BRICS Summit: ब्रिक्स सम्मेलन के लिए दिल्ली पहुंचे वैश्विक नेता, रूस, ईरान, दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों के प्रतिनिधिमंडल का आगमन
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए विश्व नेताओं का दिल्ली पहुंचना जारी है। रूस, ईरान, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इंडोनेशिया, मलेशिया और यूएई के प्रतिनिधिमंडल राजधानी पहुंचे।
- BRICS Summit: ब्रिक्स सम्मेलन के लिए दिल्ली पहुंचे वैश्विक नेता, रूस, ईरान, दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों के प्रतिनिधिमंडल का आगमन
- BRICS Summit in Delhi: राजधानी में वैश्विक महामंथन की तैयारी, बहुपक्षीय सहयोग और आर्थिक साझेदारी पर केंद्रित रहेगा एजेंडा
- Delhi BRICS Meeting: रूस, यूएई, मिस्र और आसियान साझेदार दिल्ली पहुंचे, वैश्विक चुनौतियों और व्यापार विस्तार पर होगी चर्चा
- Global Diplomacy: ब्रिक्स समूह के नेताओं के आगमन से दिल्ली में कूटनीतिक सरगर्मी तेज, द्विपक्षीय वार्ताओं का दौर शुरू
ब्रिक्स (BRICS) समूह से जुड़े उच्चस्तरीय संवाद और बहुपक्षीय सम्मेलन के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के भारत पहुंचने का क्रम तेज हो गया है। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित इस महत्वपूर्ण राजनयिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए रूस, ईरान, मिस्र, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सहित कई भागीदार देशों के राष्ट्राध्यक्ष, वरिष्ठ मंत्री और उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंच चुके हैं। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और राजनयिकों ने पारंपरिक औपचारिक प्रोटोकॉल के साथ विदेशी मेहमानों की अगवानी की। इस वैश्विक आयोजन के मद्देनजर राजधानी में सुरक्षा के व्यापक और कड़े प्रबंध किए गए हैं, जबकि राजनयिक गलियारों में द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संवाद को लेकर गतिविधियां चरम पर हैं।
- वैश्विक साझेदारी और बदले भू-राजनीतिक समीकरण
हाल के वर्षों में ब्रिक्स समूह के ढांचे में हुआ विस्तार इसे वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज के रूप में और अधिक प्रभावशाली मंच बनाता है। पारंपरिक रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के इस संगठन में मिस्र, ईरान, यूएई जैसे प्रमुख देशों के जुड़ने तथा दक्षिण-पूर्व एशिया से इंडोनेशिया और मलेशिया जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की सहभागिता ने इसके आर्थिक और रणनीतिक दायरे को व्यापक रूप दिया है।
सम्मेलन के दौरान वैश्विक वित्तीय ढांचे में सुधार, स्थानीय मुद्राओं में व्यापारिक भुगतान को बढ़ावा देने, आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण और विकासशील देशों के बुनियादी ढांचे में निवेश पर विस्तृत विचार-विमर्श की रूपरेखा तय की गई है। जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनावों, व्यापारिक प्रतिबंधों और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच यह बैठक बहुपक्षीय संवाद को नई गति प्रदान करने के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील और अहम मानी जा रही है।
- नई दिल्ली में सुरक्षा और प्रोटोकॉल के कड़े इंतजाम
विदेशी गणमान्य व्यक्तियों और सुरक्षा श्रेणियों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और विशेष सुरक्षा एजेंसियों ने राजधानी के लुटियंस जोन और सम्मेलन स्थल के आसपास बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र स्थापित किया है। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लेकर प्रमुख होटलों और आयोजन स्थल तक के मार्गों पर विशेष यातायात व्यवस्था लागू की गई है ताकि सामान्य नागरिक आवागमन को कम से कम असुविधा हो और वीवीआईपी आवाजाही भी सुरक्षित रूप से संचालित हो सके।
होटल परिसरों और सम्मेलन केंद्रों के आसपास ड्रोन रोधी प्रणालियां और त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) तैनात किए गए हैं। राजनयिक स्तर पर प्रत्येक देश के प्रतिनिधिमंडल के साथ समन्वय के लिए संपर्क अधिकारी (Liaison Officers) नियुक्त किए गए हैं, जो प्रोटोकॉल और बैठकों के समय-सारणी का सुचारु संचालन सुनिश्चित कर रहे हैं।
- एजेंडे के प्रमुख मुद्दे: व्यापार, तकनीक और संप्रभुता
सम्मेलन के कार्यसत्रों में कई प्रमुख विषय केंद्र में रहने की संभावना है। सबसे पहला और महत्वपूर्ण विषय वैश्विक व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देना है, जिससे डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता को कम किया जा सके और सदस्य देशों के बीच प्रत्यक्ष लेन-देन को आसान बनाया जा सके। इसके अलावा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI), सीमा पार भुगतान प्रणाली और फिनटेक सहयोग पर भी विचार-विमर्श निर्धारित है।
दूसरा महत्वपूर्ण आयाम जलवायु वित्त (Climate Finance) और ऊर्जा सुरक्षा का है। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखते हुए हरित ऊर्जा की ओर बढ़ने के लिए आवश्यक वित्तीय और तकनीकी सहायता पर आम सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा, कृषि व्यापार में बाधाओं को दूर करने और दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने जैसे मानवीय और आर्थिक विषय भी कार्यसूची में प्रमुखता से शामिल हैं।
- द्विपक्षीय मुलाकातों का दौर भी रहेगा सक्रिय
मुख्य बहुपक्षीय सत्रों के इतर, विभिन्न देशों के नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ताओं की एक लंबी श्रृंखला भी आयोजित की जा रही है। भारतीय नेतृत्व के साथ रूसी प्रतिनिधियों, पश्चिम एशियाई साझेदारों (यूएई और ईरान) और अफ्रीकी तथा दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रतिनिधियों की अलग-अलग बैठकें तय की गई हैं।
इन द्विपक्षीय संवादों में आपसी व्यापार संतुलन, रणनीतिक साझेदारी, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी तालमेल को सुदृढ़ करने पर चर्चा होगी। विदेश मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि भारत की विदेश नीति के संदर्भ में यह सम्मेलन रणनीतिक स्वायत्तता को दर्शाने और विभिन्न वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखने का एक प्रभावी मंच प्रस्तुत करता है।
इस सम्मेलन के निष्कर्षों पर केवल सदस्य देशों की ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और पश्चिमी जगत की भी निगाहें टिकी हैं। उभरती अर्थव्यवस्थाएं यह देखना चाहती हैं कि ब्रिक्स किस प्रकार व्यावहारिक और समावेशी आर्थिक नीतियां सामने लाता है, जो विकासशील देशों की वास्तविक जरूरतों को पूरा कर सकें।
सम्मेलन के समापन पर एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किए जाने की परंपरा रही है, जिसमें वैश्विक राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा परिदृश्य पर सदस्य देशों की साझा समझ और भविष्य की कार्ययोजना का विवरण दर्ज होगा। आने वाले दिनों में होने वाले सत्रों के माध्यम से यह तय होगा कि वैश्विक व्यवस्था में संतुलन साधने की दिशा में यह सम्मेलन क्या नई राह दिखाता है।
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