आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने रिहा किया, बाहर आकर की अभिजीत दीपके और सभी प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग
दिल्ली में 'लहरा दो तिरंगा' मार्च के दौरान हिरासत में ली गईं आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को शनिवार सुबह रिहा कर दिया गया। रिहा होते ही उन्होंने अन्य प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग उठाई।
- 'लहरा दो तिरंगा' मार्च के दौरान हिरासत में ली गईं आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा शनिवार सुबह रिहा
- हिरासत से रिहा होते ही बोलीं नेहा बोरा: लोकतंत्र और संविधान के लिए लड़ना अपराध नहीं, बाकी प्रदर्शनकारी भी छोड़े जाएं
- दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद नेहा बोरा हुईं रिहा, सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उठाया हिरासत पर सवाल
राजधानी दिल्ली में 'लहरा दो तिरंगा' मार्च के दौरान हिरासत में ली गईं 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन' (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने हिरासत से रिहा कर दिया। नेहा बोरा को शुक्रवार शाम नई दिल्ली क्षेत्र में आयोजित मार्च और प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ एहतियातन हिरासत में लिया था।
हिरासत से बाहर आने के बाद नेहा बोरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सार्वजनिक पोस्ट साझा कर अपनी रिहाई की पुष्टि की। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस हिरासत में रखे गए अन्य कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग उठाई।
- अभिजीत दीपके और अन्य कार्यकर्ताओं को छोड़ने की उठाई मांग
सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में आइसा अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें रिहा कर दिया गया है, लेकिन वे चाहती हैं कि अभिजीत दीपके समेत हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस बिना शर्त रिहा करे। उन्होंने कानूनी और लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लेख करते हुए लिखा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए आवाज उठाने को अपराध की श्रेणी में नहीं डाला जा सकता।
शुक्रवार को नई दिल्ली के कनॉट प्लेस और सेंट्रल पार्क क्षेत्र में तिरंगा मार्च को लेकर सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त कर दी गई थी। स्थानीय प्रशासन द्वारा सेंट्रल पार्क को बंद किए जाने और निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद कई संगठनों और कार्यकर्ताओं ने मार्च निकालने का प्रयास किया था, जिसके बाद पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर कई लोगों को हिरासत में ले लिया था।
- छात्र और नागरिक संगठनों में हलचल
नेहा बोरा की रिहाई के बाद छात्र राजनीति और नागरिक अधिकार संगठनों में अन्य कार्यकर्ताओं की स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। छात्र संगठनों का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा मार्च निकालना और नागरिक मुद्दों पर अपनी बात रखना मौलिक अधिकारों का हिस्सा है, जिसे प्रशासनिक पाबंदियों के जरिए सीमित नहीं किया जाना चाहिए। फिलहाल पुलिस ने इलाके में सुरक्षा निगरानी बरकरार रखी है, जबकि अन्य हिरासत में लिए गए व्यक्तियों की विधिक स्थिति और औपचारिक प्रक्रियाओं पर नजर रखी जा रही है।
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