Haivan Movie Review: मलयालम हिट 'ओप्पम' के हिंदी रूपांतरण में दिखे कई बदलाव, बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों की धीमी प्रतिक्रिया
प्रियदर्शन निर्देशित फिल्म 'हैवान' सिनेमाघरों में रिलीज, मोहनलाल की सस्पेंस-थ्रिलर 'ओप्पम' का है आधिकारिक हिंदी रीमेक
- प्रियदर्शन निर्देशित फिल्म 'हैवान' सिनेमाघरों में रिलीज, मोहनलाल की सस्पेंस-थ्रिलर 'ओप्पम' का है आधिकारिक हिंदी रीमेक
- फिल्म 'हैवान' रिलीज: दृष्टिबाधित मुख्य किरदार और बदले की मर्डर मिस्ट्री, क्या ओरिजिनल फिल्म का जादू दोहरा पाए प्रियदर्शन?
- Box Office: थ्रिलर ड्रामा 'हैवान' की शुरुआत ठंडी, दक्षिण भारतीय रीमेक के सामने कमजोर स्क्रीनप्ले बना चुनौती
प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक प्रियदर्शन की नई हिंदी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म 'हैवान' इस शुक्रवार देश भर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो गई है। यह फिल्म वर्ष 2016 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर मलयालम फिल्म 'ओप्पम' का आधिकारिक हिंदी रूपांतरण है। दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले प्रियदर्शन ने हिंदी दर्शकों के लिए इस कहानी को नए कलाकारों और थोड़े बदले हुए ट्रीटमेंट के साथ पेश किया है। हालांकि, रिलीज के पहले दिन से मिल रहे शुरुआती रुझानों और दर्शकों की प्रतिक्रिया से यह साफ दिख रहा है कि फिल्म टिकट खिड़की पर दर्शकों की भारी उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पा रही है।
फिल्म का ताना-बाना एक दृष्टिबाधित (विजुअली इम्पेयर्ड) व्यक्ति के इर्द-गिर्द बुना गया है, जो एक बहुमंजिला आवासीय परिसर में लिफ्ट ऑपरेटर और केयरटेकर के रूप में कार्यरत है। उसकी सुनने और सूंघने की इंद्रियां अत्यधिक तीव्र हैं, जिसके चलते वह आसपास की गतिविधियों को सामान्य लोगों से कहीं बेहतर ढंग से महसूस कर लेता है।
कहानी में नया मोड़ तब आता है जब उसी परिसर में रहने वाले एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की रहस्यमयी परिस्थितियों में हत्या हो जाती है। मृतक न्यायाधीश अतीत में एक खूंखार अपराधी को सजा सुना चुके होते हैं, जो जेल से छूटने के बाद प्रतिशोध की आग में जल रहा होता है। संयोगवश, हत्या के समय दृष्टिबाधित नायक अपराध स्थल पर मौजूद होता है। परिस्थितियां कुछ ऐसी बनती हैं कि पुलिस प्राथमिक जांच में उसी सीधे-सादे कर्मचारी को मुख्य संदिग्ध मान बैठती है। इसके बाद शुरू होती है असली कातिल की पहचान करने, खुद को बेकसूर साबित करने और उस पूर्व न्यायाधीश की अनाथ बेटी की जान बचाने की जद्दोजहद, जो कातिल का अगला निशाना है।
ओरिजिनल 'ओप्पम' की तुलना में कहां पिछड़ी फिल्म
मलयालम में बनी मूल फिल्म 'ओप्पम' में दिग्गज अभिनेता मोहनलाल ने दृष्टिबाधित नायक 'जयरामन' का किरदार निभाया था। उस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी उसका कसा हुआ स्क्रीनप्ले, निर्देशक का संयम और पृष्ठभूमि संगीत का सटीक इस्तेमाल था, जिसने अंत तक दर्शकों को सीट से बांधे रखा था।
हिंदी रूपांतरण 'हैवान' में प्रियदर्शन ने कहानी के मूल ढांचे को तो बरकरार रखा है, लेकिन उत्तर भारत के दर्शकों के अनुकूल बनाने की कोशिश में फिल्म का मिजाज काफी बदल गया है। जहां ओरिजिनल फिल्म सस्पेंस और सटल ड्रामा पर टिकी थी, वहीं 'हैवान' में कुछ मेलोड्रामैटिक दृश्य और अनावश्यक खींचे गए संवाद फिल्म की गति को धीमा कर देते हैं। सस्पेंस और मिस्ट्री शैलियों की फिल्मों में रफ्तार और तनाव सबसे अहम पहलू होते हैं। इस फिल्म के मध्यांतर के बाद कुछ ऐसे दृश्य हैं जो दर्शकों के कौतूहल को बनाए रखने के बजाय कहानी के प्रवाह को बाधित करते हैं।
तकनीकी पक्ष और निर्देशन
तकनीकी दृष्टिकोण से प्रियदर्शन का निर्देशन हमेशा की तरह साफ-सुथरा और फ्रेमिंग के लिहाज से संतुलित दिखता है। सिनेमैटोग्राफी में बंद कमरों, संकरे रास्तों और रात के दृश्यों को प्रभावी ढंग से कैद किया गया है, जो एक थ्रिलर फिल्म के आवश्यक माहौल का निर्माण करते हैं।
किंतु साउंड डिजाइन और बैकग्राउंड स्कोर के स्तर पर फिल्म कुछ कमजोर साबित होती है। थ्रिलर जॉनर में साउंड इफेक्ट्स दर्शक के मन में डर और उत्सुकता पैदा करने का मुख्य जरिया होते हैं। 'हैवान' का बैकग्राउंड म्यूजिक कई महत्वपूर्ण दृश्यों में उस स्तर का तनाव पैदा नहीं कर पाता, जिसकी उम्मीद एक क्लासिक सस्पेंस फिल्म से की जाती है। संपादन (एडिटिंग) के स्तर पर भी फिल्म को और चुस्त किया जा सकता था, विशेष रूप से दूसरे भाग में जहां क्लाइमेक्स तक पहुंचने की प्रक्रिया जरूरत से ज्यादा लंबी महसूस होती है।
अभिनय और मुख्य किरदारों का प्रभाव
फिल्म के मुख्य अभिनेता ने एक दृष्टिबाधित व्यक्ति के शारीरिक हाव-भाव और संवेदनाओं को पर्दे पर उतारने का ईमानदार प्रयास किया है। उनकी चाल-ढाल और संवाद अदायगी में मेहनत साफ नजर आती है। फिर भी, भावनात्मक दृश्यों में गहराई की कुछ कमी खटकती है, जिसकी वजह से दर्शक मुख्य किरदार के दर्द और उसके संघर्ष से पूरी तरह भावनात्मक जुड़ाव महसूस नहीं कर पाते।
खलनायक की भूमिका निभाने वाले कलाकार ने अपने किरदार में क्रूरता और बदले की भावना को ठीक से उभारा है, लेकिन उनके चरित्र को स्क्रीनप्ले में उतना मजबूत बैकग्राउंड नहीं मिल पाया, जिससे उनका डर पर्दे पर पूरी तरह हावी हो सके। सहायक कलाकारों में पुलिस अधिकारी और अनाथ बच्ची का किरदार निभाने वाले कलाकारों का काम सामान्य और संतोषजनक रहा है।
दर्शकों की प्रतिक्रिया और बॉक्स ऑफिस का मिजाज
सिनेमाघरों से सामने आ रही शुरुआती प्रतिक्रियाओं के अनुसार, जिन दर्शकों ने पहले से मलयालम फिल्म 'ओप्पम' नहीं देखी थी, उनके लिए यह एक औसत दर्जे की मर्डर मिस्ट्री है जिसे एक बार देखा जा सकता है। वहीं, जो दर्शक ओरिजिनल फिल्म देख चुके हैं, उन्हें यह रीमेक काफी हल्का और प्रभावहीन लगा।
पहले दिन सिनेमाघरों में सुबह और दोपहर के शोज में दर्शकों की उपस्थिति बेहद सामान्य दर्ज की गई है। मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन दोनों ही जगह शुरुआती आंकड़े ठंडे रहे हैं। वर्तमान समय में जब दक्षिण भारतीय मूल की कई फिल्में ओटीटी प्लेटफॉर्मों पर सबटाइटल या डबिंग के साथ आसानी से उपलब्ध हैं, ऐसे में किसी भी पुरानी हिट फिल्म का सीधा रीमेक बनाना निर्देशकों के लिए एक बड़ा जोखिम साबित हो रहा है। दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने के लिए केवल जानी-पहचानी कहानी काफी नहीं है, बल्कि उसमें नवीनता और असाधारण प्रस्तुति की दरकार होती है, जिसमें 'हैवान' आंशिक रूप से संघर्ष करती दिखती है।
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