दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद के संरक्षण को लेकर किरेन रिजिजू से मिला जमीयत का प्रतिनिधिमंडल, सौंपा ज्ञापन
दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद और कब्रिस्तान के संरक्षण के लिए जमीयत उलमा-ए-हिंद ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को सौंपा ज्ञापन। तत्काल हस्तक्षेप की मांग।
राजधानी दिल्ली में स्थित ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद और उससे जुड़े प्राचीन कब्रिस्तान के संरक्षण व सुरक्षा को लेकर जमीयत उलमा-ए-हिंद ने केंद्रीय स्तर पर हस्तक्षेप का अनुरोध किया है। संगठन के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी के नेतृत्व में पहुंचे एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से भेंट कर जमीयत अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी की ओर से एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा। इस ज्ञापन में इबादतगाह के धार्मिक, पुरातात्विक और वैधानिक महत्व का विस्तृत ब्योरा देते हुए इसके अस्तित्व की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई है।
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि यह धार्मिक स्थल नई दिल्ली नगरपालिका परिषद की अधिकृत धरोहर सूची में 22वें क्रम पर तथा ऐतिहासिक दिल्ली गजट में 18वें स्थान पर दर्ज है, जो इसके सदियों पुराने वजूद और वैधानिक प्रामाणिकता को स्पष्ट रूप से सिद्ध करता है। इसके बावजूद हाल के दिनों में नमाजियों के प्रवेश पर अनुचित बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं और परिसर की विद्युत व जलापूर्ति भी बाधित कर दी गई है। इसके अतिरिक्त स्थल को क्षति पहुंचाए जाने या हटाने की आशंकाओं के चलते श्रद्धालुओं और स्थानीय समुदाय में गहरी चिंता व्याप्त है।
जमीयत ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह इस संवेदनशील मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए दिल्ली वक्फ बोर्ड और स्थानीय प्रशासनिक निकाय से संपूर्ण वस्तुस्थिति की आधिकारिक रिपोर्ट तलब करे, ताकि विरासत का संरक्षण सुनिश्चित हो सके। इस वार्ता के दौरान प्रतिनिधिमंडल में जमीयत उलमा दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष मौलाना मुहम्मद कासिम नूरी, उपाध्यक्ष मौलाना कारी आरिफ क़ासमी, संगठनात्मक सचिव हाफ़िज़ यूसुफ़ आज़मी, रेस कोर्स मस्जिद के इमाम व खतीब मौलाना हारून राही, केंद्रीय आयोजक मौलाना ज़ियाउल्लाह क़ासमी और मौलाना अरशद नदवी मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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