Assam News: असम पुलिस ने हिरासत में लिए गए आशुतोष रांका समेत अन्य कार्यकर्ताओं को किया रिहा, पूछताछ के बाद मिली राहत
असम पुलिस ने एहतियातन हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका और अन्य कार्यकर्ताओं को विधिक प्रक्रिया और पूछताछ पूरी होने के बाद रिहा कर दिया है।
- गुवाहाटी: कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका रिहा, पुलिस ने प्रक्रिया पूरी कर छोड़ा
- Assam Police Action: आशुतोष रांका और कार्यकर्ताओं की हिरासत का मामला, विधिक प्रक्रिया के बाद पुलिस ने किया मुक्त
- असम: राजनीतिक गतिविधियों के बीच हिरासत में लिए गए कार्यकर्ता छूटे, सह-संयोजक आशुतोष रांका ने दी कानूनी सहयोग की जानकारी
गुवाहाटी: असम में राजनीतिक व संगठनात्मक गतिविधियों के दौरान पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए 'कॉकरोच जनता पार्टी' के सह-संयोजक आशुतोष रांका और उनके साथ मौजूद अन्य कार्यकर्ताओं को पुलिस प्रशासन ने औपचारिक प्रक्रियाओं के बाद रिहा कर दिया है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों द्वारा आवश्यक विधिक सत्यापन और पूछताछ पूरी करने के बाद सभी संबंधित व्यक्तियों को मुक्त किया गया।
जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने और पूर्व अनुमति के बिना सार्वजनिक जमावड़े अथवा विरोध प्रदर्शन की स्थिति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सुरक्षा बलों ने एहतियाती कदम उठाते हुए इन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। रिहाई के उपरांत कार्यकर्ताओं ने राहत की सांस ली है, वहीं स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।
- क्या था पूरा मामला और हिरासत क्यों?
प्राप्त विवरण के अनुसार, आशुतोष रांका अपने कुछ पार्टी सहयोगियों के साथ असम के दौरे पर थे। स्थानीय स्तर पर एक कार्यक्रम अथवा जनसंपर्क अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति और सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर पुलिस के साथ संवादहीनता की स्थिति बनी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधि, पदयात्रा अथवा सभा के लिए स्थानीय पुलिस उपायुक्त या सक्षम मजिस्ट्रेट से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होता है। निर्धारित दिशा-निर्देशों और अनुमति की शर्तों के अभाव में शांति भंग होने की आशंका को देखते हुए पुलिस दल ने मौके पर हस्तक्षेप किया और एहतियातन आशुतोष रांका सहित अन्य कार्यकर्ताओं को स्थानीय थाने ले जाया गया।
असम पुलिस के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक द्वेष अथवा दुर्भावना से प्रेरित नहीं थी, बल्कि कानून के दायरे में सार्वजनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए की गई एक मानक प्रशासनिक प्रक्रिया थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सीआरपीसी/भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत निर्धारित एहतियाती प्रावधानों के तहत कार्यकर्ताओं को रोका गया था। थाने में उनके पहचान पत्रों का सत्यापन किया गया और आवश्यक औपचारिक मुचलके व कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी की गई। पूछताछ के दौरान शांति बनाए रखने और भविष्य में किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम के आयोजन से पहले विधिवत प्रशासनिक अनुमति प्राप्त करने के निर्देश दिए गए, जिसके पश्चात सभी को सम्मानपूर्वक छोड़ दिया गया।
पुलिस हिरासत से बाहर आने के बाद सह-संयोजक आशुतोष रांका और उनके साथियों ने विधिक प्रक्रिया में सहयोग करने की बात कही। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी तरह की अव्यवस्था फैलाना नहीं था, बल्कि वे अपने संगठनात्मक विस्तार और नागरिकों के मुद्दों को लेकर अपनी बात रखने पहुंचे थे। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक और पंजीकृत संगठन को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण संवाद करने का संवैधानिक अधिकार है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे कानून और न्यायालयीन प्रक्रियाओं का पूरा सम्मान करते हैं और आगे से स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करके ही कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करेंगे।
असम पुलिस राज्य के विभिन्न संवेदनशील जिलों में सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर लगातार सतर्कता बरतती है। विशेष रूप से अंतरराज्यीय या नए राजनीतिक समूहों की गतिविधियों पर खुफिया तंत्र और स्थानीय प्रशासन की कड़ी नजर रहती है ताकि किसी भी तरह के अप्रिय घटनाक्रम से बचा जा सके। प्रशासनिक अधिकारियों ने दोहराया है कि कानून सभी के लिए समान है। किसी भी राजनीतिक या सामाजिक संगठन को सार्वजनिक आयोजनों के दौरान तय नियमों और यातायात नियमों का पालन करना अनिवार्य है। वर्तमान में क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह सामान्य है और किसी प्रकार के तनाव की सूचना नहीं है।
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