UP Academic Pride: यूपीएसआईएफएस के डॉ. कमलेश कुमार दुबे बने 'फुलब्राइट स्कॉलर', अमेरिका में पढ़ाएंगे फॉरेंसिक, एआई और साइबर सिक्योरिटी
यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कमलेश कुमार दुबे को अमेरिका के प्रतिष्ठित फुलब्राइट स्कॉलर-इन-रेजिडेंस सम्मान के तहत अध्यापन के लिए आमंत्रित किया गया है।
-
अमेरिकी छात्रों को तकनीक सिखाएंगे यूपी के प्रोफेसर: डॉ. कमलेश कुमार दुबे को मिला प्रतिष्ठित 'फुलब्राइट स्कॉलर-इन-रेजिडेंस' आमंत्रण
-
लखनऊ से अमेरिका तक तकनीकी धमक: लिविंगस्टोन कॉलेज में अध्यापन करेंगे डॉ. कमलेश दुबे, भारत-यूएस शोध साझेदारी को मिलेगा नया मंच
-
वैश्विक मंच पर यूपी की फॉरेंसिक प्रतिभा: एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कमलेश दुबे चयनित, क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और डेटा एनालिटिक्स पर देंगे व्याख्यान
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उच्च शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक अनुसंधान जगत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी प्रतिष्ठा अर्जित की है। राजधानी लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कमलेश कुमार दुबे को संयुक्त राज्य अमेरिका के विख्यात शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रम ‘फुलब्राइट स्कॉलर-इन-रेजिडेंस’ (Fulbright Scholar-in-Residence) के लिए आमंत्रित किया गया है। इस प्रतिष्ठित फेलोशिप के अंतर्गत डॉ. दुबे अमेरिका के लिविंगस्टोन कॉलेज में वहां के स्नातक व परास्नातक विद्यार्थियों (जेनरेशन-जेड) को उन्नत गणित, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और उभरती फॉरेंसिक तकनीकों का व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण देंगे।
यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने इस उपलब्धि की आधिकारिक पुष्टि करते हुए इसे राज्य की शैक्षणिक और तकनीकी क्षमता को वैश्विक मंच पर मिली महत्वपूर्ण मान्यता बताया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक साइंस और साइबर सुरक्षा के आधुनिक इकोसिस्टम को संस्थागत रूप से जिस प्रकार विकसित किया जा रहा है, यह चयन उसी दिशा में एक ठोस अंतरराष्ट्रीय विस्तार है।
लिविंगस्टोन कॉलेज में दो अकादमिक सेमेस्टर तक अध्यापन
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, डॉ. कमलेश कुमार दुबे को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अमेरिका के सैलिसबरी, नॉर्थ कैरोलिना स्थित ऐतिहासिक 'लिविंगस्टोन कॉलेज' (Livingstone College) में आमंत्रित किया गया है। वे वहां दो पूर्ण अकादमिक सेमेस्टर यानी मई 2027 तक नियमित शैक्षणिक, पाठ्यचर्या विकास और शोध गतिविधियों का संचालन करेंगे।
अमेरिका प्रवास के दौरान डॉ. दुबे गणितीय सिद्धांतों को आधुनिक तकनीकी अनुप्रयोगों से जोड़ते हुए प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स, बिजनेस एनालिटिक्स, डिस्क्रिप्टिव एनालिटिक्स और डेटा माइनिंग जैसे विषयों का अध्यापन करेंगे। इसके अतिरिक्त, वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, आधुनिक क्रिप्टोग्राफी, क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और ब्लॉकचेन तकनीक के फॉरेंसिक अनुप्रयोगों पर विशेष व्याख्यान व शोध कार्यशालाएं आयोजित करेंगे।
भारत-अमेरिका शोध सहयोग के नए द्वार
यूपीएसआईएफएस के निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी जो स्वयं पूर्व में प्रतिष्ठित 'फुलब्राइट फ्लेक्स अवार्ड फेलो' रह चुके हैं ने बताया कि डॉ. दुबे का यह चयन दोनों देशों के विश्वविद्यालयों के बीच संस्थागत शोध साझेदारी को मजबूत करेगा। गणित को डेटा साइंस और साइबर सुरक्षा की व्यावहारिक प्रणाली से जोड़कर पढ़ाने का उनका अनुभव दोनों देशों के प्राध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के बीच अकादमिक संवाद का नया सेतु बनेगा।
उन्होंने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय सहभागिता से भविष्य में यूपीएसआईएफएस और अमेरिकी उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच संयुक्त अनुसंधान पत्रिकाओं के प्रकाशन, द्विपक्षीय सम्मेलनों के आयोजन और छात्रों के आदान-प्रदान कार्यक्रमों की संभावनाएं भी विकसित होंगी।
बदलते अपराध और आधुनिक फॉरेंसिक इकोसिस्टम की आवश्यकता
वर्तमान डिजिटल युग में अपराधों की प्रकृति में व्यापक परिवर्तन दर्ज किया गया है। पारंपरिक शारीरिक अपराधों के मुकाबले वित्तीय धोखाधड़ी, डेटा ब्रीच, रैनसमवेयर हमले, डिजिटल पहचान की चोरी और संगठित साइबर अपराध तेजी से बढ़े हैं। ऐसे जटिल मामलों के सफल अनावरण और न्यायिक प्रक्रियाओं में तकनीकी व वैज्ञानिक साक्ष्यों की महत्ता सर्वाधिक हो गई है।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लखनऊ में स्थापित यूपीएसआईएफएस इसी आवश्यकता को पूरा करने वाला अग्रणी संस्थान बनकर उभरा है। यहां पुलिस अधिकारियों, अभियोजकों और युवा वैज्ञानिकों को डिजिटल साक्ष्य संकलन, मोबाइल एवं कंप्यूटर फॉरेंसिक, नेटवर्क सुरक्षा और क्लाउड डेटा जांच का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डॉ. दुबे की यह अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि दर्शाती है कि संस्थान में उपलब्ध संकाय का स्तर वैश्विक कसौटी पर खरा उतर रहा है।
19 वर्षों का शोध अनुभव, 10 पेटेंट और 40 से अधिक शोध-पत्र
डॉ. कमलेश कुमार दुबे का अकादमिक सफर लगभग दो दशकों की निरंतर साधना पर आधारित है। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से पूरी की है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीएससी एवं एमएससी की उपाधि प्राप्त की, जबकि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर से गणित विषय में पीएचडी की उपाधि अर्जित की।
अपने 19 वर्षों से अधिक के अध्यापन व अनुसंधान करियर में डॉ. दुबे ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में 40 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं। तकनीकी नवाचार और डेटा मॉडलिंग के क्षेत्र में उनके नाम 10 पेटेंट दर्ज हैं तथा वे चार मानक पाठ्यपुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। उनके कुशल मार्गदर्शन में अब तक छह शोधार्थी सफलतापूर्वक पीएचडी की डिग्री पूरी कर चुके हैं, जो विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवारत हैं।
वैश्विक ज्ञान-विनिमय में भागीदार बना उत्तर प्रदेश
डॉ. दुबे का 'फुलब्राइट स्कॉलर-इन-रेजिडेंस' के रूप में चयन इस तथ्य को प्रमाणित करता है कि उत्तर प्रदेश अब केवल तकनीकी प्रतिभाओं को तैयार करने वाला राज्य नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ज्ञान-विनिमय (Global Knowledge Exchange) में सक्रिय भूमिका निभाने की स्थिति में पहुंच चुका है। राज्य के प्राध्यापकों का ऐसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंचों पर प्रतिनिधित्व न केवल स्थानीय विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ाता है, बल्कि वैश्विक शैक्षणिक समुदाय में प्रदेश के संस्थानों की साख को भी सुदृढ़ करता है।
Also Click : एडवोकेट रीना एन सिंह पहुंचीं चुनाव आयोग, सपा और अखिलेश यादव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
What's Your Reaction?







