अयोध्या दीपोत्सव-2026: तीन देशों की चार रामलीलाएं बनेंगी मुख्य आकर्षण, गिरमिटिया मजदूरों के वंशज मंचन को तैयार
अयोध्या के 10वें दीपोत्सव में दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और लाओस के कलाकार रामलीला का मंचन करेंगे। 12 मंचों पर 2500 कलाकार प्रस्तुत करेंगे वैश्विक रामकथा की छटा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में रामनगरी अयोध्या का दसवां दीपोत्सव वैश्विक सांस्कृतिक एकात्मता और भगवान श्रीराम के सार्वभौमिक प्रभाव का साक्षी बनने जा रहा है। इस ऐतिहासिक आयोजन में दुनिया के विभिन्न देशों की सांस्कृतिक विरासत और रामकथा की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता जीवंत रूप में देखने को मिलेगी। इस बार तीन विदेशी राष्ट्रों की चार प्रमुख रामलीला टीमें अपनी विशिष्ट पारंपरिक शैलियों में प्रभु श्रीराम की लीलाओं का मंचन करेंगी। आयोजन के अंतर्गत दक्षिण अफ्रीका की दो टीमों के साथ-साथ श्रीलंका और लाओस के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से रामनगरी को आलोकित करेंगे। इसके अतिरिक्त देश-विदेश के लगभग 2500 ख्यातिप्राप्त कलाकार 12 सुसज्जित मंचों पर अपनी सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन करेंगे।
दीपोत्सव-2026 में विशेष आकर्षण का केंद्र दक्षिण अफ्रीका के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली रामलीला रहेगी। दशकों पूर्व गिरमिटिया मजदूर के रूप में भारत से सुदूर दक्षिण अफ्रीका पहुंचे भारतवंशियों ने तमाम विपरीत परिस्थितियों और संघर्षों के बावजूद सनातन संस्कृति, परंपराओं और रामकथा की ज्योति को प्रज्वलित रखा। उन्होंने न केवल इस अमूल्य धरोहर को अपनी पीढ़ियों में सुरक्षित रखा, बल्कि वहां के स्थानीय जनमानस को भी भारतीय जीवन मूल्यों से जोड़ा। वर्षों की साधना के उपरांत दक्षिण अफ्रीका से अयोध्या पहुंचे ये कलाकार अपनी जड़ों से जुड़कर दो अलग-अलग दलों में प्रस्तुति देंगे; जिसमें एक दल द्वारा भक्तिभाव से परिपूर्ण रामचरितमानस का पारंपरिक गायन किया जाएगा, जबकि दूसरा दल मंचीय रामलीला का सजीव अभिनय करेगा।
विदेशी सहभागिता की इस कड़ी में श्रीलंका और लाओस के कलाकार भी अपने देशों की लोकभाषा, पारंपारिक वेशभूषा, स्थानीय वाद्ययंत्रों और अनूठी नृत्य शैलियों में रामकथा का मंचन करेंगे। यह अनूठा मंचन यह प्रमाणित करेगा कि भौगोलिक सीमाओं से परे मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन दर्शन विभिन्न देशों की लोकसंस्कृतियों में किस प्रकार गहराई से रचा-बसा है।
उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा इस भव्य महोत्सव के लिए छह लघु, चार मध्यम और दो दीर्घ आकार के कुल 12 विशाल मंच स्थापित किए जा रहे हैं। इन मंचों पर असम, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और केरल के लोककलाकार अपनी-अपनी क्षेत्रीय शैलियों में श्रीराम के चरित्र, संगीत और लोकनृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियां देंगे।
अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार एवं विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) आशुतोष द्विवेदी ने जानकारी दी कि अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय कलाकारों का यह समागम दीपोत्सव के सांस्कृतिक फलक को अप्रतिम विस्तार देगा। उन्होंने कहा कि भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या वैश्विक पटल पर धार्मिक के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उभरी है। विदेशी और स्थानीय कलाकारों की साझी भागीदारी से जहां एक ओर सांस्कृतिक पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा, वहीं स्थानीय आतिथ्य और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति प्राप्त होगी।
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