IIT Bombay Student Death: पवई कैंपस में हॉस्टल के कमरे में मृत मिला 19 वर्षीय छात्र, पुलिस ने दर्ज किया एडीआर
आईआईटी बॉम्बे के हॉस्टल में 19 वर्षीय छात्र का शव मिलने से हड़कंप मच गया। पवई पुलिस ने एडीआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
- आईआईटी बॉम्बे के बीटेक छात्र की संदिग्ध मौत: कमरे से नहीं मिला सुसाइड नोट, पुलिस जांच में जुटी; राजनीतिक दलों ने उठाए सवाल
- IIT बॉम्बे में 19 वर्षीय छात्र की मौत से सनसनी, पुलिस ने शुरू की एडीआर जांच; कैंपस सुरक्षा और मानसिक दबाव पर बहस
- Mumbai IIT Bombay News: हॉस्टल के कमरे में मिला सेकंड ईयर के छात्र का शव, पुलिस खंगाल रही मोबाइल और लैपटॉप
मुंबई। देश के शीर्ष तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शुमार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे (आईआईटी बॉम्बे) के पवई स्थित परिसर में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब द्वितीय वर्ष (सेकंड ईयर) के एक 19 वर्षीय छात्र को उसके हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पवई पुलिस स्टेशन की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा। पुलिस ने इस संबंध में दुर्घटनावश मृत्यु रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों से मिली प्राथमिक जानकारी के अनुसार, मृतक छात्र बीटेक द्वितीय वर्ष का छात्र था और परिसर स्थित हॉस्टल में रह रहा था। शुक्रवार को जब छात्र काफी देर तक अपने कमरे से बाहर नहीं निकला और उसके दोस्तों द्वारा दरवाजा खटखटाने व फोन करने पर भी कोई जवाब नहीं मिला, तो सहपाठियों ने इसकी सूचना हॉस्टल प्रबंधन और सुरक्षा कर्मियों को दी। सुरक्षा कर्मियों ने जब कमरे का दरवाजा खोला तो छात्र अचेत अवस्था में मिला। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
कमरे से नहीं मिला कोई सुसाइड नोट, पुलिस जांच जारी
पवई पुलिस के अनुसार, छात्र के कमरे की प्रारंभिक तलाशी के दौरान कोई सुसाइड नोट या पत्र बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने घटनास्थल का पंचनामा तैयार कर फॉरेंसिक जांच के लिए साक्ष्य एकत्र किए हैं। छात्र के कमरे से उसका मोबाइल फोन, लैपटॉप और कुछ अध्ययन सामग्री जब्त की गई है, जिन्हें तकनीकी जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना से पहले छात्र ने किससे संपर्क किया था या वह किसी बात को लेकर मानसिक तनाव में तो नहीं था।
जांच अधिकारियों का कहना है कि मौत के सही कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। पुलिस प्रशासन ने मृतक के परिजनों को सूचित कर दिया है। परिजनों के मुंबई पहुंचने के बाद उनके बयान भी दर्ज किए जाएंगे। पुलिस छात्र के सहपाठियों, हॉस्टल के साथियों और उसके प्रोफेसरों से भी पूछताछ कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि पिछले कुछ दिनों में उसका व्यवहार सामान्य था या नहीं।
- आईआईटी बॉम्बे प्रशासन का रुख
घटना के बाद संस्थान प्रशासन में शोक का माहौल है। संस्थान के अधिकारियों ने इस दुखद घटना पर गहरा खेद व्यक्त करते हुए कहा है कि वे शोक संतप्त परिवार के साथ खड़े हैं और पुलिस जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।
संस्थान के प्रवक्ता ने कहा कि पुलिस द्वारा मामले की आधिकारिक जांच की जा रही है, इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। संस्थान के भीतर छात्रों के कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और मेंटॉरशिप से जुड़ी व्यवस्थाओं की भी आंतरिक समीक्षा की जा रही है।
- राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों ने उठाए सवाल
उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की इस प्रकार की अप्रत्याशित मौतों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों पर बढ़ते अकादमिक दबाव और मनोवैज्ञानिक तनाव का मुद्दा उठाया है। कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए ताकि यह साफ हो सके कि छात्र किसी व्यवस्थागत दबाव, भेदभाव या तनाव का शिकार तो नहीं हुआ था।
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ और अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा है कि इस संवेदनशील मामले का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। नेताओं का कहना है कि पुलिस अपनी पेशेवर जांच कर रही है और प्राथमिक जांच के नतीजे आने से पहले अटकलें लगाना उचित नहीं है। छात्र संगठनों ने भी मांग की है कि तकनीकी संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए और काउंसलिंग व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए।
आईआईटी और एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश के लिए देश भर के लाखों युवा कठिन प्रतिस्पर्धा से गुजरते हैं। हालांकि, संस्थान में प्रवेश मिलने के बाद भी कड़े शैक्षणिक पाठ्यक्रम, ग्रेडिंग प्रणाली और भविष्य के करियर को लेकर छात्रों पर भारी मानसिक दबाव बना रहता है। बीते कुछ वर्षों में देश के विभिन्न आईआईटी परिसरों से छात्रों द्वारा आत्महत्या या संदिग्ध मौतों के कई मामले सामने आ चुके हैं, जिसे लेकर संसद से लेकर सड़क तक चिंता जताई जाती रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों को अकादमिक दबाव से उबारने के लिए संस्थानों को केवल हेल्पलाइन नंबर जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि शिक्षकों और छात्रों के बीच सतत संवाद, नियमित काउंसलिंग और सहपाठियों के सहयोग का एक संवेदनशील वातावरण तैयार करने की आवश्यकता है। पवई पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वे सभी संभावित कोणों से मामले की जांच कर रहे हैं और परिजनों के आने के बाद कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
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