BRICS Summit: 3 दिन में 15 द्विपक्षीय बैठकें, पीएम मोदी के कूटनीतिक एजेंडे में छाया रहा ग्लोबल साउथ
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीन दिवसीय दौरा कूटनीतिक रूप से बेहद व्यस्त रहा। 15 द्विपक्षीय बैठकों के साथ भारत ने ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को प्रमुखता से उठाया।
- BRICS Summit: 3 दिन में 15 द्विपक्षीय बैठकें, पीएम मोदी के कूटनीतिक एजेंडे में छाया रहा ग्लोबल साउथ
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- ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज बना भारत: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का सघन कूटनीतिक कार्यक्रम, कई अहम समझौतों पर सहमति
बहुपक्षीय मंचों पर भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाते हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीन दिवसीय कार्यक्रम बेहद व्यस्त और कूटनीतिक रूप से सघन रहा। सम्मेलन के निर्धारित सत्रों में भागीदारी के अतिरिक्त प्रधानमंत्री ने तीन दिनों की इस अवधि में 15 से अधिक द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें कीं। इन सभी चर्चाओं के केंद्र में विकासशील देशों यानी 'ग्लोबल साउथ' की प्राथमिकताओं को वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक विमर्श के मुख्य पटल पर स्थापित करने का स्पष्ट प्रयास दिखाई दिया।
बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन और आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों के बीच यह सम्मेलन भारत के लिए आर्थिक साझेदारी विस्तार और कूटनीतिक रिश्तों को नया आयाम देने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार, निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था और जलवायु न्याय जैसे मुद्दों को जोरदार ढंग से रेखांकित किया।
- तीन दिनों का सघन कूटनीतिक कार्यक्रम
सम्मेलन के दौरान भारतीय नेतृत्व की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि औपचारिक पूर्ण सत्रों के साथ-साथ दुनिया के प्रमुख क्षेत्रों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों का सिलसिला लगातार जारी रहा। इन बैठकों में एशिया, अफ्रीका, यूरेशिया और लैटिन अमेरिका के विभिन्न देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ सीधी वार्ता हुई।
- द्विपक्षीय चर्चाओं के प्रमुख पहलू इस प्रकार रहे:
व्यापार और स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन: सदस्य देशों के बीच व्यापारिक निर्भरता को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए स्थानीय मुद्राओं के उपयोग की संभावनाओं और बैंकिंग संपर्कों को मजबूत करने पर विमर्श हुआ।
डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI): भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र और जन-केंद्रित तकनीकी मॉडल को विकासशील देशों में अपनाने और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर सकारात्मक बातचीत हुई।
सप्लाई चेन लचीलापन: ऊर्जा, उर्वरक और खाद्य सुरक्षा के संवेदनशील क्षेत्रों में आपूर्ति को बिना किसी भू-राजनीतिक बाधा के निरंतर बनाए रखने के उपायों पर बल दिया गया।
- ग्लोबल साउथ के हितों की मुखर वकालत
भारतीय विदेश नीति के मूल सिद्धांतों के अनुरूप इस सम्मेलन में भी विकासशील और अविकसित देशों के विकास के अधिकारों को प्रमुखता दी गई। शिखर सम्मेलन के मंच से यह बात स्पष्ट रूप से रखी गई कि जब तक वैश्विक निर्णय प्रक्रियाओं में अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के विकासशील देशों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता, तब तक टिकाऊ विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करना संभव नहीं होगा।
ग्लोबल साउथ के संदर्भ में भारत ने जिन मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया, उनमें तकनीकी पहुंच को लोकतांत्रिक बनाना, ऋण संकट से जूझ रहे देशों के लिए दीर्घकालिक समाधान खोजना और जलवायु परिवर्तन के वित्तीय भार को न्यायसंगत तरीके से साझा करना शामिल रहा। विकसित देशों द्वारा किए जाने वाले जलवायु वित्त पोषण के वादों को धरातल पर उतारने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
- आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा पर स्पष्ट रुख
बहुपक्षीय सत्रों के दौरान सुरक्षा चुनौतियों, सीमा पार आतंकवाद और साइबर खतरों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। भारत की ओर से यह दोहराया गया कि आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में किसी भी प्रकार का दोहरा मापदंड स्वीकार्य नहीं हो सकता। आतंकवादी नेटवर्क के वित्त पोषण पर अंकुश लगाने और वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) के मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के महत्व को रेखांकित किया गया। इसके अतिरिक्त, समुद्री सुरक्षा और सुरक्षित व्यापार मार्गों को बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों के सम्मान की आवश्यकता पर भी सहमति बनी।
- आर्थिक सहयोग और ब्रिक्स बैंक
शिखर सम्मेलन की एक बड़ी उपलब्धि आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने से जुड़े फैसलों में दिखी। न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की कार्यप्रणाली को और अधिक समावेशी बनाने तथा सदस्य देशों के बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स के लिए रियायती दरों पर वित्त उपलब्ध कराने पर व्यापक सहमति बनी। गैर-पश्चिमी आर्थिक मंचों के रूप में ब्रिक्स के विस्तार के बाद अब इसका दायरा केवल पारंपरिक आर्थिक ब्लॉक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह ऊर्जा उत्पादक और ऊर्जा उपभोक्ता देशों के बीच एक सीधा सेतु बन चुका है।
- रणनीतिक संतुलन का संदेश
विश्लेषकों का मानना है कि इस तीन दिवसीय दौरे में भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि वह बहुपक्षीय व्यवस्था का सम्मान करता है और किसी एक विशेष गुट का हिस्सा बने बिना अपने राष्ट्रीय हितों और संतुलित विदेश नीति पर कायम है। 15 अलग-अलग देशों के साथ उच्च स्तरीय वार्ताएं यह दर्शाती हैं कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्वीकार्यता और मध्यस्थता की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में ब्रिक्स सम्मेलन से निकला यह कूटनीतिक परिणाम आने वाले समय में न केवल व्यापारिक सहयोग को नई दिशा देगा, बल्कि विकासशील देशों के मुद्दों को संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर अधिक वजन के साथ उठाने का आधार भी तैयार करेगा।
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