों के करीब थे, वे झुलसी हुई हालत में किसी तरह बाहर निकलने में कामयाब रहे, लेकिन अधिकांश लोग अंदर ही फंस कर रह गए क्योंकि आग ने पूरे निकास मार्ग को अपनी चपेट में ले लिया था। स्थानीय नागरिकों ने अपनी तरफ से बचाव कार्य शुरू करने की कोशिश की, लेकिन आग की लपटें इतनी तेज थीं और भीतर से लगातार हो रहे धमाकों के कारण कोई भी मकान के करीब जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। संकरी गलियों और मुख्य शहर से दूरी होने की वजह से दमकल विभाग की गाड़ियों को भी घटना स्थल तक पहुंचने में लगभग 40 मिनट से अधिक का समय लग गया, जिसके कारण आग और अधिक फैल गई।
इस भीषण अग्निकांड की चपेट में आने से झुलसे हुए लोगों को आनन-फानन में स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मदद से नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया। झुलसे हुए व्यक्तियों में से एक की हालत इतनी गंभीर थी कि उसने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया था, जबकि बाकी बचे लोगों को गंभीर हालत में जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल और जेएनयू अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की विशेष टीम ने इन सभी को बचाने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन बारूद के धुएं और गहरे जख्मों के कारण घायलों की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। इलाज के दौरान एक-एक करके सभी अन्य घायलों ने भी दम तोड़ दिया, जिसके बाद इस हादसे में मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 8 हो गई है।
रिश्तों पर भारी पड़ी लापरवाही
इस हादसे में अपनी जान गंवाने वाले लोगों में दो सगे भाई भी शामिल हैं, जिनकी पहचान बिलाल और अजीम के रूप में हुई है। छोटा भाई अजीम इस फैक्ट्री में मजदूरी करता था, जबकि बड़ा भाई बिलाल सिर्फ उससे मुलाकात करने के लिए उस दिन वहां पहुंचा था। दोनों भाई आपस में बैठकर बातचीत ही कर रहे थे कि तभी यह हादसा हो गया और दोनों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
प्रशासनिक जांच और पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में इस पूरी अवैध फैक्ट्री के मालिकाना हक और इसके संचालन को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। जिस रिहायशी मकान के भीतर यह बारूद का अवैध धंधा चल रहा था, वह मकान मोहम्मद याकूब नाम के स्थानीय व्यक्ति का है, जिसकी पुष्टि बिजली के बिल और राजस्व दस्तावेजों के जरिए की गई है। याकूब ने इस मकान को दिल्ली के रहने वाले फिरोज नाम के व्यक्ति को किराए पर दे रखा था। फिरोज अपने एक अन्य साथी वसीम के साथ मिलकर बिना किसी कानूनी अनुमति के लंबे समय से यहां पटाखों के निर्माण और उनके बड़े पैमाने पर भंडारण का काम कर रहा था। इस खुलासे के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ विभिन्न सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उनकी तलाश तेज कर दी है।
इस बड़े हादसे की जानकारी मिलते ही जयपुर के जिलाधिकारी डॉक्टर संदेश नायक, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट युगांतर शर्मा और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भारी जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों ने घटना स्थल का मुआयना करने के बाद उस पूरे परिसर को सील करने की कार्रवाई की है और इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रशासन अब इस बात का पता लगाने में जुटा है कि इतने लंबे समय से घनी बस्ती के बीच यह अवैध धंधा किसकी शह पर चल रहा था। इसके साथ ही क्षेत्र में चल रहे अन्य संदिग्ध गोदामों और फैक्ट्रियों की भी जांच शुरू कर दी गई है ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
जवाबदेही से बचता सिस्टम
हर बड़े हादसे के बाद जांच कमेटियां बनाई जाती हैं और नियमों का हवाला दिया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि जब तक कोई बड़ी त्रासदी नहीं होती, तब तक जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे रहते हैं। अगर समय रहते स्थानीय प्रशासन और पुलिस मुस्तैदी दिखाती, तो आठ परिवारों के चिराग इस तरह हमेशा के लिए नहीं बुझते।
इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर सुरक्षा नियमों की अनदेखी और रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में मरने वाले वहीद जैसे लोग अपने पीछे छोटे-छोटे बच्चों और पूरे परिवार को बेसहारा छोड़ गए हैं, जिनके सामने अब आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
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