BRICS Summit Day 2: नई दिल्ली के भारत मंडपम पहुंचे पार्टनर देशों के शीर्ष नेता, ओपन प्लेनरी सेशन में वैश्विक मुद्दों पर मंथन शुरू
नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन भारत मंडपम में ब्रिक्स पार्टनर और आउटरीच देशों के शीर्ष नेता पहुंचे। ओपन प्लेनरी सत्र में सतत विकास और तकनीकी सहयोग पर चर्चा।
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: भारत मंडपम में पार्टनर देशों के प्रतिनिधियों का हुआ औपचारिक स्वागत, आर्थिक व तकनीकी सहयोग पर जोर
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नई दिल्ली ब्रिक्स समिट: दूसरे दिन पार्टनर और आउटरीच देशों के साथ महामंथन, भारत की अध्यक्षता में समावेशी विकास का खाका तैयार
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BRICS New Delhi 2026: सम्मेलन के अंतिम दिन भारत मंडपम में जुटे सदस्य और साझेदार देश, बहुपक्षीय सुधारों और डिजिटल ढांचे पर चर्चा
नई दिल्ली: भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन रविवार को विभिन्न ब्रिक्स पार्टनर देशों और आउटरीच आमंत्रित देशों के शीर्ष नेता एवं उच्चस्तरीय प्रतिनिधि प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम पहुंचे। सम्मेलन के पहले दिन शनिवार को सभी सदस्य देशों द्वारा सर्वसम्मति से 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' स्वीकार किए जाने के बाद, दूसरे दिन का मुख्य ध्यान वैश्विक आर्थिक स्थिरता, तकनीकी नवाचार और साझेदार देशों के साथ समग्र सहयोग का दायरा बढ़ाने पर केंद्रित है।
रविवार सुबह से ही भारत मंडपम के लेवल 2 पर पार्टनर और आमंत्रित देशों के राष्ट्राध्यक्षों, शासनाध्यक्षों और प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों का आगमन शुरू हुआ। जहां भारतीय अधिकारियों व राजनयिकों द्वारा उनका स्वागत किया गया। इसके बाद सदस्य देशों और पार्टनर देशों के नेताओं के बीच ग्रुप फोटोग्राफ सत्र आयोजित हुआ, जिसके तुरंत बाद आधिकारिक ओपन प्लेनरी सत्र की शुरुआत हुई।
ओपन सेशन का एजेंडा: नवाचार, सहयोग और निरंतरता
दूसरे दिन आयोजित मुख्य ओपन सेशन का विषय "रेज़िलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी: शेपिंग द फ्यूचर फॉर इन्क्लूसिव ग्लोबल ग्रोथ" रखा गया है। यह विषय भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के उस मूल मंत्र से सीधे जुड़ा है, जिसका उद्देश्य आर्थिक चुनौतियों, जलवायु संकट और आपूर्ति श्रृंखलाओं में आने वाले व्यवधानों से निपटने के लिए व्यावहारिक ढांचा तैयार करना है।
इस सत्र में पूर्ण सदस्य देशों के अलावा आमंत्रित साझेदार देशों के नेताओं ने भी अपने विचार साझा किए। विकासशील देशों में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के विस्तार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग और फिनटेक सहयोग को लेकर विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की गई। सदस्य देशों ने रेखांकित किया कि वैश्विक वित्तीय और व्यापार प्रणाली को अधिक लचीला बनाने के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं में आपसी लेन-देन को बढ़ावा देना और सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को आसान बनाना समय की मांग है।
पार्टनर देशों की भूमिका और विस्तारित ब्रिक्स का दायरा
ब्रिक्स संगठन अब केवल अपने संस्थापक या पूर्ण सदस्यों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि 11 पूर्ण सदस्यों (भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात) के साथ 10 प्रमुख भागीदार देशों की सहभागिता ने इसे विश्व की लगभग आधी आबादी और वैश्विक जीडीपी के 40 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करने वाला मंच बना दिया है।
पार्टनर देशों जिनमें बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं की इस शिखर बैठक में उपस्थिति विशेष महत्व रखती है। इन देशों के प्रतिनिधियों ने ऊर्जा सुरक्षा, सतत कृषि, आपदा जोखिम प्रबंधन और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के लिए रियायती विकास वित्तपोषण की सुलभता पर अपनी प्राथमिकताओं को प्रमुखता से रखा।
द्विपक्षीय वार्ताओं का दौर भी जारी
ओपन सेशन के समानांतर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन कई देशों के शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों में भी शामिल हो रहे हैं। इनमें दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव सहित अफ्रीका और एशिया के कई देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ताएं तय हैं।
इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य आपसी व्यापार में वृद्धि, रक्षा एवं सुरक्षा साझेदारी, स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ग्लोबल साउथ की सामूहिक प्राथमिकताओं को समन्वित करना है।
सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन
शिखर सम्मेलन के चलते नई दिल्ली के लुटियंस जोन और भारत मंडपम के आसपास बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र तैनात रहा। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस द्वारा जारी योजना के तहत वीआईपी काफिलों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करते हुए आम जनता की असुविधा को न्यूनतम रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों और नियमित डायवर्जन की व्यवस्था की गई।
शिखर सम्मेलन के समापन पर भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत तय किए गए प्राथमिक क्षेत्रों में आगे की रणनीति और विभिन्न कार्यसमूहों के निर्णयों का सारांश औपचारिक रूप से साझा किए जाने की उम्मीद है।
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