BRICS Summit 2024: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओपन सेशन में रखा भारत का विजन, ग्लोबल साउथ और बहुपक्षीय सुधारों पर दिया जोर
रूस के कज़ान में 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के ओपन प्लेनरी सेशन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया। उन्होंने ग्लोबल साउथ, यूएन सुधार, आतंकवाद और बहुपक्षीय सहयोग पर भारत का मजबूत रुख स्पष्ट किया।
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कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी ने आतंकवाद और निष्पक्ष वैश्विक व्यापार प्रणाली पर सदस्य देशों से की साझा कार्रवाई की अपील
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BRICS Plenary Session: विस्तार के बाद पहली बार मंच पर जुटे 9 देश, प्रधानमंत्री मोदी बोले- नई ऊर्जा के साथ काम करे ब्रिक्स
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रूस के कज़ान में ब्रिक्स सम्मेलन का दूसरा दिन: पीएम मोदी ने दुनिया के ज्वलंत मुद्दों पर सामने रखा भारत का स्पष्ट रुख
रूस के ऐतिहासिक शहर कज़ान में आयोजित 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगठन के ओपन प्लेनरी सेशन को संबोधित किया। ब्रिक्स के हालिया विस्तार के बाद यह पहला औपचारिक पूर्ण अधिवेशन है, जहां संस्थापक सदस्यों के साथ नए शामिल हुए देशों के राष्ट्राध्यक्ष एक मंच पर उपस्थित रहे। अपने व्यापक संबोधन में भारतीय प्रधानमंत्री ने समकालीन विश्व व्यवस्था, भू-राजनीतिक चुनौतियों, आर्थिक प्राथमिकताओं और विकासशील देशों की प्राथमिकताओं पर भारत का स्पष्ट और संतुलित दृष्टिकोण रखा।
प्रधानमंत्री ने सत्र को संबोधित करते हुए रेखांकित किया कि मौजूदा दौर में जब दुनिया अनेक तरह के तनावों, आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं और तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रही है, तब ब्रिक्स जैसी बहुपक्षीय संस्थाओं की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स को दुनिया की वास्तविकताओं को दर्शाने वाली संस्था के रूप में कार्य करना चाहिए, न कि किसी विशेष धड़े के विकल्प के तौर पर।
ग्लोबल साउथ के हितों की मजबूती से पैरवी
अपने संबोधन के शुरुआती हिस्से में प्रधानमंत्री मोदी ने विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं यानी ‘ग्लोबल साउथ’ के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन और आर्थिक स्थिरता ऐसे विषय हैं जो सीधे तौर पर आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि ब्रिक्स देशों को इन चुनौतियों से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी साझाकरण और नवाचार पर आधारित ठोस साझेदारी विकसित करनी चाहिए।
भारत ने इस बात पर विशेष बल दिया कि वित्तीय समावेशन, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में आपसी अनुभव साझा करने से विकासशील देशों को सीधा लाभ मिल सकता है। उन्होंने भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) और डिजिटल गवर्नेंस के सफल प्रयोगों का उल्लेख करते हुए अन्य सदस्य देशों के साथ इन तकनीकों के आदान-प्रदान की प्रतिबद्धता दोहराई।
वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता
प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, विश्व व्यापार संगठन और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के बुनियादी ढांचे में लंबे समय से लंबित सुधारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बीसवीं सदी के मध्य में बने वैश्विक संस्थान इक्कीसवीं सदी की चुनौतियों का प्रभावी समाधान नहीं दे पा रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि वैश्विक शासन व्यवस्था में समय रहते व्यापक और सार्थक सुधार नहीं किए गए, तो बहुपक्षीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगता रहेगा। भारत का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार होना चाहिए, ताकि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों को उनका न्यायसंगत प्रतिनिधित्व मिल सके।
आतंकवाद और साइबर सुरक्षा पर साझा रुख का आह्वान
संबोधन के दौरान सुरक्षा से जुड़े विषयों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने सीमा पार आतंकवाद और कट्टरपंथ के खतरे को अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने दोहरे मापदंडों से परे हटकर आतंकवाद के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता की नीति अपनाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने और युवाओं के ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच खुफिया सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, आधुनिक युद्ध और जासूसी के बढ़ते साइबर खतरों को देखते हुए जिम्मेदार डिजिटल वातावरण बनाने पर भी उन्होंने विचार प्रस्तुत किए।
आर्थिक सहयोग और स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन
आर्थिक एजेंडे पर चर्चा करते हुए ओपन सेशन में इस बात पर विमर्श हुआ कि कैसे ब्रिक्स देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार को अधिक सुदृढ़ और जोखिम-मुक्त बना सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि व्यापार और निवेश को बढ़ाने के लिए सीमा शुल्क प्रक्रियाओं का सरलीकरण और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार आवश्यक है।
उन्होंने सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार को प्रोत्साहित करने की व्यवहार्य पहलों का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वित्तीय प्रणालियों का विकास अंतरराष्ट्रीय कानूनों, वित्तीय स्थिरता और पारदर्शिता के मानकों के अनुरूप होना चाहिए ताकि वैश्विक बाजार में विश्वास बना रहे।
विस्तारित ब्रिक्स की नई गतिशीलता
उल्लेखनीय है कि यह शिखर सम्मेलन इसलिए भी विशेष माना जा रहा है क्योंकि इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे नए सदस्य पूर्ण भागीदारी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने नए सदस्यों का औपचारिक स्वागत करते हुए कहा कि संगठन का यह विस्तार इसके वैश्विक प्रभाव और प्रासंगिकता को दर्शाता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि नए साझेदारों के आने से ऊर्जा, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे। साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि विस्तार के साथ संगठन के बुनियादी सिद्धांतों समानता, सर्वसम्मति और आपसी सम्मान को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।
पर्यावरण और तकनीकी सहयोग
अपने संबोधन के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री ने पर्यावरणीय स्थिरता और जलवायु न्याय की बात रखी। उन्होंने कहा कि विकसित देशों को जलवायु वित्तपोषण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करना चाहिए, जबकि विकासशील देशों को अपनी ऊर्जा संक्रमण योजनाओं को संतुलित और यथार्थवादी तरीके से आगे बढ़ाने की जरूरत है। भारत की ओर से शुरू की गई 'मिशन लाइफ' (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) और 'अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन' जैसी पहलों को उन्होंने वैश्विक दक्षिण के लिए उपयोगी उपकरण बताया।
कुल मिलाकर, कज़ान में ब्रिक्स के ओपन प्लेनरी सेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन व्यावहारिक दृष्टिकोण, रचनात्मक सुधारों और विकासशील विश्व के साझा भविष्य के निर्माण पर केंद्रित रहा, जिसने आगामी वर्षों के लिए मंच की दिशा को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान किए।
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