Hardoi: हरदोई में धान की सीधी बुआई को बढ़ावा, खरीफ सत्र में 5000 हेक्टेयर का लक्ष्य।

जनपद में धान की सीधी बुआई (डीएसआर) तकनीक किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। पिछले खरीफ सत्र में 800 हेक्टेयर

May 26, 2026 - 15:11
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Hardoi: हरदोई में धान की सीधी बुआई को बढ़ावा, खरीफ सत्र में 5000 हेक्टेयर का लक्ष्य।
हरदोई में धान की सीधी बुआई को बढ़ावा, खरीफ सत्र में 5000 हेक्टेयर का लक्ष्य।

हरदोई। जनपद में धान की सीधी बुआई (डीएसआर) तकनीक किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। पिछले खरीफ सत्र में 800 हेक्टेयर क्षेत्रफल में की गई धान की सीधी बुआई से औसतन 65.70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्राप्त हुआ था। इसी सफलता से प्रेरित होकर इस वर्ष जिले में 5000 हेक्टेयर क्षेत्र में डीएसआर विधि से धान की बुआई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

विकास खंड बावन और कोथावाँ समेत अन्य क्षेत्रों में अब तक करीब 200 हेक्टेयर में बुआई की जा चुकी है। बावन ब्लॉक में कृषक नायब सिंह, शिव प्रकाश सिंह, आनंद कुमार सिंह, अनुज कुमार सिंह, प्रताप विक्रम सिंह, विष्णु कुमार पांडे, विश्वजीत प्रताप सिंह, उदय भान सिंह, राहुल कुमार सिंह और वीरेश प्रताप सिंह सहित कई किसानों ने बड़े पैमाने पर धान की सीधी बुआई की है। वहीं कोथावाँ ब्लॉक के ग्राम कुर्सी निवासी जयदीप द्विवेदी ने 30 एकड़ में डीएसआर तकनीक अपनाई है। उप कृषि निदेशक हरदोई सतीश पांडेय ने ग्राम नयागांव में किसान राहुल कुमार के खेत का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि किसान द्वारा पीआर-126 प्रजाति के धान का बीज 10 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से प्रयोग किया गया। बीज को थायरम से उपचारित करने के बाद लकी सीडर मशीन से सूखी विधि द्वारा बुआई की गई।

उप कृषि निदेशक ने बताया कि धान की सीधी बुआई से बीज, पानी और श्रम लागत में बड़ी बचत होती है। नर्सरी तैयार करने और रोपाई की आवश्यकता न होने से समय भी बचता है। साथ ही फसल जल्दी तैयार होने से पराली प्रबंधन के बाद रबी फसलों की समय से बुआई संभव हो जाती है। इस तकनीक से किसानों को लागत में लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक की बचत के साथ बेहतर उत्पादन मिल रहा है।

उन्होंने किसानों को सलाह दी कि डीएसआर विधि से बुआई का उपयुक्त समय 25 मई से 15 जून तक है। बुआई के लिए स्टेप सीडर, लकी सीडर, सीड ड्रिल और सुपर सीडर जैसी मशीनें उपयोगी हैं। बुआई के तुरंत बाद पेंडीमेथिलिन खरपतवारनाशी का प्रयोग कर सिंचाई करने से अच्छा जमाव होता है और खरपतवार की समस्या कम होती है। निरीक्षण के दौरान ग्राम सकतपुर में किसान अनुज सिंह के खेत में गन्ने की फसल के साथ अंतःफसल के रूप में कृषि विभाग द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई गई मिनीकिट उर्द फसल का भी अवलोकन किया गया। इस अवसर पर उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी सदर, प्रभारी बीज भंडार बावन सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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