Maharashtra TET Paper Leak: जूते के इनसोल में छिपाकर बाहर निकाला गया था पर्चा, पुलिस ने दाखिल की 3500 पन्नों की चार्जशीट

महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामले में पुलिस ने 3500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। 18 आरोपियों के नाम शामिल हैं। आगरा की प्रिंटिंग प्रेस से पेपर लीक का खुलासा हुआ है।

By INA News Desk
Sep 19, 2026 - 16:58
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Maharashtra TET Paper Leak: जूते के इनसोल में छिपाकर बाहर निकाला गया था पर्चा, पुलिस ने दाखिल की 3500 पन्नों की चार्जशीट
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  • महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक कांड: आगरा की प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े तार, 18 आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र पेश
  • Maharashtra TET Scam: 3500 पन्नों की चार्जशीट में बड़ा खुलासा, आगरा की प्रेस से इस तरह हुआ था शिक्षक पात्रता परीक्षा का पेपर लीक
  • टीईटी पेपर लीक मामला: पुलिस जांच पूरी, 18 नामजद आरोपियों पर शिकंजा; प्रेस कर्मचारियों की मिलीभगत आई सामने

पुणे/मुंबई। महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों ने बड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए अदालत में विस्तृत आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। पुलिस द्वारा पेश किया गया यह आरोप पत्र लगभग 3,500 पन्नों का है, जिसमें परीक्षा की गोपनीयता भंग करने, साजिश रचने और प्रश्नपत्र को अवैध रूप से बाहर बेचने के पूरे नेटवर्क का सिलसिलेवार ब्योरा दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस मामले में कुल 18 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। आरोप पत्र में किए गए खुलासों के अनुसार, परीक्षा के प्रश्नपत्र को छापने वाली प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों ने अत्यंत शातिर तरीके से सुरक्षा घेरे को चकमा देकर पेपर बाहर निकाला था।

जांच एजेंसी द्वारा अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों के मुताबिक, पेपर लीक की इस साजिश के तार उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित एक निजी प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े पाए गए हैं। परीक्षा के आयोजन से जुड़ी गोपनीय मुद्रण प्रक्रिया को आगरा की 'महिम पत्रण प्राइवेट लिमिटेड' नामक प्रिंटिंग प्रेस को सौंपा गया था। पुलिस की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि अत्यधिक सुरक्षा मानकों और सीसीटीवी निगरानी के बावजूद प्रेस के भीतर काम करने वाले कुछ कर्मचारियों ने सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाई और प्रश्नपत्र को बाहर पहुंचाने में सफलता हासिल की।

जूते के इनसोल में छिपाकर बाहर निकाला गया था प्रश्नपत्र

चार्जशीट में दर्ज तकनीकी और फॉरेंसिक विवरणों के अनुसार, प्रिंटिंग प्रेस के भीतर कर्मचारियों की तलाशी के कड़े नियम लागू थे। इसके बावजूद आरोपियों ने सुरक्षा जांच से बचने के लिए एक सोची-समझी तरकीब अपनाई। मुद्रण इकाई में कार्यरत कर्मचारी ने प्रश्नपत्र की प्रति को मोड़ने के बाद अपने जूते के निचले हिस्से यानी इनसोल के भीतर छिपा लिया। शारीरिक तलाशी के दौरान जूतों के आंतरिक हिस्से की गहन जांच न होने का फायदा उठाकर आरोपी पेपर को सफलतापूर्वक परिसर से बाहर ले आया।

परिसर से बाहर आने के बाद प्रश्नपत्र की डिजिटल प्रतियां तैयार की गईं और उन्हें राज्य भर में सक्रिय बिचौलियों और कोचिंग सिंडिकेट तक पहुंचाया गया। पुलिस ने अपनी जांच में डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल फोन से बरामद चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड को चार्जशीट के साथ नत्थी किया है, जिससे यह साबित होता है कि पेपर लीक केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि एक संगठित आर्थिक अपराध था।

18 आरोपियों की भूमिका तय, कई धाराएं लगाई गईं

पुलिस की 3,500 पन्नों की इस व्यापक चार्जशीट में 18 आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और परीक्षा से जुड़े विशेष अधिनियमों के तहत गंभीर आरोप तय किए गए हैं। नामजद आरोपियों में प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारी, प्रश्नपत्र को आगे पहुंचाने वाले दलाल, और उम्मीदवारों से अवैध रूप से मोटी रकम वसूलने वाले एजेंट शामिल हैं।

चार्जशीट में बताया गया है कि किस प्रकार इस गिरोह ने प्रत्येक उम्मीदवार से परीक्षा पास कराने के नाम पर लाखों रुपये की मांग की थी। गिरोह के सदस्यों ने अभ्यर्थियों से अग्रिम राशि और उनके मूल शैक्षणिक दस्तावेज भी अपने पास गिरवी रख लिए थे, ताकि परिणाम आने के बाद शेष रकम की वसूली सुनिश्चित की जा सके। पुलिस ने कई आरोपियों के बैंक खातों और संपत्तियों का वित्तीय विश्लेषण भी जांच रिपोर्ट का हिस्सा बनाया है।

प्रिंटिंग प्रेस की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल उस प्रशासनिक प्रक्रिया पर उठा है जिसके तहत किसी बाहरी राज्य की निजी प्रिंटिंग प्रेस को राज्य स्तरीय महत्वपूर्ण पात्रता परीक्षा के गोपनीय कार्य का ठेका दिया गया। सामान्यतः प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों की छपाई के लिए सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) निर्धारित होती है, जिसमें मेटल डिटेक्टर, जैमर, चौबीसों घंटे सशस्त्र सुरक्षा पहरा और बिना अनुमति किसी भी वस्तु को भीतर या बाहर ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल होता है।

पुलिस जांच में यह बात रेखांकित की गई है कि आगरा स्थित महिम पत्रण प्राइवेट लिमिटेड में इन सुरक्षा नियमों के पालन में गंभीर चूक हुई। कर्मचारियों की नियमित जांच के स्तर पर ढिलाई बरती गई, जिसके चलते आरोपी जूते के इनसोल जैसी जगह पर कागजात छिपाकर निकलने में कामयाब हो गए। जांच एजेंसियों ने संबंधित अधिकारियों और प्रिंटिंग प्रेस के प्रबंधकों की निगरानी संबंधी जवाबदेही पर भी साक्ष्य संकलित किए हैं।

महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा राज्य में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती के लिए अनिवार्य योग्यता मानी जाती है। इस परीक्षा में हर साल लाखों की संख्या में युवा अपनी वर्षों की मेहनत और तैयारी के बल पर शामिल होते हैं। ऐसे में संगठित गिरोहों द्वारा पैसे के दम पर प्रश्नपत्र लीक किए जाने से न केवल भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि योग्य और ईमानदार उम्मीदवारों के साथ गहरा अन्याय होता है।

न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद अब इस मामले में न्यायिक सुनवाई (ट्रायल) की प्रक्रिया गति पकड़ेगी। पुलिस का कहना है कि 18 आरोपियों के खिलाफ पुख्ता दस्तावेजी, डिजिटल और मौखिक साक्ष्य मौजूद हैं। अदालत में आरोप तय होने के बाद गवाहों के बयान दर्ज कराए जाएंगे, ताकि इस संगठित अपराध में शामिल प्रत्येक दोषी को कानून के अनुसार सख्त सजा दिलाई जा सके।

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