Digital India 2047: भारत में डेटा सेंटर: डिजिटल युग के बुनियादी ढांचे की रीढ़
नई दिल्ली। भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और इस बदलाव में डेटा सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऑनलाइन
नई दिल्ली। भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और इस बदलाव में डेटा सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी सेवाओं को चौबीसों घंटे संचालित रखने के लिए मजबूत, सुरक्षित और विश्वसनीय डेटा सेंटर जरूरी हैं। डेटा सेंटर ऐसे सुरक्षित केंद्र होते हैं, जहां कंप्यूटिंग, स्टोरेज और नेटवर्किंग से जुड़े उपकरण स्थापित किए जाते हैं। यहां बड़ी मात्रा में डिजिटल सूचनाओं को संगृहीत, संसाधित और प्रबंधित किया जाता है। आधुनिक डेटा सेंटर में सर्वर, स्टोरेज सिस्टम, नेटवर्किंग उपकरण, बिजली आपूर्ति, कूलिंग, सुरक्षा और प्रबंधन प्रणालियां एक साथ काम करती हैं।
- 1.57 गीगावाट तक पहुंची डेटा सेंटर क्षमता
भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। वर्ष 2020 में डेटा सेंटर की स्थापित विद्युत क्षमता करीब 375 मेगावाट थी, जो अगस्त 2026 तक बढ़कर 1.57 गीगावाट हो गई है। वर्ष 2030 तक इसके करीब 8 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है।
डेटा सेंटर क्षेत्र में करीब 70 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश पहले से हो रहा है, जबकि लगभग 90 अरब अमेरिकी डॉलर के अतिरिक्त प्रोजेक्ट्स की घोषणा की जा चुकी है। यह भारत में डिजिटल बुनियादी ढांचे के प्रति निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
- एनआईसी के डेटा सेंटर निभा रहे अहम भूमिका
भारत में ई-गवर्नेंस और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा सेंटर का नेटवर्क भी मजबूत हुआ है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) ने दिल्ली, पुणे, हैदराबाद और भुवनेश्वर में अत्याधुनिक राष्ट्रीय डेटा सेंटर स्थापित किए हैं। इसके अलावा विभिन्न राज्यों की राजधानियों में 37 छोटे डेटा सेंटर भी स्थापित किए गए हैं।
ये केंद्र सरकारी संस्थानों को चौबीसों घंटे विश्वसनीय डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद कर रहे हैं।
- बिजली और कूलिंग डेटा सेंटर की सबसे बड़ी जरूरत
डेटा सेंटर को लगातार बिजली की आवश्यकता होती है। बिजली बाधित होने की स्थिति में UPS, बैकअप जनरेटर और विद्युत वितरण प्रणालियां सेवाओं को जारी रखने में मदद करती हैं।
इसके साथ ही सर्वरों और अन्य उपकरणों को निर्धारित तापमान पर रखने के लिए आधुनिक कूलिंग सिस्टम जरूरी हैं। HVAC, एयरफ्लो मैनेजमेंट और लिक्विड कूलिंग जैसी तकनीकें डेटा सेंटर की दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ा रही हैं।
- एक क्लिक से कुछ सेकंड में मिलता है जवाब
जब कोई व्यक्ति मोबाइल या कंप्यूटर से बैंक बैलेंस देखने, ऐप खोलने या कोई ऑनलाइन सेवा इस्तेमाल करने के लिए रिक्वेस्ट भेजता है, तो यह नेटवर्क के माध्यम से डेटा सेंटर तक पहुंचती है। सबसे पहले सुरक्षा प्रणाली रिक्वेस्ट की जांच करती है। इसके बाद लोड बैलेंसर उसे उपलब्ध सर्वर तक पहुंचाता है। एप्लिकेशन सर्वर रिक्वेस्ट को प्रोसेस करता है और जरूरत पड़ने पर API के माध्यम से अन्य सेवाओं से जानकारी लेता है। डेटाबेस सर्वर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराता है और प्रोसेस होने के बाद जवाब वापस यूजर के डिवाइस तक पहुंच जाता है।
यह पूरी प्रक्रिया कई मामलों में महज 1-2 सेकंड में पूरी हो सकती है।
- डेटा सेंटर को मिला बुनियादी ढांचे का दर्जा
सरकार ने डेटा सेंटर क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत कदम उठाए हैं। केंद्रीय बजट 2022-23 में डेटा सेंटरों को बुनियादी ढांचे की सामंजस्यपूर्ण सूची में शामिल किया गया। इससे डेटा सेंटर को बुनियादी ढांचे का दर्जा मिला और उनके लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण की सुविधा बेहतर हुई।
वहीं, केंद्रीय बजट 2026-27 में पात्र विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए वर्ष 2047 तक टैक्स हॉलिडे की व्यवस्था की गई है। सरकार का मानना है कि इससे भारत में डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
- सेमीकंडक्टर और एआई मिशन से भी मिलेगा फायदा
डेटा सेंटर के विस्तार को सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आईटी हार्डवेयर क्षेत्र में हो रहे निवेश से भी मजबूती मिल रही है।
सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के दूसरे चरण (Semicon 2.0) को 1.27 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई है। वहीं इंडियाएआई मिशन के लिए 10,371.92 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम और IT Hardware PLI Scheme 2.0 जैसी योजनाएं सर्वर और अन्य डिजिटल उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा दे रही हैं।
- बढ़ती क्षमता के साथ ऊर्जा की चुनौती
डेटा सेंटर के विस्तार के साथ ऊर्जा की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार वर्ष 2031-32 तक डेटा सेंटर क्षेत्र की बिजली मांग 17 गीगावाट तक पहुंच सकती है।
इसी वजह से सरकार डेटा सेंटर के लिए नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन जैसी पहल इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
- जल और ऊर्जा दक्षता पर भी जोर
डेटा सेंटरों में कूलिंग के लिए पानी और बिजली की बड़ी मात्रा इस्तेमाल हो सकती है। इसे देखते हुए ऊर्जा और संसाधन दक्षता के मानकों पर भी जोर दिया जा रहा है।
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने डेटा सेंटर की दक्षता के लिए Power Usage Effectiveness (PUE), Carbon Usage Effectiveness (CUE), Cooling Efficiency Ratio (CER) और Water Usage Effectiveness (WUE) जैसे मानकों को बढ़ावा दिया है।
एआई आधारित डेटा सेंटरों में डायरेक्ट-टू-चिप लिक्विड कूलिंग, एडियाबैटिक कूलिंग, इमर्शन कूलिंग और क्लोज्ड-लूप लिक्विड कूलिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
- डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेंगे डेटा सेंटर
भारत के डेटा सेंटर क्षेत्र का विस्तार देश की डिजिटल संप्रभुता, साइबर सुरक्षा, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण है। क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर की भूमिका आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण होने वाली है। भारत को इस क्षेत्र में विकास के साथ-साथ डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण और जिम्मेदार डेटा प्रबंधन पर भी ध्यान देना होगा। 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए डेटा सेंटर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार बन सकते हैं।
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