UP Investment News: यूपी बनेगा ग्लोबल पैकेजिंग हब, बॉल, क्राउन और कैनपैक मेरठ-उन्नाव में करेंगी ₹6,566 करोड़ का निवेश
उत्तर प्रदेश में बॉल, क्राउन और कैनपैक कुल ₹6,566 करोड़ का निवेश करेंगी। मेरठ और उन्नाव के यूपीडा क्लस्टर में एल्युमिनियम बेवरेज कैन की आधुनिक निर्माण इकाइयां स्थापित होंगी।
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- UPEIDA IMLC Projects: यूपीडा के औद्योगिक क्लस्टर्स में तीन वैश्विक कंपनियों का बड़ा दांव, एफएमसीजी और बेवरेज सेक्टर को मिलेगी रफ्तार
लखनऊ। वैश्विक औद्योगिक मानचित्र पर उत्तर प्रदेश की उपस्थिति लगातार सुदृढ़ हो रही है। उन्नत विनिर्माण और आधुनिक पैकेजिंग क्षेत्र की दुनिया की तीन शीर्ष कंपनियों बॉल कॉर्पोरेशन, क्राउन होल्डिंग्स और कैनपैक ने राज्य में बड़े पैमाने पर उत्पादन इकाइयां स्थापित करने का निर्णय लिया है। इन तीनों वैश्विक समूहों की ओर से मेरठ और उन्नाव जनपदों में कुल ₹6,566 करोड़ का संयुक्त पूंजी निवेश प्रस्तावित किया गया है। इस निवेश से उत्तर प्रदेश न केवल एल्युमिनियम बेवरेज कैन और एडवांस पैकेजिंग का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा, बल्कि राज्य की औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को भी नई मजबूती मिलेगी।
निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया के बीच क्राउन होल्डिंग्स और बॉल कॉर्पोरेशन के शीर्ष प्रबंधन ने गुरुवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में क्राउन के कार्यकारी उपाध्यक्ष व मुख्य परिचालन अधिकारी डाल्मा नोवेस, बेवरेज कैन (यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका) के अध्यक्ष मार्क केचेसन तथा बॉल कॉर्पोरेशन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रॉन लुईस और बोर्ड सदस्य कैरी कॉजी व मैंडी ग्लू शामिल रहे। बैठक के दौरान राज्य में औद्योगिक नीतियों के क्रियान्वयन, अधोसंरचना विकास और आगामी परियोजनाओं की प्रगति पर सकारात्मक चर्चा हुई।
उन्नाव में भारत का पहला क्राउन प्लांट
अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी क्राउन होल्डिंग्स की भारतीय अनुषंगी 'क्राउन पैकेजिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' उत्तर प्रदेश के उन्नाव में भारत की अपनी पहली अत्याधुनिक विनिर्माण इकाई स्थापित कर रही है। यह संयंत्र उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा विकसित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) के अंतर्गत लगभग 40 एकड़ भूमि पर लगाया जा रहा है।
कंपनी इस ग्रीनफील्ड परियोजना में ₹2,078.44 करोड़ का निवेश कर रही है। इकाई की स्थापना के लिए भूमिपूजन का कार्य भी पूरा कर लिया गया है। प्रारंभिक चरण में इस प्लांट की उत्पादन क्षमता 116.2 करोड़ एल्युमिनियम बेवरेज कैन प्रतिवर्ष तय की गई है। मांग और बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप इसे आगे चलकर सालाना 178.6 करोड़ कैन तक विस्तारित करने की योजना है। इस उद्यम से 209 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार और 1,500 से अधिक स्थानीय युवाओं को अप्रत्यक्ष आजीविका मिलने का अनुमान है।
मेरठ में बॉल कॉर्पोरेशन की वृहद परियोजना
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक आधार को गति देने के उद्देश्य से बॉल कॉर्पोरेशन की भारतीय इकाई 'बॉल बेवरेज पैकेजिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' ने मेरठ स्थित यूपीडा के आईएमएलसी में इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। कंपनी इस क्षेत्र में लगभग 40 एकड़ भूमि पर अपनी निर्माण इकाई के निर्माण के लिए ₹2,913 करोड़ की पूंजी लगाएगी।
मेरठ में इस उच्च तकनीक वाली विनिर्माण इकाई के शुरू होने से न केवल एल्युमिनियम कैन का वृहद उत्पादन होगा, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण, बेवरेज और एफएमसीजी उद्योगों को स्थानीय स्तर पर आधुनिक पैकेजिंग समाधान सुलभ हो सकेंगे।
कैनपैक का उन्नाव में ₹1,574 करोड़ से अधिक का विस्तार
पैकेजिंग उद्योग की एक अन्य प्रमुख वैश्विक कंपनी 'कैनपैक इंडिया' भी उन्नाव के आईएमएलसी क्लस्टर में ग्रीनफील्ड इकाई के निर्माण में जुटी है। राज्य सरकार से मिली औपचारिक स्वीकृतियों के आधार पर कैनपैक लगभग 26 हेक्टेयर भूमि पर ₹1,574.62 करोड़ का निवेश कर रही है।
इस इकाई की वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 130 करोड़ एल्युमिनियम कैन होगी। उन्नाव में क्राउन और कैनपैक की एक साथ मौजूदगी से मध्य उत्तर प्रदेश उन्नत पैकेजिंग के एक महत्वपूर्ण नोड के रूप में स्थापित होगा, जबकि मेरठ की इकाई पश्चिमी क्षेत्र में मांग और आपूर्ति के संतुलन को साधेगी।
संपूर्ण औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला को मिलेगा संबल
इन परियोजनाओं का प्रभाव सिर्फ डिब्बे और कैन तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा। धातु विनिर्माण और पैकेजिंग क्षेत्र में इतने बड़े पूंजी प्रवाह से सहायक उद्योगों (एंंसिलरी यूनिट्स) का एक व्यापक तंत्र विकसित होगा। संयंत्रों के सुचारु संचालन के लिए कच्चे माल, आधुनिक मशीनरी के कलपुर्जों, स्थानीय परिवहन, वेयरहाउसिंग और तकनीकी रखरखाव जैसी सहायक सेवाओं की मांग में भारी वृद्धि होगी।
स्थानीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को इन बहुराष्ट्रीय निगमों के साथ वेंडर और सप्लायर के रूप में जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे तकनीकी हस्तांतरण (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) और स्थानीय कार्यबल के कौशल विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में फल-सब्जी प्रसंस्करण और पेय उत्पादों से जुड़े उद्योगों को पैकेजिंग सामग्री के लिए दूसरे राज्यों या आयात पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे उनकी उत्पादन लागत में कमी आएगी।
यूपीडा के क्लस्टर मॉडल की सफलता
इन तीनों बड़ी निवेश परियोजनाओं को जमीन पर उतारने में यूपीडा के इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (आईएमएलसी) की रणनीतिक भूमिका सामने आई है। राज्य सरकार ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे आधुनिक गलियारों के किनारे औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए हैं, जहां भूमि आवंटन, निर्बाध विद्युत आपूर्ति और सुगम सड़क संपर्क एक साथ उपलब्ध कराया जा रहा है।
मेरठ और उन्नाव के क्लस्टर्स में विश्वस्तरीय कंपनियों का आगमन इस बात का प्रमाण है कि बुनियादी ढांचे और पारदर्शी नीतिगत प्रोत्साहन के संयोजन से बड़े निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य प्रशासन का प्रयास निवेश प्रस्तावों को केवल समझौतों तक सीमित न रखकर उन्हें समयबद्ध तरीके से उत्पादन चरण तक पहुंचाना है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके।
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