Bihar Student Credit Card Scheme: बिहार में शिक्षा ऋण के बदले नियम, ₹2 लाख निगम से और ऊपर के लोन के लिए पीएम विद्यालक्ष्मी पोर्टल

Bihar Student Credit Card Scheme: बिहार में स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड से लोन लेने की प्रक्रिया बदल गई है। ₹2 लाख निगम से और उससे अधिक के लिए नए नियम लागू किए गए हैं।

Aug 22, 2026 - 15:06
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Bihar Student Credit Card Scheme: बिहार में शिक्षा ऋण के बदले नियम, ₹2 लाख निगम से और ऊपर के लोन के लिए पीएम विद्यालक्ष्मी पोर्टल
बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड से लोन लेने की बदली प्रक्रिया
  • Bihar Student Credit Card New Rules: बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, जानिए अब कैसे और किसे मिलेगा लोन
  • Bihar Student Credit Card: बिहार में बदला स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड से लोन लेने का नियम, जानिए अब छात्रों को कैसे मिलेगा शिक्षा ऋण
  • Bihar: बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के नियमों में संशोधन, 2 लाख तक निगम और उससे अधिक पर पीएम विद्यालक्ष्मी से मिलेगा ऋण

बिहार सरकार ने उच्च शिक्षा की पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को आर्थिक संबल देने वाली अपनी महत्वाकांक्षी योजना 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' के तहत ऋण वितरण और आवेदन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किए हैं। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था के अनुसार, अब विद्यार्थियों को अधिकतम 2 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण सीधे 'बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम' के माध्यम से मिलेगा, जबकि 2 लाख रुपये से अधिक और 4 लाख रुपये तक की अतिरिक्त राशि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों तथा पीएम-विद्यालक्ष्मी पोर्टल के समन्वय से उपलब्ध कराई जाएगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए विस्तारित इस योजना का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा छात्रों को संस्थागत वित्तीय सहायता से जोड़ना और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है। 

बिहार सरकार ने उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को बढ़ाने के उद्देश्य से स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के ऋण ढांचे का पुनर्गठन किया है। पहले जहां 4 लाख रुपये तक की पूरी ऋण राशि सीधे राज्य शिक्षा वित्त निगम द्वारा संवितरित की जाती थी, वहीं अब इसे दो स्तरों में विभाजित कर दिया गया है।

नई व्यवस्था के तहत 2 लाख रुपये तक की जरूरत वाले विद्यार्थियों को राज्य वित्त निगम से ऋण मिलेगा। जिन पाठ्यक्रमों में 2 लाख रुपये से अधिक और 4 लाख रुपये तक के खर्च की आवश्यकता होगी, उनके लिए योजना को अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और केंद्र सरकार के 'पीएम-विद्यालक्ष्मी पोर्टल' के साथ एकीकृत किया गया है। इसके साथ ही यदि कोई पात्र छात्र 10 लाख रुपये तक का उच्च ऋण लेना चाहता है, तो उसे पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना के माध्यम से भी सीधे आवेदन का विकल्प मिलेगा। 

उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, योजना के संशोधित स्वरूप को आगामी पांच वर्षों यानी 2026-27 से 2030-31 तक के लिए मंजूरी दे दी गई है और इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष में बजट बढ़ाकर 950 करोड़ रुपये कर दिया गया है। आवेदन की पूरी प्रक्रिया को भी चरणबद्ध तरीके से स्पष्ट किया गया है ताकि किसी छात्र को परेशानी न हो।

विद्यार्थियों को सबसे पहले राज्य सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा। दो लाख रुपये तक के ऋण के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया के बाद छात्र को अपने गृह जिले के जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र (डीआरसीसी) में जाकर शैक्षणिक, आवासीय और संस्थान से जुड़े दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कराना होगा। दो लाख से अधिक के ऋण के लिए छात्रों को डीआरसीसी केंद्रों पर ही पीएम-विद्यालक्ष्मी पोर्टल के माध्यम से निशुल्क आवेदन की तकनीकी सुविधा प्रदान की जाएगी, जिसके बाद बैंक स्तर पर सत्यापन कर राशि सीधे कॉलेज को भेजी जाएगी। 

शिक्षा विभाग ने उन भ्रामक दावों का खंडन किया है जिनमें कहा जा रहा था कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा घटा दी गई है। विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि योजना की सीमा घटी नहीं है, बल्कि बैंकों और केंद्रीय पोर्टल से जोड़कर इसका दायरा और विस्तृत किया गया है ताकि छात्रों के पास फंड जुटाने के ज्यादा विकल्प मौजूद रहें। जिन छात्रों के ऋण पहले ही स्वीकृत हो चुके हैं, उन पर इस नई व्यवस्था का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

वहीं छात्र संगठनों और अभिभावकों ने प्रक्रिया के सरलीकरण का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही मांग की है कि बैंकों के साथ समन्वय में छात्रों को अनावश्यक कागजी औपचारिकताओं और देरी का सामना न करना पड़े। डीआरसीसी केंद्रों पर सिंगल विंडो सिस्टम के सुचारू संचालन की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।

इस नए ढांचे का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि राज्य सरकार के वित्तीय संसाधनों का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा और बैंकिंग तंत्र की सीधी भागीदारी से फंड वितरण में तेजी आएगी। राज्य में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात 28.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने के लक्ष्य को हासिल करने में यह व्यवस्था मददगार साबित होगी।

इसके अतिरिक्त सरकार ने समय पर ऋण चुकाने वाले विद्यार्थियों के लिए आकर्षक प्रोत्साहन नीति भी लागू रखी है। निर्धारित समयसीमा के भीतर ऋण का पुनर्भुगतान करने वाले छात्रों को 30 प्रतिशत तक ब्याज प्रोत्साहन दिया जाएगा, जबकि छात्राओं, दिव्यांगों और थर्ड जेंडर लाभार्थियों को 10 प्रतिशत का अतिरिक्त लाभ मिलने से कुल 40 प्रतिशत तक का ब्याज प्रोत्साहन प्राप्त हो सकेगा। 

आने वाले दिनों में सभी 38 जिलों के डीआरसीसी केंद्रों पर नई व्यवस्था के तहत काउंटर और तकनीकी सुविधाएं अपडेट की जाएंगी। सरकार का लक्ष्य चालू सत्र में तकनीकी, मेडिकल, मैनेजमेंट, नर्सिंग और सामान्य स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले लाखों छात्र-छात्राओं तक योजना का निर्बाध लाभ पहुंचाना है। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अपने संस्थान की मान्यता और शुल्क संरचना से जुड़े दस्तावेज पहले से तैयार रखें ताकि पोर्टल पर आवेदन करते ही प्रक्रिया तेजी से पूरी हो सके।

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