Anup Jalota On Rap Songs: रैप गानों पर भड़के अनूप जलोटा, बोले- 'गालियां दोगे तो लोग गंदा ही कहेंगे'

मशहूर भजन गायक अनूप जलोटा ने बादशाह और हनी सिंह जैसे रैपर्स के गानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने संगीत में अश्लीलता और अपशब्दों के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताई।

Aug 17, 2026 - 15:25
4 Views
Anup Jalota On Rap Songs: रैप गानों पर भड़के अनूप जलोटा, बोले- 'गालियां दोगे तो लोग गंदा ही कहेंगे'
  • अनूप जलोटा का बादशाह और हनी सिंह के रैप पर तीखा हमला, संगीत में फूहड़ता पर उठाए गंभीर सवाल
  • 'इन्होंने सब गंदा कर दिया...' रैप गानों में अश्लीलता और गालियों पर क्यों भड़क गए भजन सम्राट अनूप जलोटा?
  • भजन गायक अनूप जलोटा का रैप म्यूजिक पर बड़ा बयान, बोले- अश्लीलता और गालियों से खराब हो रहा संगीत

मशहूर भजन सम्राट अनूप जलोटा ने हाल ही में भारतीय रैप संगीत की मौजूदा स्थिति पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अपनी बेबाक राय रखी है। अनूप जलोटा ने एक साक्षात्कार के दौरान बादशाह और यो यो हनी सिंह जैसे लोकप्रिय रैप कलाकारों के गानों में इस्तेमाल होने वाली भाषा और विषयवस्तु पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि संगीत आत्मा को सुकून देने वाला माध्यम है, लेकिन आधुनिक दौर के कई गानों में गालियों और दोहरे अर्थ वाले शब्दों के जरिए फूहड़ता परोसी जा रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर गानों में मर्यादा की सीमाएं लांघी जाएंगी और अपशब्दों का प्रयोग होगा, तो समाज इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा। वरिष्ठ गायक के इस बयान के बाद संगीत जगत में आधुनिक रैप बनाम पारंपरिक संगीत की बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

भारतीय शास्त्रीय और भक्ति संगीत के जाने-माने हस्ताक्षर अनूप जलोटा ने मुख्यधारा के संगीत में बढ़ते रैप कल्चर और उसमें शामिल विवादास्पद शब्दों पर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने सीधे तौर पर नाम लेते हुए कहा कि आज के कई रैप ट्रैक युवाओं को गलत संदेश दे रहे हैं। उनका मानना है कि संगीत में मौलिकता और सादगी होनी चाहिए, लेकिन आधुनिक ट्रेंड की आड़ में केवल सनसनी फैलाने के लिए गालियों और अमर्यादित भाषा का सहारा लिया जा रहा है, जिससे संगीत की मूल गरिमा को गहरा आघात पहुंचा है।

एक मीडिया संवाद के दौरान संगीत के बदलते स्वरूप और पारंपरिक धुनों के भविष्य पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान अनूप जलोटा से जब आधुनिक रैप शैली और युवाओं में इसके बढ़ते प्रभाव को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि पुराने दौर में गीतों के बोल गहरे अर्थ लिए होते थे और उन्हें पूरे परिवार के साथ सुना जा सकता था।

अनूप जलोटा ने आगे कहा कि आज के कई चर्चित रैपर्स ने अपनी रचनाओं के स्तर को काफी गिरा दिया है। उनके मुताबिक, अगर आप अपने गीतों में अपशब्दों का सहारा लेंगे, तो लोग उसे 'गंदा' ही कहेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संगीत साधना और तपस्या का विषय है, इसे फूहड़ता और तात्कालिक लोकप्रियता का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका स्पष्ट मानना था कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर भाषा की मर्यादा तोड़ना सही नहीं ठहराया जा सकता।

अनूप जलोटा के इस बयान के बाद संगीत प्रेमियों और सोशल मीडिया पर विभिन्न वर्गों की ओर से प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। शास्त्रीय और सुगम संगीत से जुड़े कई वरिष्ठ कलाकारों ने अनूप जलोटा के रुख का समर्थन किया है। उनका मानना है कि गीत-संगीत समाज का आईना होता है और रचनाकारों को युवा पीढ़ी के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए।

दूसरी तरफ, स्वतंत्र हिप-हॉप समुदाय और रैप संगीत के समर्थकों का तर्क है कि रैप एक ऐसी कला है जो वास्तविक जीवन के संघर्षों, सामाजिक सच्चाइयों और व्यक्तिगत अनुभवों को सीधे शब्दों में बयां करती है। हालांकि, व्यावसायिक रूप से बड़े स्तर पर काम करने वाले रैप कलाकारों की ओर से अभी तक इस विशेष टिप्पणी पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि दोनों पीढ़ियों के दृष्टिकोण में यह स्वाभाविक अंतर है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर भारतीय संगीत उद्योग में सेंसरशिप, सेल्फ-रेगुलेशन और रचनात्मक स्वतंत्रता पर नई बहस छेड़ दी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और यूट्यूब के दौर में गानों की रीच सीधे हर वर्ग तक पहुंच रही है, जिसमें बच्चे और किशोर भी शामिल हैं। ऐसे में माता-पिता और संस्कृति से जुड़े संगठनों की ओर से भी समय-समय पर ओटीटी और म्यूजिक वीडियोज के कंटेंट पर निगरानी रखने की मांग उठती रही है। अनूप जलोटा जैसे दिग्गज गायक की टिप्पणी ने इस मांग को एक नई मजबूती दी है।

संगीत जगत में परंपरा और आधुनिकता के बीच का यह द्वंद्व आगे भी जारी रहने की संभावना है। जहां एक तरफ स्वतंत्र कलाकार डिजिटल माध्यमों पर अपनी शैली के साथ प्रयोग जारी रखेंगे, वहीं दूसरी तरफ मुख्यधारा के संगीत में भाषा की शुचिता को लेकर उठती आवाजें गीतकारों और निर्माताओं पर संयम बरतने का नैतिक दबाव बनाएंगी। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रैप समुदाय इस आलोचना को रचनात्मक सुधार के रूप में लेता है या फिर इसे केवल दो अलग-अलग पीढ़ियों की संगीत समझ का टकराव माना जाता है।

Also Read- Avika Gor Hospitalized: 'बालिका वधू' फेम अविका गौर डेंगू के चलते अस्पताल में भर्ती, पांच दिनों से 104 डिग्री था बुखार

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow