DUSU Election Results: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में मतगणना जारी, शुरुआती रुझानों में एबीवीपी और एनएसयूआई में कड़ा मुकाबला
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के लिए मतगणना जारी है। पांच राउंड की गिनती के बाद मुख्य मुकाबला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और एनएसयूआई के बीच देखा जा रहा है।
- डूसू चुनाव परिणाम: पांच राउंड की मतगणना पूरी, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर पल-पल बदलते दिख रहे समीकरण
- Delhi University Student Union Election: छात्र संघ चुनाव के वोटों की गिनती जारी, जानिए चारों प्रमुख पदों पर क्या है ताजा स्थिति
- DUSU Election Trends: पांचवें दौर के बाद तेज हुई राजनीतिक हलचल, नॉर्थ कैंपस से लेकर साउथ कैंपस तक नतीजों का इंतजार
नई दिल्ली। देश के सबसे प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शुमार दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र संघ (डूसू) चुनाव के लिए मतगणना का दौर जारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन और चुनाव समिति की देखरेख में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतों की गिनती की जा रही है। पांचवें राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद चारों प्रमुख पदों अध्यक्ष (प्रेसिडेंट), उपाध्यक्ष (वाइस प्रेसिडेंट), सचिव (सेक्रेटरी) और संयुक्त सचिव (जॉइंट सेक्रेटरी) पर मुकाबला बेहद करीबी बना हुआ है। अब तक सामने आए रुझानों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और कांग्रेस के छात्र विंग नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के बीच केंद्रित है।
विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस स्थित मुख्य मतगणना केंद्र पर वोटों की गणना के साथ-साथ परिसर के बाहर दोनों संगठनों के समर्थकों का भारी जमावड़ा देखा जा रहा है। प्रत्येक राउंड के आंकड़े सार्वजनिक होने के साथ ही छात्र नेताओं और उनके समर्थकों के नारों से माहौल लगातार गर्मा रहा है। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियों को संवेदनशील जगहों पर तैनात किया गया है।
शुरुआती राउंड्स में उतार-चढ़ाव, कांटे की टक्कर
सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के सील खोले जाने के साथ मतगणना की प्रक्रिया आरंभ हुई। पहले और दूसरे राउंड की गिनती में जहां कुछ पदों पर एबीवीपी ने हल्की बढ़त बनाई, वहीं तीसरे और चौथे दौर में एनएसयूआई के प्रत्याशियों ने अंतर को कम करते हुए कुछ सीटों पर वापसी के संकेत दिए।
पांचवें दौर के समाप्त होने तक अध्यक्ष और सचिव पद पर मुकाबला बेहद नजदीकी नजर आ रहा है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न कॉलेजों के मतपत्रों और ईवीएम के राउंड जैसे-जैसे पूरे हो रहे हैं, आंकड़े तेजी से बदल रहे हैं। आर्ट्स फैकल्टी, लॉ सेंटर और साउथ कैंपस के बड़े कॉलेजों के मतों की गणना आगे के राउंड्स में नतीजों की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
वामपंथी छात्र संगठनों जैसे आइसा (AISA) और एसएफआई (SFI) ने भी कुछ पदों पर अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई है, जिससे कुछ महाविद्यालयों के मत विभाजन ने मुकाबले को बहुकोणीय और दिलचस्प बना दिया है।
इन प्रमुख मुद्दों पर छात्रों ने किया था मतदान
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव केवल छात्र राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसे देश के युवाओं के राजनीतिक मूड के संकेतक के रूप में भी देखा जाता है। इस बार के चुनाव में दोनों प्रमुख छात्र संगठनों ने कैंपस की बुनियादी समस्याओं को केंद्र में रखकर प्रचार किया था।
प्रचार के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दे हावी रहे:
हॉस्टल और आवास की कमी: बाहर से आने वाले छात्र-छात्राओं के लिए पर्याप्त छात्रावास की सुविधा न होना और निजी पीजी के मनमाने किराए पर रोक लगाने की मांग।
फीस वृद्धि का विरोध: विभिन्न पाठ्यक्रमों और सेल्फ-फाइनेंसिंग कोर्सेज में बढ़ती फीस का मुद्दा।
परिवहन सुविधा: छात्रों के लिए दिल्ली मेट्रो में रियायती पास (कंसेशनल मेट्रो पास) की व्यवस्था और कैंपस स्पेशल बसों की संख्या बढ़ाने की मांग।
महिला सुरक्षा: नॉर्थ और साउथ कैंपस के आसपास महिला सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने, आंतरिक शिकायत समितियों (ICC) को प्रभावी बनाने और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी का सवाल।
अकादमिक ढांचा: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत लागू चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP) के प्रभाव और बुनियादी शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता।
एबीवीपी ने जहां राष्ट्रवाद, कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और छात्र कल्याण योजनाओं को अपने एजेंडे में रखा, वहीं एनएसयूआई ने फीस वृद्धि, बेरोजगारी, छात्र अधिकारों और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को मुख्य आधार बनाया।
सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त, सीसीटीवी से निगरानी
मतगणना की पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) की निगरानी में विस्तृत प्रबंध किए गए हैं। मतगणना केंद्र के भीतर केवल अधिकृत प्रत्याशियों, उनके मुख्य एजेंटों और मीडिया कर्मियों को ही पहचान पत्र के सत्यापन के बाद प्रवेश की अनुमति दी गई है।
मतगणना हॉल के भीतर प्रत्येक टेबल की वीडियोग्राफी कराई जा रही है और पूरे परिसर को सीसीटीवी कैमरों के दायरे में रखा गया है। परिसर के बाहर किसी भी प्रकार के विजय जुलूस या नारेबाजी के दौरान विधि-व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए बैरिकेडिंग की गई है और ड्रोन कैमरों के माध्यम से भी आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, जैसे-जैसे मतगणना के अगले चरण पूरे होंगे, रुझान और स्पष्ट होते जाएंगे। डूसू में कुल मतों की संख्या और कॉलेजों के विभिन्न बूथों के आंकड़ों का मिलान पूरा होने के बाद ही चुनाव समिति द्वारा अंतिम परिणाम की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
विगत वर्षों में डूसू के चुनाव परिणामों ने राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल पैदा की है, क्योंकि यहां से निकले कई छात्र नेता आगे चलकर मुख्यधारा की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिकाओं में पहुंचे हैं। ऐसे में छात्र संगठनों के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व की नजरें भी नॉर्थ कैंपस के इस चुनाव परिणाम पर टिकी हुई हैं।
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