Ahmedabad News: राजस्थान में भाई के दुश्मन को सड़क हादसे का रूप देकर मारा था, 24 साल बाद अहमदाबाद से पकड़ा गया हत्यारोपी
राजस्थान में भाई के दुश्मन की हत्या को सड़क हादसे का रूप देकर फरार हुए आरोपी को पुलिस ने 24 साल बाद अहमदाबाद से गिरफ्तार किया है। आरोपी पहचान बदलकर रह रहा था।
- 24 साल बाद कानून के शिकंजे में हत्या का भगोड़ा: राजस्थान पुलिस और क्राइम ब्रांच ने अहमदाबाद से दबोचा आरोपी
- Rajasthan Murder Case: एक्सीडेंट की आड़ में रची थी खूनी साजिश, पहचान छिपाकर रह रहे आरोपी को पुलिस ने दबोचा
- राजस्थान का 24 साल पुराना कत्ल का मामला सुलझा: भाई की रंजिश में की थी हत्या, अहमदाबाद में कट रही थी फरारी
अहमदाबाद/जयपुर। कानून के हाथ लंबे होते हैं और गुनाह चाहे कितना भी पुराना हो, मुजरिम कभी न कभी अपनी ही गलतियों के चलते पकड़ा ही जाता है। इस कहावत को सच साबित करते हुए राजस्थान पुलिस और गुजरात पुलिस के संयुक्त समन्वय से एक चौंकाने वाली सफलता हासिल हुई है। राजस्थान में लगभग 24 वर्ष पूर्व अपने भाई के पुराने विरोधी की योजनाबद्ध तरीके से हत्या कर उसे सामान्य सड़क दुर्घटना का रूप देने वाले एक शातिर भगोड़े को अहमदाबाद से गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी ढाई दशक से अपनी असली पहचान छिपाकर और ठिकाने बदलकर पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने साल 2000 के आसपास राजस्थान में इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया था। प्रारंभिक तौर पर यह मामला एक अज्ञात वाहन द्वारा कुचलकर मारे जाने की सड़क दुर्घटना जैसा प्रतीत हुआ था, लेकिन परिजनों की आशंका और पुलिस की गहन तफ्तीश में यह सामने आया कि यह कोई हादसा नहीं बल्कि रंजिश के तहत की गई सोची-समझी हत्या थी। वारदात के तुरंत बाद से ही आरोपी भूमिगत हो गया था और पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई थी।
- रंजिश का बदला लेने के लिए रची थी खूनी साजिश
मामले की पृष्ठभूमि में पारिवारिक और व्यक्तिगत रंजिश जुड़ी हुई थी। जांच एजेंसियों द्वारा जुटाए गए विवरण के मुताबिक, मृतक और आरोपी के भाई के बीच लंबे समय से किसी विवाद को लेकर गहरी दुश्मनी चल रही थी। दोनों पक्षों में पूर्व में भी कई बार कहासुनी और मारपीट की घटनाएं घट चुकी थीं। इसी रंजिश का बदला चुकाने की नीयत से आरोपी ने अपने भाई के विरोधी को रास्ते से हटाने का षड्यंत्र रचा।
आरोपी जानता था कि सीधे तौर पर गोली मारने या धारदार हथियार से हमला करने पर वह तुरंत शक के दायरे में आ जाएगा और पुलिस उसे नामजद कर लेगी। इसलिए उसने वारदात को दुर्घटना की शक्ल देने की योजना बनाई। योजना के तहत उसने पीड़ित की दैनिक गतिविधियों, आने-जाने के रास्तों और समय की रेकी की। इसके बाद एक सुनसान सड़क पर वाहन से पीड़ित को जोरदार टक्कर मार दी और उसे कुचलते हुए मौके से भाग निकला। गंभीर चोटें लगने के कारण पीड़ित ने दम तोड़ दिया।
- हादसे की तह तक पहुंची पुलिस, हत्या की पुष्टि के बाद फरार हुआ आरोपी
शुरुआती दौर में स्थानीय थाने में सड़क दुर्घटना और लापरवाही से वाहन चलाने की धाराओं में केस दर्ज हुआ था। हालांकि, घटनास्थल के सूक्ष्म मुआयने, वाहन के टायरों के निशान और पीड़ित के परिजनों द्वारा पुरानी दुश्मनी का अंदेशा जताए जाने के बाद पुलिस ने नए सिरे से जांच शुरू की। फॉरेंसिक साक्ष्यों और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर पुलिस को यह पुख्ता सबूत मिल गए कि टक्कर जानबूझकर मारी गई थी।
जब तक पुलिस मामले में हत्या की धाराएं जोड़कर आरोपी तक पहुंचती, वह अपने गृह क्षेत्र से फरार हो चुका था। पुलिस ने उसके कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी, रिश्तेदारों से पूछताछ की और कुर्की की प्रक्रिया भी अमल में लाई, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। समय के साथ मामला फाइलों में दब गया, लेकिन राजस्थान पुलिस के रिकॉर्ड में वह एक वांछित और इनामी भगोड़े के तौर पर दर्ज रहा।
- 24 साल तक बदली पहचान, अहमदाबाद में काट रहा था फरारी
राजस्थान से भागने के बाद आरोपी ने कई राज्यों में शरण ली। उसने अपनी वेशभूषा, बोलचाल और रहने का अंदाज पूरी तरह बदल लिया ताकि कोई उस पर शक न कर सके। अंततः उसने गुजरात के अहमदाबाद शहर को अपना सुरक्षित ठिकाना बनाया। वहां वह स्थानीय पहचान बनाकर छोटे-मोटे कामकाज और मजदूरी में लग गया। उसने अपने मूल पैतृक गांव और पुराने परिचितों से सभी तरह के संपर्क तोड़ लिए थे, ताकि मोबाइल सर्विलांस या कॉल डिटेल के जरिए उस तक न पहुंचा जा सके।
24 साल की लंबी फरारी के दौरान उसने यह मान लिया था कि अब कानून की फाइलें बंद हो चुकी हैं और वह हमेशा के लिए बच निकला है। लेकिन हाल के दिनों में पुराने लंबित मामलों (कोल्ड केसेज) और लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों की धरपकड़ के लिए चलाए गए विशेष अभियान के तहत इस केस की फाइल दोबारा खोली गई।
- ऐसे बिछाया गया मुखबिरों का जाल और हुई गिरफ्तारी
राजस्थान पुलिस की विशेष टीम ने आधुनिक तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल डेटाबेस और स्थानीय स्तर पर विकसित किए गए खुफिया सूत्रों (ह्यूमन इंटेलिजेंस) की मदद से आरोपी की गतिविधियों का पता लगाया। तकनीकी इनपुट से संकेत मिले कि वांछित व्यक्ति अहमदाबाद के एक औद्योगिक/रिहायशी इलाके में रह रहा है।
सूचना की पुष्टि होने के बाद राजस्थान पुलिस ने अहमदाबाद पुलिस से संपर्क साधा। दोनों राज्यों की टीमों ने संयुक्त रूप से इलाके में जाल बिछाया और संदिग्ध की सटीक पहचान सुनिश्चित की। जैसे ही पुख्ता पुष्टि हुई, पुलिस बल ने घेराबंदी कर उसे दबोच लिया। जब पुलिस ने उससे पूछताछ की, तो पहले उसने खुद को कोई अन्य व्यक्ति बताकर गुमराह करने की भरपूर कोशिश की। हालांकि, जब अधिकारियों ने उसके असली नाम, पिता के नाम और 24 साल पुरानी वारदात के ठोस तथ्य सामने रखे, तो वह टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
पुलिस ने आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर राजस्थान ले जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को संबंधित अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि इस साजिश में शामिल रहे अन्य संभावित सहयोगियों और फरारी के दौरान उसे शरण देने वालों के संबंध में भी विस्तृत पूछताछ की जा सके।
What's Your Reaction?