Akhilesh Yadav On Swami Prasad Maurya - हमारे गठबंधन में नहीं हैं स्वामी प्रसाद, सपा अध्यक्ष ने मीडिया से कहा- 'उन्हें इग्नोर करें'
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य के इंडिया गठबंधन में शामिल होने के दावों को खारिज करते हुए कहा कि वे हमारे गठबंधन और सीटों की गिनती में नहीं हैं।
उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच राजनीतिक तल्खी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात के बाद अपनी पार्टी 'अपनी जनता पार्टी' के विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन में शामिल होने का दावा किया गया था। इस मुद्दे पर जब पत्रकारों ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव से सवाल किया, तो उनके तेवर बेहद सख्त नजर आए और उन्होंने स्वामी प्रसाद के दावों को सिरे से खारिज कर दिया।
'वे हमारे गठबंधन में नहीं हैं, उन्हें इग्नोर करें'
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दो-टूक शब्दों में कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य किसी भी सूरत में उनके गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी आगामी चुनावों में जिन सीटों पर चुनाव लड़ेगी या गठबंधन सहयोगियों के बीच जो सीटें तय होंगी, उस गिनती में स्वामी प्रसाद मौर्य अथवा उनकी पार्टी का कोई स्थान नहीं है। अखिलेश यादव ने तीखे लहजे में मीडियाकर्मियों से यह भी कह दिया कि वे स्वामी प्रसाद मौर्य को गैर-जरूरी तवज्जो देने के बजाय उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज (इग्नोर) करें।
पुरानी तल्खी और इस्तीफे की बात
दरअसल, अखिलेश यादव और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच का यह राजनीतिक तनाव काफी पुराना है। वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले स्वामी प्रसाद मौर्य भारतीय जनता पार्टी छोड़कर सपा में शामिल हुए थे। हालांकि वे फाजिलनगर से विधानसभा चुनाव हार गए थे, इसके बावजूद अखिलेश यादव ने उन्हें विधान परिषद (एमएलसी) भेजा और पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया था।
इसके बाद रामचरितमानस और धार्मिक ग्रंथों पर स्वामी प्रसाद मौर्य के बयानों को लेकर पार्टी के भीतर अंतर्कलह शुरू हो गई। सपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके रुख पर आपत्ति जताई थी। वैचारिक मतभेदों और राजनीतिक असहजता के चलते वर्ष 2024 की शुरुआत में स्वामी प्रसाद मौर्य ने सपा की प्राथमिक सदस्यता के साथ-साथ एमएलसी पद से भी इस्तीफा दे दिया था और बाद में 'अपनी जनता पार्टी' का गठन किया था।
गठबंधन में दरार या रणनीति?
अक्टूबर माह की शुरुआत में स्वामी प्रसाद मौर्य ने दिल्ली में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से मुलाकात कर विपक्षी गठबंधन में अपनी जगह पक्की करने की कोशिश की थी। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस उन्हें गठबंधन के जरिए उत्तर प्रदेश में समायोजित कर सकती है। हालांकि, उत्तर प्रदेश में 'इंडिया' गठबंधन के मुख्य धुरी माने जाने वाले अखिलेश यादव के इस सख्त रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में विपक्षी गठबंधन की कमान पूरी तरह सपा के नियंत्रण में है और स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए गठबंधन के दरवाजे फिलहाल पूरी तरह बंद हैं।
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