देवबंद का तल्हेड़ी बुजुर्ग रेलवे स्टेशन बना शोपीस: करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं रुकतीं ट्रेनें, रेल मंत्री से गुहार

सहारनपुर के देवबंद में तल्हेड़ी बुजुर्ग रेलवे स्टेशन करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सूना पड़ा है। ट्रेनों का ठहराव न होने से 60 से अधिक गांवों के लोग परेशान हैं।

By INA News Desk
Jul 9, 2026 - 21:31
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देवबंद का तल्हेड़ी बुजुर्ग रेलवे स्टेशन बना शोपीस: करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं रुकतीं ट्रेनें, रेल मंत्री से गुहार
करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी वीरान पड़ा है देवबंद का तल्हेड़ी बुजुर्ग रेलवे स्टेशन, ट्रेनों के ठहराव के लिए स्थानीय लोगों ने रेल मंत्री को भेजा पत्र

सहारनपुर जिले की देवबंद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला तल्हेड़ी बुजुर्ग रेलवे स्टेशन इन दिनों अपनी बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा के आंसू रो रहा है। केंद्र सरकार और रेलवे प्रशासन द्वारा हाल ही में इस स्टेशन के सुंदरीकरण और विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन इस भारी-भरकम बजट के बाद भी यात्रियों को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव न होने के कारण यह पूरा परिसर पिछले छह वर्षों से पूरी तरह सुनसान और वीरान पड़ा है। क्षेत्र के लोग लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि यहां पहले की तरह मुख्य यात्री ट्रेनों का ठहराव दोबारा बहाल किया जाए, ताकि स्थानीय यात्रियों को सुगम परिवहन का लाभ मिल सके।

एक दौर था जब यह रेलवे स्टेशन आस-पास के लगभग 60 से अधिक गांवों के लिए परिवहन की सबसे मजबूत और लाइफलाइन माना जाता था। ग्रामीण इलाकों के लोग, नौकरीपेशा, दूध विक्रेता और आम नागरिक इसी स्टेशन से ट्रेनों के माध्यम से सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद और दिल्ली तक का सफर बेहद किफायती और आसान तरीके से तय करते थे। वर्ष 2020 में आई वैश्विक महामारी के बाद से इस स्टेशन की रौनक पूरी तरह गायब हो गई। वर्तमान में इस स्टेशन पर महज सुबह के समय केवल एक लोकल ट्रेन रुकती है, जिसके बाद पूरे दिन यहां से केवल एक्सप्रेस ट्रेनें बिना रुके गुजर जाती हैं। वर्ष 2020 से पहले तक यहां प्रतिदिन कम से कम पांच जोड़ी पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों का नियमित ठहराव होता था।

क्षेत्र के व्यापारियों, रोजाना सफर करने वाले दैनिक यात्रियों और कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं को ट्रेनों के न रुकने की वजह से भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए शहर जाने में और व्यापारियों को अपना माल लाने-ले जाने के लिए महंगे निजी साधनों का उपयोग करना पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि छोटे-छोटे विकास कार्यों का श्रेय लेने के लिए तो आगे आते हैं, लेकिन इस गंभीर सार्वजनिक समस्या पर बार-बार शिकायत करने के बाद भी कोई ठोस ध्यान नहीं दे रहे हैं।

नेताओं और स्थानीय प्रशासन से निराश होकर अब क्षेत्र के ग्रामीणों, युवाओं और सामाजिक संगठनों ने सीधे देश के रेल मंत्री से दिल्ली में गुहार लगाई है। रेल मंत्रालय को भेजे गए पत्र में मांग की गई है कि तल्हेड़ी बुजुर्ग रेलवे स्टेशन के ऐतिहासिक महत्व और जनता की जरूरतों को देखते हुए उन सभी पुरानी ट्रेनों का ठहराव यहां तुरंत शुरू किया जाए जो पहले रुका करती थीं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक ट्रेनों का स्टॉपेज नहीं होगा, तब तक स्टेशन के सुंदरीकरण पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये पूरी तरह बेकार साबित होंगे। इस मांग को लेकर जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल उच्च अधिकारियों से भी मुलाकात करने की योजना बना रहा है।

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